'समर्थ' स्टार्टअप भारत के बेसहारा बुजुर्गों की जिंदगी में भर रहा खुशियां

एक ऐसा स्टार्टअप जो बना टूटे-बिखरे बुजुर्गों का सहारा...

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हमारे देश में बुजुर्गों का प्रतिशत सबसे कम है, जबकि यहां के ही सबसे ज्यादा पचास फीसदी बुजुर्ग अपनों से उत्पीड़ित हैं। एक तो ज्यादातर को इस कानून का पता नहीं, जो बुजुर्ग 'मेंटेनेंस एंड वेलफेयर आफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटीजेंस एक्ट, 2007' से वाकिफ हैं, वे अपनी संतानों के डर से कानून का सहारा नहीं लेना चाहते हैं। 'समर्थ' नाम का स्टार्टअप भारत के तीस शहरों में ऐसे उपेक्षित-उत्पीड़ित बुजुर्गों की जिंदगी में खुशियां भरने की कोशिश कर रहा है।

फोटो साभार- समर्थ स्टार्टअप
फोटो साभार- समर्थ स्टार्टअप
बुजुर्गों के उत्पीड़न के मामले में नागपुर सबसे आगे है, जहां 85 फीसदी बुजुर्ग उत्पीड़न के शिकार हैं। ज्यादातर बुजुर्ग अपने ही परिजनों के खिलाफ कार्रवाई से कतराते हैं। कमाऊ संतानें अपने बुजुर्ग माता-पिता को घर से अलग कर देती हैं। 

संयुक्त राष्ट्र के एक आकलन के अनुसार विश्व की आबादी में पैसठ साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों की तादाद सन् 2050 तक दोगुनी बढ़कर 15.6 फीसदी हो जाएगी। बुजुर्गों के लिए कहीं परिवार हैं तो कहीं आश्रम लेकिन उनकी कहीं भी उपयुक्त देखभाल नहीं। यद्यपि बुजुर्गों की जिंदादिली भी कुछ कम नहीं होती है। पिछले साल अमेरिका में एक महिला ने पैराशूट के जरिए तीन हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाकर अपना 94वां जन्मदिन मनाया था। दुनिया में संख्या के प्रतिशत के हिसाब से सबसे ज्यादा 27 प्रतिशत बुजुर्ग जापान में और सबसे कम छह प्रतिशत भारत में हैं। इटली में 23 प्रतिशत, पुर्तगाल में 22 प्रतिशत, जर्मनी, फिनलैंड, बुल्गारिया में 21 प्रतिशत, स्वीडन, लातविया, ग्रीस, फ्रांस, डेनमार्क में 20 प्रतिशत, ब्रिटेन, स्पेन, स्लोवेनिया, नीदरलैंड, माल्टा, लिथुआनिया, एस्टोनिया, हंगरी, चेक, बेल्जियम, ऑस्ट्रिया में 19 प्रतिशत, स्विट्जरलैंड, रोमानिया में 18 प्रतिशत, कनाडा, सर्बिया, पोलैंड, नॉर्वे में 17 प्रतिशत, यूक्रेन में 16 प्रतिशत, अमेरिका, स्लोवाकिया न्यूजीलैंड, क्यूबा में 15 प्रतिशत और चीन में 11 प्रतिशत बुजुर्ग हैं।

कुछ ही साल पहले भारत सरकार ने बुजुर्गों को सामाजिक और कानूनी सुरक्षा मुहैया कराने के लिए 'मेंटेनेंस एंड वेलफेयर आफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटीजेंस एक्ट, 2007' कानून बनाया था लेकिन लेकिन ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। जो जानते हैं, अपनी संतानों के डर से कानूनी सहायता नहीं लेना चाहते हैं। बुजुर्गों के उत्पीड़न के मामले में नागपुर सबसे आगे है, जहां 85 फीसदी बुजुर्ग उत्पीड़न के शिकार हैं। ज्यादातर बुजुर्ग अपने ही परिजनों के खिलाफ कार्रवाई से कतराते हैं। कमाऊ संतानें अपने बुजुर्ग माता-पिता को घर से अलग कर देती हैं। उनके पास बुजुर्ग माता-पिता का दुख दर्द सुनने का समय नहीं है। बेटे-बहू या बेटी-दामाद के साथ रहने वाले बुजुर्गों की हालत दयनीय है। टूटते संयुक्त परिवारों ने बुजुर्गों की बदहाली बढ़ाई है।

