बदलने को बहुत कुछ है, इरादा चाहिए-जेसिका टैंजेल्डर

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कुछ दिनों पहले हमने जेसिका के निजी सफर का पता लगाया था और आपसे उनकी उद्यमिता के बारे में कुछ और जानकारियां देने का वादा किया था।

एम्सटर्डम में एक जगह पर काम करते हुए जेसिका टैंजेल्डर ने उस अकेलेपन को देखा जो उद्यमी बनने वालों के सामने होती है। “आपको खुद पर शक करते हैं, आप दूसरों को खुद से आगे देखते हैं, एक विद्वेष का भाव पैदा होने लगता है और आंतरिक बाधा तैयार होने लगती है। ये आपकी उस रफ्तार को कम कर देता है जिससे आप अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे। इस तरह की सोच अपने काम की जगह पर अपने सहकर्मियों के साथ मतलब की चर्चा करने से रोकती है; चर्चा आमतौर पर एक-दूसरे का नाम जानने और मौसम के हाल पर केंद्रित हो जाती है।” इसी माहौल ने उसे इस मुद्दे की शिकायत करने के बजाए इस पर चर्चा शुरू करने के लिए प्रेरित किया जिससे कि इसमें कुछ बदलाव लाया जा सके। लंबी कहानी को संक्षेप करने के लिए उसने दोपहर के खाने से बीस मिनट इसकी चर्चा की शुरुआत की। “यहां बहुत ज्यादा वक्त खर्च नहीं करना था और वैसे भी लोगों को दोपहर के खाने के लिए तो अपनी सीट से उठना ही था। इसलिए मैंने इसे शुरू कर दिया।” उनके मुताबिक, उद्यमी दुनिया में मौजूद समस्याओं और चुनौतियों के समाधान तलाशना चाहते हैं लेकिन अगर ये उनकी अपनी क्षमता, बुनियादी मूल्य, प्रतीभा और जुनून से मेल न खाता हो, और वे दुनिया के लिए जो कुछ करना चाहते हों, तो एक समय के बाद उनकी इच्छाशक्ति खत्म हो सकती है और ये खुद के लिए सामयिक समाधान होगा। जेसिका उभरते उद्यमियों और स्टार्टअप्स को प्रशिक्षित और मदद करती है जहां वो उनकी मानसिकता पर फोकस करती हैं। इसका मतलब क्या है? वो कहती है, “जब आपकी मानसिकता अपनी जगह पर होती है तो आपका बर्ताव उसी से संचालित होता है और इससे ऐसे प्रभावी उत्पाद या सेवा का मिलना सुनिश्चित होता है जो बाजार के लिए ठीक हो और जो आपका दिमाग वाकई में हासिल करना चाहता है।” बैंगलोर के कार्यस्थल पर तमाम उद्यमियों के बीच हमने उसे अपने विचित्र और रोचक सत्र के दौरान कुछ खास करते हुए देखा। जेसिका ने साझा किया कि

व्यक्तिगत तौर पर हम सभी के पास ज्ञान, कौशल और नेटवर्क हैं लेकिन उसमें से कुछ निकालना काफी मुश्किल होता है या हमें ये पता नहीं होता है कि उस नेटवर्क के पीछे किसका नेटवर्क है, इसलिए उसने कुछ वर्कशॉप्स डिजाइन किया, जहां लोगों के बीच संपर्क का मौका दिया जाता है जिससे दोनों पक्षों को मौके मिलते हैं और इससे उनका निजी विकास भी होता है।

सैन फ्रांसिस्को, भारत और एम्सटर्डम के बीच आते-जाते और उद्यमिता की शुरुआत करने वाले विभिन्न लोगों से मिलने और उन्हें प्रशिक्षित करने के बाद जेसिका के पास कई रोचक कहानियां साझा करने के लिए होती हैं। हमने उनसे उद्यमियों खासकर अपनी मिट्टी के लोगों के साथ हुई बातचीत और उनके अनुभवों को जानने के लिए उनसे बात की।

भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में अलग क्या है?

मैं यहां करीब डेढ़ साल से इधर से उधर भाग रही हूं और मैं ये पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूं कि यहां मैं जो पुल यहां बना सकती हूं उसका यहां असर मेरे अपने देश से कहीं ज्यादा होगा। यहां के उद्यमी काफी अलग हैं, ये लोग खुद को काफी अपने आप में समेट कर रखते हैं, उनका दायरा बहुत छोटा होता है और वे अक्सर अपने दायरे, स्कूल, कॉलेज और परिवार से इतर नहीं जाते हैं। अगर आप वैश्विक जाना चाहते हैं तो आपको इन दायरों से निकलना होगा और आपको अपने सुविधाजनक जगहों से निकल कर वहां जाना होगा जहां असल में जादू होता है। मैं इस प्रक्रिया को अपनाती। और जब मैं इसकी तुलना अपने बैंगलोर के सत्र से एम्सटर्डम के सत्र से करती हूं, तो यहां मुझे कई बार वाकई में उद्यमियों पर काफी जोर लगाना पड़ता था। ऐसा इसलिए नहीं कि यहां के लोगों में क्षमता नहीं है, बल्कि इसलिए कि इन्हें जोर लगाने की जरूरत होती है तभी ये खुलते हैं।

गायब घटक क्या है?

