हैंगओवर उतारने का राम बाण है ‘Anti-Dizz’

फिलहाल मुंबई में मिलती है ‘Anti-Dizz’

2011 में शुरू की कंपनी

प्राकृतिक पेय पदार्थ है ‘Anti-Dizz’

‘Anti-Dizz’ पाउच और बोतल में उपलब्ध

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पार्टी करना किसे अच्छा नहीं लगता, लेकिन असली दिक्कत आती है पार्टी के अगले दिन। जब बहुत से लोगों को इसका खुमार रहता है। अलग-अलग लोगों में खुमारी के अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं लेकिन सबका परिणाम एक ही होता है कि पूरा दिन परेशानी में गुजरता है। हालांकि इस खुमारी से निपटने के लिए सबसे अच्छा तरीका ये है कि शराब का सेवन ही ना किया जाये। अगर शराब का सेवन करना भी पड़े तो उचित मात्रा करें। इसके अलावा शराब की खुमारी को उतारने के कई घरेलू उपाय भी होते हैं लेकिन किसी से ये बात साबित नहीं होती कि वो सौ प्रतिशत कारगर है।।

दो जैव प्रौद्योगिकी स्नातक ध्रुव त्रिवेदी और वंदना पिल्लई ने इस खुमारी से निजाज पाने का हल निकाल लिया है और उसका नाम रखा है Anti-Dizz। ये शराब में मिलने वाले टॉक्सिन पर काम करता है और खुमारी के लक्षण को कम करता है। ये एक प्राकृतिक पेय पदार्थ है और इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है। फिलहाल ये मुंबई में पाउच और बोतलों में उपलब्ध है। खुमारी का प्रभाव किस पर कितना होता है ये लिंग, आयु, आनुवंशिकी और शराब की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। Anti-Dizz से हर किसी को फायदा होता है भले ही शराब का किसी ने कितना भी सेवन कर लिया हो।

ध्रुव और वंदना ने मुंबई के डॉक्टर डी वाई पाटिल विश्वविद्यालय से स्नातक किया और साल 2011 में Reinvent Life Sciences की शुरूआत की। Anti-Dizz इसी का एक उत्पाद है। जबकि तीन उत्पादों पर अनुसंधान और विकास का काम हो रहा है। धुव्र गुजरात के एक छोटे से गांव में पैदा हुए और भरूच में रहकर उन्होने अपनी पढ़ाई पूरी की लेकिन जब जैव प्रौद्योगिकी में इंजीनियरिंग करने के लिए तो इससे पहले उन्होने कई चीजों का पता लगाया और बहुत कुछ सीखा। वो ये जानकार आश्चर्य में पड़ गए कि मौकों की कमी और जानकारी के अभाव में छोटे शहर, बडे शहरों से पिछड़ रहे हैं। कॉलेज के दिनों में ही उन्होने उद्यमी बनने का फैसला ले लिया था। ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होने दव कंपनी में कुछ समय के लिये काम किया ताकि वो जान सकें कि ये काम किस तरह होता है। जब उन्होने खुद का उद्यम शुरू करने का फैसला लिया तो परिवार वाले उनके इस फैसले से खुश नहीं थे और उन्होने अनिच्छा होते हुए भी धुव्र का समर्थन किया।

ध्रुव को Anti-Dizz का ख्याल तब आया जब एक बार वो ऐसी स्थिति में पहुंच गए। एक रात पार्टी करने के बाद वो अगले दिन 12 बजे दोपहर में उठे तो सिरदर्द के अलावा चक्कर आ रहे थे और मतली करने का मन कर रहा था। उस दिन वो बुरी तरह शराब की खुमारी में थे। ऐसा ही हाल उनके दोस्त का भी था। जिसके बाद वो ये जानने को उत्सुक हो गए कि उनको किन कारण से खुमारी आई और इससे बचने के क्या कोई उपाय है। इसके लिए उन्होने कॉलेज की लैब में रिसर्च का काम शुरू कर दिया और काफी अनुसंधान और विकास से जुड़े कामों को पूरा करने के बाद उनका ये विचार एक उत्पाद के रूप में विकसित हो गया।

ध्रुव का मानना है कि खुमारी को दूर करने के लिए इस तरह के उत्पाद का बाजार काफी बड़ा है। उनके मुताबिक हर साल शराब का इस्तेमाल 30 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। जिस तरह शराब का सेवन बढ़ रहा है उसी अनुपात में लोगों में खुमारी भी बढ़ रही है। रिसर्च बताती है कि खुमारी के कारण इंसान को डिप्रेशन हो सकता है इसके साथ साथ उसको कई तरह की चिंताए और दूसरी चीजें घेर लेती हैं। ध्रुव का दावा है कि खुमारी से हर साल 300 बिलियन की उत्पादकता का नुकसान हो रहा है।

फिलहाल Anti-Dizz मुंबई के 87 आउटलेट में उपलब्ध है। ध्रुव के मुताबिक शराब बेचने वाले दुकानदारों इस उत्पाद के बारे में समझाना बड़ा मुश्किल काम है। क्योंकि उनको पर्याप्त जानकारी नहीं होती। लेकिन दवा की दुकानों और पबों से उनको अच्छी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। ध्रुव का कहना है कि अब तक उनका इस क्षेत्र में किसी के साथ कोई मुकाबला नहीं है और जहां तक दूसरे देशों में ऐसे उत्पाद की बात तो Anti-Dizz उनसे कहीं ज्यादा बेहतर है। अब उनकी योजना बेंगलौर और दिल्ली में भी अपने उत्पाद बेचने की है। इसके लिए वो पब, बार, होटल, दवा की दुकानों और शराब की दुकानों की मदद लेना चाहते हैं। साथ ही ई-कामर्स के जरिये भी वो लोगों तक अपनी पहुंच बनाना चाहते हैं।

ध्रुव के मुताबिक उन्होने इस काम को 24 साल की उम्र में शुरू कर दिया था ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी दिक्कत थी लोगों का भरोसा जीतने की। उनका कहना है कि वो कोई बड़े संस्थान से नहीं आए थे और ना ही उनके पास एमबीए या कोई दूसरी बड़ी डिग्री थी। साथ ही साथ उनके पास फॉर्मा या स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र का कोई अनुभव भी नहीं था लेकिन उन्होने धैर्य, दृढ़ता और लगातार कुछ करने का अपना दृष्टिकोण नहीं छोड़ा। ध्रुव का मानना है कि इंसान समय और वक्त के साथ काफी कुछ सीख जाता है। फिलहाल उनकी टीम में 7 लोग हैं और ये अपने काम में विस्तार लाने के लिए निवेश की संभावनाएं टटोल रहे हैं।

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