सुरक्षा की परवाह किए बगैर एम्बुलेंस के लिए सीएम अखिलेश ने रोका अपना काफिला

0

सुरक्षा की परवाह किए बगैर एम्बुलेंस के लिए सीएम अखिलेश ने रोका अपना काफिला

ऐसा शायद पहली बार हो रहा होगा जब एक मरीज को ले जा रही एम्बुलेंस के लिए किसी मुख्यमंत्री ने अपनी सुरक्षा को ताक पर रख दिया हो। जी हां, हम बात कर रहे हैं उत्तप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की, सीएम सोमवार को बदायूं-बरेली और दिल्ली के मैराथन दौरे पर थे। बैठक के बाद जब वो अमौसी एयरपोर्ट से सरकारी आवास 5-कालिदास मार्ग के लिए लौट रहे थे तभी की ये घटना है।

बंगला बाजार इलाके की घटना

सीएम का काफिला एयरपोर्ट से बंगला बाजार पहुंचा ही था, जैसा कि आमतौर पर होता है वीवीआईपी के काफिले को पास देने के लिए आम यातायात को कुछ देर के लिए रोक लिया जाता है। बंगला बाजार इलाके में ट्रैफिक सीएम के काफिले के लिए रुका था तभी पीछे से एम्बुलेंस ने हूटर बजाया, एम्बुलेंस की आवाज सुनते ही सीएम ने फौरन अपने काफिले को रुकने का इशारा किया और एम्बुलेंस को पास देने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। सीएम का इशारा भर था कि पूरा काफिला एक तरफ रुक गया और एम्बुलेंस को पास दिया गया।

एम्बुलेंस को एस्कॉर्ट करने का भी दिया आदेश

सीएम ने ना सिर्फ अपने काफिले को रोका बल्कि अपने सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि एम्बुलेंस को केजीएमयू तक एस्कॉर्ट किया जाए, ताकि मरीज को अस्पताल तक पहुंचने में देरी ना हो।

सुरक्षाकर्मियों ने एम्बुलेंस के लिए बनाया ग्रीन कॉरिडोर

सीएम के निर्सुदेश पर सुरक्षाकर्मियों ने एम्बुलेंस के लिए पूरे रूट को ग्रीन कॉरिडोर में तब्दील कर दिया, और मरीज को केजीएमयू तक एस्कॉर्ट करते हुए ले गए जहां डॉक्टरों ने मुस्तैदी दिखाते हुए फौरन इलाज शुरू कर दिया।

मानवीय संवेदना की मिसाल गढ़ते सीएम अखिलेश

अक्सर ऐसा देखा और सुना जाता है कि वीवीआईपी अपनी दुनिया में मस्त रहते हैं। लेकिन सीएम अखिलेश यादव की पहल पूरे देश के माननीयों को जगाने के लिए काफी है। वैसे ये कोई पहला मामला नहीं है इसके पहले सोशल साइट्स के जरिए प्राप्त खबरों पर भी सीएम ने तत्परता दिखाते हुए एक्शन लिया है। लखनऊ के जीपीओ पर टाइपिस्ट कृष्ण कुमार की घटना, देवरिया की बच्ची रेनू के ट्यूमर का ऑपरेशन, गाजियाबाद की महिला ऑटो चालक रूबी सिंह को नया ऑटो दिलाने जैसी पहल भी सीएम कर चुके हैं। सीएम के इस फैसले की हर कोई तारीफ कर रहा है। सबके जुबान पर एक ही चर्चा है नेता हो तो ऐसा हो जो आमजन के दुख-दर्द को समझे। 

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...