गजब! ऑनलाइन गोबर बेचने का स्टार्टअप!

लखनऊ के एसएमएस कॉलेज की अंकिता उपाध्याय ने गाय के गोबर को ऑनलाइन बेचने के लिए तैयार किया एक वेब प्लेटफॉर्म...

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इसे कहते हैं मिट्टी को सोने के भाव बेचना। मिट्टी तो भी कीमती हो चुकी है, आज के जमाने में तो कई बड़ी कंपनियां गोबर बेचकर मालामाल हो रही हैं। ऑनलाइन एक-एक पीस उपला पचास-पचास रुपए तक बिक रहा है। फिलहाल उपले तो ऑानलाइन मिल जा रहे हैं, एक मेधावी छात्रा ने ऑनलाइन गोबर बिक्री के स्टार्टअप का आइडिया पेश किया है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
अभी हाल ही में लखनऊ के एसएमएस कॉलेज की अंकिता उपाध्याय ने गाय के गोबर को ऑनलाइन बेचने के लिए एक वेब प्लेटफॉर्म तैयार करने का बिजनेस मॉडल प्रस्तुत किया है। उनका तर्क है कि आज गोबर, खाद से लेकर ईंधन तक प्रयोग में लाया जा रहा है, लेकिन इसके लिए कोई ऐसा प्लेटफॉर्म नहीं है, जहां ग्राहक और खरीदार एक जगह रहें।

स्टार्टअप और आंत्रेप्रेन्योरशिप की दुनिया बड़ी होती जा रही है। नए-नए अध्याय खुलते जा रहे हैं। रुझान बढ़ रहा है। इससे देश में उद्यमी युवाओं के उत्साह का पता चलता है। तकनीक के इस दौर में शोध एवं नवाचारों की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए इंटर-डिसिप्लिनरी और ट्रांस-डिसिप्लिनरी शोध कार्यों को बढ़ावा देने की अब पूरी गंभीरता से जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे भी सुझाव आ रहे हैं कि जो भी नवाचार और विचार प्रस्तुत किए जाएं, उनका जल्दी से पेटेंट भी करवा लिया करें, जिससे आइडियाज को रेवेन्यु मॉडल एवं बिजनेस मॉडल में बदलने में आसानी रहे।

अभी हाल ही में लखनऊ के एसएमएस कॉलेज की अंकिता उपाध्याय ने गाय के गोबर को ऑनलाइन बेचने के लिए एक वेब प्लेटफॉर्म तैयार करने का बिजनेस मॉडल प्रस्तुत किया है। उनका तर्क है कि आज गोबर, खाद से लेकर ईंधन तक प्रयोग में लाया जा रहा है, लेकिन इसके लिए कोई ऐसा प्लेटफॉर्म नहीं है, जहां ग्राहक और खरीदार एक जगह रहें। यह स्टार्टअप उसी का एक प्लेटफॉर्म होगा। दरअसल, लखनऊ में पिछले दिनो डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय में विभिन्न कॉलेजों के छात्रों के बिजनेस आइडियाज को प्रमोट करने के लिए इनोवेटिव आइडियाज की प्रदर्शनी आयोजित की गई तो उसमें दर्जन से अधिक बेस्ट आइडियाज सामने आए, उन्हीं में एक था अंकिता उपाध्याय का ऑनलाइन गोबर स्टार्टअप का प्रस्ताव।

आज किसी भी युवा के पास यदि कोई ऐसा आइडिया है, जिसमें दुनिया बदलने का दम हो तो आईआईटी कानपुर उसके स्टार्टअप की मदद करेगा। इसके लिए आईआईटी कानपुर में फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड रिसर्च इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (फर्स्ट) की स्थापना की गई है। कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर राजर्षि मुखोपाध्याय ने कार्यभार संभाल लिया है। इसके साथ ही कंपनी ने आईआईटी में पहले से संचालित हो रहे नौ इंक्यूबेटर को अपने अधीन कर लिया है।

