चीनी वैज्ञानिकों ने खोजा ‘खास’ चावल, भरेगा 20 करोड़ लोगों का पेट

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चीन के वैज्ञानिकों ने समुद्री इलाकों की विपरीत परिस्थितियों का उपाय ढूंढ लिया है और वह ऐसी जमीन पर भी चावल की पर्याप्त पैदावार करने में सफल हुए हैं। चीनी वैज्ञानिकों की इस सफलता को कृषि उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी और अहम सफलता माना जा रहा है।

साभार: इंडिया टाइम्स
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चावल का उत्पादन क्विंगदाओ के यलो सी कोस्ट पर हुआ। यह चावल कैल्शियम और अन्य मिनरल्स से संपन्न माना जा रहा है, क्योंकि इसे समुद्री पानी की मदद से उगाया गया है।

युआन लॉन्गपिंग नाम के कृषि वैज्ञानिक, जिन्हें ‘चाइनाज फादर ऑफ हाइब्रिड राइस’ (चीन में हाइब्रिड चावल का जनक), भी कहा जाता है, का मानना है कि इस तरह की समुद्र तट की जमीन के अगर 10वें भाग पर इस खास तरह के चावल को उगाया जाए, तो चीन के चावल उत्पादन में 20 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है।

चीन के वैज्ञानिकों ने समुद्री इलाकों की विपरीत परिस्थितियों का उपाय ढूंढ लिया है और वह ऐसी जमीन पर भी चावल की पर्याप्त पैदावार करने में सफल हुए हैं। चीनी वैज्ञानिकों की इस सफलता को कृषि उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी और अहम सफलता माना जा रहा है। चावल का उत्पादन क्विंगदाओ के यलो सी कोस्ट पर हुआ। यह चावल कैल्शियम और अन्य मिनरल्स से संपन्न माना जा रहा है, क्योंकि इसे समुद्री पानी की मदद से उगाया गया है।

युआन लॉन्गपिंग नाम के कृषि वैज्ञानिक, जिन्हें ‘चाइनाज फादर ऑफ हाइब्रिड राइस’ (चीन में हाइब्रिड चावल का जनक), भी कहा जाता है, का मानना है कि इस तरह की समुद्र तट की जमीन के अगर 10वें भाग पर इस खास तरह के चावल को उगाया जाए, तो चीन के चावल उत्पादन में 20 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है। युआन के नेतृत्व वाली शोध टीम ने ही इस ऐतिहासिक सफलता को अंजाम दिया है।बायोलॉजिकल टेक्नॉलजी नाम की फर्म ने युआन के साथ मिलकर इस नए तरह के उत्पादन को जन्म दिया है और इसका नाम ‘युआन मी’ रखा है। इस चावल को चीन के सैलाइन-अल्कली टॉलरेन्ट राइस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट सेंटर पर विकसित किया गया।

युआन के नेतृत्व में शोध टीम ने चार अलग-अलग तरह की चावल की फसलों पर प्रयोग किया और 9.3 टन/हेक्टेयर तक उत्पादन करने में सफलता प्राप्त की। जबकि, इस तरह की जमीन पर समुद्री पानी के साथ, उत्पादन की अपेक्षा सिर्फ 4.5 टन तक की जाती है। इसका मतलब वैज्ञानिक लगभग दो गुना उत्पादन करने में सफल हुए। समुद्री पानी की क्षारीयता को कम किया गया और फिर तट पर लगी धान की फसल को सींचा गया। दशकों से शोधकर्ता खारे पानी में चावल की ऐसी फसल पैदा करने के दिशा में काम कर रहे थे, जो बाजार के अनुकूल हो। मुख्य शोधकर्ता युआन, 1970 के दशक से इस दिशा में काम कर रहे हैं।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर

चीनी अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के पास 1 मिलिनय स्कवेयर किमी. की जमीन, समुद्री इलाके में होने की वजह से बंजर पड़ी हुई है। यह क्षेत्रफल, इथियोपिया देश के बराबर है। इस जमीन के क्षारीय और खारे पाने से प्रभावित होने की वजह से, यह जमीन किसी पौधे के विकास के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं मानी जाती। इस शोधपरक सफलता के बाद चीन अपनी बंजर समुद्री इलाके के जमीन का उपयुक्त इस्तेमाल करने में सक्षम होगा। इस जमीन के इस्तेमाल से 50 मिलियन टन तक चावल का उत्पादन हो सकेगा और यह 200 मिलियन आबादी का भरण-पोषण कर सकता है।

चावल, चीनी खाने का मुख्य हिस्सा है। इसको ध्यान में रखते हुए चावल का अधिक उत्पादन, बढ़ती जनसंख्या के कारक के भी अनुकूल माना जा रहा है। कुछ और किस्म के चावल भी हैं, जिनका उत्पादन खारे पानी में हो सकता है। हालांकि, उनका उत्पादन महज 1.125 से 2.25 टन/हेक्टेयर तक ही सीमित होता है। जबकि इस खास किस्म के चावल की उत्पादन क्षमता 6.5-9.3 टन/हेक्टेयर तक है।

नमक बनने की प्रक्रिया में रोगजनक जीवाणुओं का पता लगाया जा सकता है और ऐसे में समुद्री पानी की मदद से पैदा होने वाले चावल में कीटाणु लगने की आशंका भी कम होगी और किसानों को कीटनाशकों के उपयोग से राहत मिल सकेगी। युआन मी ने इस खास चावल के दाम आम चावलों से 8 गुना तक अधिक निर्धारित किए हैं। इसके बावजूद चावल में चीन की आबादी खासी रुचि दिखा रही है। पिछले महीने ही करीब 1000 लोगों ने इस चावल की मांग की है। अगस्त महीने में चावल की इस खास फसल का 6 टन माल बिका। इस चावल को 1 किलो, 2 किलो, 5 किलो और 10 किलो की पैकिंग्स में बेचा जा रहा है।

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