हर किसी की अपनी एक कंफर्ट जोन होती है। एक उद्यमी के तौर पर आपको भद्देपन की उत्तेजना, अनिश्चितता और असुरक्षा महसूस करने जैसी स्थिति से गुजरना पड़ता है, जो कि बेहद ही महत्वपूर्ण है। अगर आप असुरक्षित हैं और आप पहला कदम उठाते हैं तो आप दूसरों को भी ऐसा ही करने के लिए आमंत्रित करते हैं और इस तरह आप एक सुरक्षित जगह या लोगों को ये कहने के लिए स्वर्ग बनाते हैं कि – मैं फंस गया हूं या मुझे मदद की जरूरत है। एक उद्यमी की कामयाबी के लिए उसका खुला होना जरूरी है। मैं चाहती हूं कि लोग खुले और असुरक्षित हों, हम सब को एक ऐसा उद्यमी नहीं होना है जो दुनिया पर राज करता है! विफलता की परिभाषा को दोबारा से लिखें और दूसरे इसके बारे में क्या सोचते हैं, उसे ही मानें। एक उद्यमी के तौर पर मैं बस एक ही विफलता जानती हूं और वो है हार मानना या आगे नहीं बढ़ना। लोगों की सलाह को लागू करना आगे कदम बढ़ाना है। मैं इन्हें अपने जीवन में शामिल कर आंतरिक रूप से पहले से ज्यादा मजबूत बन गई।

महिला उद्यमी

मुझे नहीं पता कि महिलाओं को उद्यमिता की ओर प्रोत्साहित करना असामनता के लक्षण के खिलाफ जंग है या नहीं; हमें शायद इस असमान दुनिया के पीछे की असल वजह का पता लगाना चाहिए। ये अच्छा लगता है जब हम किसी के लिए प्रेरणा बन सकते हैं और महिलाओं को सशक्त करने में मददगार हो सकते हैं। हालांकि, मैं तो उन्हें ऐसे उपकरण या टूल्स मुहैया कराती जो उनके लिए दूसरी किसी चीज से ज्यादा फायदेमंद होते। मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकती हूं कि मैं अक्सर पुरुषों के उपदेश, स्टार्टअप्स और उद्यमिता पर तकनीकी के राज की बास से निराश हो जाती थी। अक्सर ये खाड़ी इलाके के सुपर-फिट पुरुष होते हैं जो अपनी कामयाबी की कहानियां ज्यादतर पुरुषों की भीड़ के सामने सुनाते रहते हैं। उनके सफर के बारे में क्या? कई बार मन में आने वाली असुरक्षा की भावना का क्या? वे अपनी नाकामी के अनुभवों को भी अक्सर खूब बढ़ा-चढ़ाकर साझा करते हैं और इसे लघु कथा के तौर पर पेश करते हैं न कि इसे एक चोट खाई हुई कहानी के तौर पर। क्या उनका सफर इसी तरह सीधी है? और क्या हम सभी को प्रौद्योगिकी में सैन फ्रांसिस्को में काम करने का मौका मिल जाता है?

इसमें क्या लगेगा ?

ध्यान से देखें और हमेशा उत्सुकता बनाए रखें। दुनिया को एक बच्चे की नजहों से देखें, सलाह मांगें और अपने आत्मसम्मान को रास्ते में आने से रोकें। पूरे ध्यान से सलाह को एकीकृत करने में चयनात्मक रहें, अपने अंतर्ज्ञान का इस्तेमाल सलाह या प्रतिक्रिया के चयन करने में लगाएं। अपनी धारणाओं को जांचें और फिर उसका पालन करें। नए लोगों से मिलें। ऐसे माहौल में काम करें जहां आपको आराम महसूस हो। अपनी मान्यताओं और बर्ताव पर ज्यादा नियंत्रण रखने के लिए अपनी क्षमता के मुताबिक काम करें। ये आपको एक अच्छा इंसान बनाता है और आपके माहौल पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। एक आखिर बात, विमान को उड़ाते वक्त इसे बनाने का लुत्फ उठाएं! ये सब कुछ सफर के बारे में है, इसकी मंजिल अस्तित्व में नहीं भी हो सकती है या फिर वो बेहद ही उबाऊ है!

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