इसमें सिडबी इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर, टेक्नोलॉजी बिजनेस इंक्यूबेटर, टेक्नोलॉजी इंक्यूबेशन एंड डेवलपमेंट एंटरप्रिन्योर्स, टेक्नोलॉजी एंटरप्रिन्योरशिप प्रमोशन, बायो इंक्यूबेटर एंड मेड टेक सेंटर, पॉवर सेक्टर इंक्यूबेटर फॉर डिप्लोमा इंजीनियर्स और टेक्सटाइल इंक्यूबेटर शामिल हैं। जल्द ही इसकी वेबसाइट और अन्य जानकारी आम लोगों के लिए भी जारी कर दी जाएगी। फर्स्ट कंपनी के तहत किसी भी स्टार्टअप आइडिया को सीड फंडिंग से लेकर हर तरह की मदद दी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि युवा उद्यमियों के प्रोत्साहन के लिए देश में नई स्टार्टअप नीति अब तक 19 राज्यों में लागू हो चुकी है। नए उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए जनवरी, 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई स्टार्टअप नीति जारी की थी। इस दिशा में नए उद्यमों को कर छूट देने, इंस्पेक्टर राज से मुक्ति और कैपिटल गेन टैक्स से छूट देने जैसी पहल की गई है। पहल की शुरुआत में केवल चार राज्यों में स्टार्ट अप नीति लागू हुई थी। इस प्रक्रिया को गति देने के लिए राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के बीच स्टार्टअप रैंकिंग की शुरुआत भी की गई है। इस रैंकिंग का लक्ष्य राज्यों को अपने यहां स्टार्टअप का बेहतर माहौल निर्मित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

गौरतलब है कि स्टार्टअप के तहत इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय पेटेंट शुल्क में 80 फीसद और ट्रेडमार्क फाइल करने में 50 फीसद की छूट देता है। इसी क्रम में देश के छत्तीसगढ़ राज्य में आंत्रप्रेन्योर्स ऑर्गनाइजेशन (ईओ) रायपुर चैप्टर की ओर से 9 मई को आंत्रप्रेन्योर ऑफ द ईयर 2018' अवॉर्ड्स आयोजित किया जा रहा है। अवॉर्ड स्मॉल, मिडिल, लार्ज और टिनी इंडस्ट्री कुल चार कैटेगिरी में दिए जाएंगे। अवॉर्ड्स के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 है।

अवॉर्ड फंक्शन के तहत 1 करोड़ तक की कंपनी को टिनी, 1 से 5 करोड़ तक को स्मॉल, 5 से 10 करोड़ तक मिडिल और 10 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर की कंपनी को लार्ज कैटेगिरी में शामिल किया जाना है। सभी कैटेगिरी में आंत्रप्रेन्योर्स ऑफ द ईयर, स्टार्टअप ऑफ द ईयर सहित 9-9 अवॉर्ड दिए जाएंगे। किसी एक बिजनेसमैन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। ज्ञातव्य है कि आंत्रप्रेन्योर्स ऑर्गनाइजेशन से 53 देशों के 12 हजार से ज्यादा नामी बिजनेसमैन जुड़े हुए हैं। इसके आज दुनियाभर में 153 चैप्टर हैं।

एक हैं वर्जिन ग्रुप के अरबपति फाउंडर रिचर्ड ब्रैनसन। वह आंत्रप्रेन्योर्स के लिए सुझाव देते हैं कि बिजनेस की सफलता एक ही चीज से तय होती है, और वह आपके नाम के पीछे लगे तीन अक्षर (एमबीए) नहीं हैं। इसे भूल जाइए, बिजनेस के बेसिक्स को भी याद मत रखिए। ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि लोगों को समझिए, उन पर भरोसा करिए, उन्हें प्रेरित करिए और उन्हें आगे बढ़ाने के बारे में सोचिए। ऐसा करने पर अद्भुत कामयाबी मिल सकती है। वह कहते हैं कि युवा उद्यमियों को खुद से बेहतर लोगों की तलाश भी करते रहना चाहिए। उन पर भरोसा कर उन्हें अपने स्टार्टअप की जिम्मेदारी सौंप दें। अपना ध्यान केवल अपने बिजनेस मॉडल के खास मुद्दे पर और बिजनेस बढ़ाने पर केंद्रित रखें।

रिचर्ड ब्रैनसन का मानना है कि आंत्रप्रेन्योर बिल्कुल अलग तरह के होते हैं। उन्हें अपने काम पर पूरा भरोसा होता है। इसलिए उनके आसपास भी प्रेरित और प्रोत्साहित करने वाले लोग होने चाहिए। यह भी ध्यान रखना होगा कि अपने साथ काम करने वाले लोगों को कड़वी चेतावनियों से स्टार्टअप अथवा आंत्रप्रेन्योर में अच्छी कामयाबी नहीं मिल पाती है। गलत व्यवहार करने से बचा जाए तो वे ही कठिन वक्त में सबसे ज्यादा साथ निभाते हैं। उन्हें परिवार की तरह रखना चाहिए। स्टार्ट अप में खास कर महिलाओं की योग्यता को जरूर परखते रहना चाहिए। उन्हें बेहतर काम दिखाने का अवसर देते रहना चाहिए क्योंकि वह ज्यादा क्रिएटिव और ताजा सोच वाली होती हैं।