हमारे देश के बारह महानगरों में हुए हेल्पेज इंडिया के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि साठ साल से ज्यादा उम्र वाले बुजुर्गों की लगभग आधी आबादी उत्पीड़न की शिकार है। भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों का सम्मान करने की परंपरा दरकिनार हो चुकी है। सर्वेक्षण के दौरान बारह सौ से ज्यादा बुजुर्गों से बातचीत की गई। इनमें से लगभग पचास प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह अपने ही घर में बेगाने हैं। उनको लगभग रोजाना किसी न किसी रूप में अत्याचार सहना पड़ता है। फिलहाल भारत में ऐसे लोगों की आबादी 10 करोड़ है, जो अनुमानतः 2050 तक बढ़ कर 32 करोड़ हो जाएगी। सर्वेक्षण से पता चला कि लगभग 70 फीसदी लोगों को पुलिस हेल्पलाइन के बारे में जानकारी है लेकिन घर का माहौल खराब होने की वजह से शिकायत नहीं करना चाहते। ज्यादातर 61 प्रतिशत बुजुर्ग बहुओं के उत्पीड़न के शिकार हो रहे हैं। लगभग 92 प्रतिशत बुजुर्ग अपने मकान में ही कैदी की तरह रहते हैं।

हमारे देश में आशीष गुप्ता, अनुराधा दास माथुर, गौरव अग्रवाल, संजय आहूजा का 'समर्थ कम्युनिटी' और 'समर्थ लाइफ मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड' स्टार्टअप उपेक्षा और उत्पीड़न के शिकार बड़े-बूढ़ों की जिंदगी में खुशियां भरने में जुटा है। 'समर्थ कम्युनिटी' बुजुर्गों के लिए सामुदायिक कार्यक्रम चलाता है और 'समर्थ लाइफ मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड' पूर्वनियत शुल्क लेकर सुविधाएं मुहैया कराता है। देशभर के कुल तीस शहरों में समर्थ कम्युनिटी के पांच हजार सदस्य हैं। इस कम्युनिटी का सदस्यता शुल्क सौ रुपए है, जो सिर्फ एक बार ही देय होता है। इसके बदले सदस्य को समर्थ से जुड़े रेस्टोरेंट, हॉस्पिटल, लैब, दवा दुकान आदि में 25 फीसदी तक छूट मिलती है। हर हफ्ते एक न्यूजलेटर भेजा जाता है। इसमें स्थानीय कार्यक्रमों की जानकारी के साथ सेवानिवृत लोगों के लिए नौकरियों के उपलब्ध अवसरों की सूचना भी दी जाती है। इस पत्रिका को पाने के लिए एक निश्चित सदस्यता शुल्क देना होता है।

‘समर्थ’ ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मैक्स हेल्थकेयर, कोलंबिया एशिया और अपोलो फार्मेसी के साथ करार कर रखा है। दिल्ली में मैक्स हेल्थकेयर ‘समर्थ’ के सदस्यों को आधा घंटा के अंदर एंबुलेंस उपलब्ध करा देता है। इसके लिए कोई फीस नहीं देनी होती है। ‘समर्थ’ ने दिल्ली पेन मैनेजमेंट सेंटर और मोर सुपरमार्केट के साथ भी करार कर रखा है। ‘समर्थ लाइफ मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ के माध्यम से कमाई होती है। इसका सब्सक्रिप्शन आधारित केयर प्लान दो हजार रुपये प्रति माह से शुरू होता है। इसमें 24 घंटे का इमरजेंसी रिस्पांस, हेल्थकेयर सपोर्ट, मेडिसिन मैनेजमेंट, होम सर्विसेज, सिक्यूरिटी एंड सेफ्टी सेट-अप्स, खरीदारी करने में सहयोग, शहर में या शहर से बाहर जाने के लिए सहायक की सुविधा मिलती है। बुजुर्गों की सुविधा के लिए ‘समर्थ’ ने कॉल सेंटर, मोबाइल एप, केयर मैनेजर की व्यवस्था कर रखी है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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