आदिवासी अधिकारों के लिए लड़ने वाली सोनी सोरी को मिला इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड

आयरलैंड के एक अधिकार संगठन 'फ्रंट लाइन डिफेंडर्स' ने सोनी सोरी के संघर्ष और आदिवासियों के हक के लिए लड़ते देख उन्हें प्रतिष्ठित ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड देने का फैसला किया...

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छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के संघर्ष के लिए अपनी जान को भी जोखिम में डाल देने वाली सोनी सोरी पर 2016 में तेजाब से हमला कर दिया गया था। कुछ दिनों के लिए उन्हें अस्पताल में रहना पड़ा, लेकिन यह उनके हौसले को कम नहीं कर पाया। उस घटना के दो साल बाद उन्हें दुनिया का प्रतिष्ठित ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड मिलने की घोषणा की गई है।

सोनी सोरी
सोनी सोरी
मध्य भारत का नक्सल प्रभावित इलाका छत्तीसगढ़ में सोनी सोरी आदिवासी अधिकारों के लिए काम करती हैं। सोनी सोरी सामाजिक अधिकार की लड़ाई लड़ने से पहले स्कूल में पढ़ाया करती थीं। 

छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के संघर्ष के लिए अपनी जान को भी जोखिम में डाल देने वाली सोनी सोरी पर 2016 में तेजाब से हमला कर दिया गया था। कुछ दिनों के लिए उन्हें अस्पताल में रहना पड़ा, लेकिन यह उनके हौसले को कम नहीं कर पाया। उस घटना के दो साल बाद उन्हें दुनिया का प्रतिष्ठित ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड मिलने की घोषणा की गई है। आयरलैंड के एक अधिकार संगठन 'फ्रंट लाइन डिफेंडर्स' ने सोनी सोरी के संघर्ष और आदिवासियों के हक के लिए लड़ते देखते हुए उन्हें यह अवॉर्ड देने का फैसला किया।

डबलिन में अवॉर्ड की घोषणा की गई। एक आधिकारिक बयान में फ्रंट लाइन डिफेंडर्स के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर एंड्रयू एंडरसन ने कहा, 'हम दुनिया के सबसे खतरनाक इलाकों में अपनी जान की परवाह न करते हुए शांति और न्याय की अवाज उठाने वालों को सम्मानित कर रहे हैं।' मानवाधिकार के क्षेत्र में यह अवॉर्ड काफी प्रतिष्ठित माना जाता है और दुनियाभर के चुनिंदा लोगों को ही यह अवॉर्ड मिलता है। सन 2005 से ‘फ्रंट लाइन डिफेंडर्स अवार्ड फॉर ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स ऐट रिस्क’ पुरस्कार हर साल उन मानवाधिकार रक्षकों को दिया जाता रहा है, जिन्होंने खुद को जोखिम में डाल कर भी अपने समुदाय के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा और बढ़ावा देने में अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए योगदान दिया है।

मध्य भारत का नक्सल प्रभावित इलाका छत्तीसगढ़ भी खतरनाक इलाकों में से एक माना जाता है, जहां सोनी सोरी आदिवासी अधिकारों के लिए काम करती हैं। सोनी सोरी सामाजिक अधिकार की लड़ाई लड़ने से पहले स्कूल में पढ़ाया करती थीं। उन्हें नक्सलियों के साथ जुड़ाव के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्हें जेल में रखा गया। सोनी ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें काफी कड़ी यातनाएं दी गईं और इतना ही नहीं पुलिसकर्मियों द्वारा उनका रेप भी किया गया। इस हादसे के बाद उन्होंने जेल में बंद लोगों के अधिकार की आवाज उठाई। उनके विरोध प्रदर्शन को पूरे देश में आवाज मिली और लोगों के दबाव में उन्हें रिहा किया गया। सोनी ने आम आदमी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर 2014 में लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वह हार गईं। हालांकि उनका आदिवासियों के लिए चलने वाला संघर्ष जारी रहा।

सोनी ने नक्सलवादियों से भी लोहा लिया। जब नक्सली उनके इलाकों के शिक्षण संस्थानों को ध्वस्त कर रहे थे तो सोनी ने उनका विरोध किया। जेल में रहने के दौरान सोनी पर बेइंतेहा जुल्म किए गए। उनके साथ अमानवीयता की सारी हदें पार की गईं। लेकिन फिर भी वह अपने पथ से डिगी नहीं। उनकी बहादुरी का सबूत ये प्रतिष्ठित अवॉर्ड है जो उन्हें दिया जा रहा है। सोनी सोरी के अलावा इस बार यह अवॉर्ड नुर्केंन बेसल (टर्की), लूचा आन्दोलन (कोंगो का लोकत‌ंत्रात्मक गणराज्य), ला रेसिस्तेंचिया पसिफिचा दे ला मिक्रोरेगिओं दे इक्ष्क़ुइसिस (ग्वाटेमाला), और हस्सन बौरास (अल्जीरिया) शामिल को दिया गया।

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