वे हर क्षेत्र में कुछ अलग कर दिखाना चाहती हैं। स्टार्टअप और आंत्रप्रेन्योर के लिए एक और खास बात। रिचर्ड ब्रैनसन कहते हैं कि अपने साथ करने वालों में यदि किसी कोई गलती हो भी जाए तो उसे अपमानित अथवा दंडित करने की बजाए पहले की तरह उसको सपोर्ट देते रहना चाहिए। इससे आंत्रप्रेन्योर में उसका भरोसा बढ़ता है। वह दोबारा कोई गलती करने से बचता है। आगे चलकर वह अपनी कंपनी के लिए कुछ भी करने को हर वक्त तैयार रहता है।

कानपुर की अंकिता उपाध्याय के गाय के गोबर को ऑनलाइन बेचने के आइडिया पर कुछ लोगों को हंसी आ सकती है लेकिन देखिए कि एक बार पटियाला के मुरलीधर को जब घर में धार्मिक आयोजन के लिए उन्हें गाय के उपले की जरूरत पड़ी, तो काफी तलाश के बाद भी इंतजाम नहीं हो सका। बाद में उन्हें इंटरनेट से पता चला कि अमेजन, स्नैपडील व ई-बे जैसी कई बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां ऑनलाइन उपले बेच रही हैं। उन्होंने ऑनलाइन ऑर्डर किया और उपलों का पैकेट उनके घर पहुंच गया। प्रति पैकेट 275 रुपये में 12 उपले मिल गए। यानी गोबर से बने उपले का कारोबार पूरी दुनिया में फल-फूल रहा है।

धार्मिक आयोजनों के साथ ही किचन गार्डनिंग के लिए भी इनकी डिमांड है। जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड सहित कई देशों में किचन गार्डनिंग के लिए उपलों का इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा पूजा के लिए एनआरआइज विशेष रूप से गाय गोबर से बने उपलों की डिमांड करते रहे हैं। अब उन्हें कोई दिक्कत नहीं उठानी पड़ रही है। स्नैपडील कंपनी तो गोबर के दस उपले लगभग पांच सौ रुपए में बेंच रही है। कंपनी 42 फीसदी के डिस्काउंट के साथ इन उपलों को 289 रुपये में बेच रही है। आज के जमाने में गोबर कितना कीमती होता जा रहा है।

गोबर गैस प्लांट से बिजली बनाना तो सबको मालूम है लेकिन उत्तरप्रदेश में कुल्हड़ में गोबर से बिजली पैदा करने का अनोखा प्रयोग हो रहा है। ऑनलाइन सेल में अब गाय के गोबर से बना कंडा, उपला या गोइठा भरपूर मात्रा में बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध है। डिस्काउंट है, घर पर डिलिवरी हो रही है। डिलिवरी के समय ही पैसा चुकाने की भी सुविधा है। शॉपक्लूज डॉट कॉम पर यह ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है। यहां एक बड़ा उपला 220 रुपये में उपलब्ध है तो छोटे-छोटे 24 उपले 120 रुपये में भी। चूंकि जमाना ऑर्गेनिक का चल रहा है तो ऑर्गेनिक उपले भी 120 रुपये में मिल जा रहे हैं। इन उपलों पर 31 फीसदी से लेकर 70 फीसदी तक का डिस्काउंट मिल रहा है।

वैदिक गिफ्ट शॉप पर कंडे मिल रहे हैं। सूरत की कम्पनी पूनम नैचुरल गाय के गोबर से जलावन के अलावा गौ मूत्र भी बेच रही है। इंडियामार्ट की वेबसाइट थोक में उपले बेच रही है। धार्मिक कार्यों में गाय के गोबर से स्थान को पवित्र किया जाता है। गाय के गोबर से बने उपले से हवन कुंड की अग्नि जलायी जाती है। आज भी गांवों में महिलाएं सुबह उठ कर गाय के गोबर से घर के मुख्य द्वार को लीपती हैं। गौक्रांति डॉट ओआरजी पर गाय का गोबर उपलब्ध है। यह कंपनी अपना कच्चा माल गुजरात से लेकर भोपाल तक की लगभग 15 गौशालाओं से आपूर्ति कर रही है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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