40 दिन में 48000 किलोमीटर गाड़ी चलाने का चैलेंज लेकर कर रहे हैं शहीद सैनिकों के परिवारों की मदद 

जिद अगर किसी सामाजिक मकसद से की जाने को लेकर हो तो उसे पूरा करने का जूनून भी दुगुना हो जाता है और बड़े लक्ष्य हासिल करना भी एक खेल जैसा लगता है।

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गुजरात के सूरत के रहने वाले सागर ठक्कर की जिद भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने सिर्फ 40 दिनों में 48 हज़ार किलोमीटर कार चलाने का चैलेंज लिया है। यह चैलेंज यूं तो गिनीज़ बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड्स में शामिल होने का है, लेकिन मकसद शहीद होने वाले भारतीय फौजियों के परिवारों की आर्थिक मदद करने के लिए फंड जुटाना है।

हिमाचल प्रदेश के मनाली के रास्ते में जिला मंडी में मुलाकात के दौरान सागर ने बताया कि कुछ साल पहले उन्होंने एक शहीद सैनिक के परिवार के बारे में पढ़ा और जाना कि वह परिवार किस तरह आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा था। उस रिपोर्ट को पढऩे के बाद उन्होंने शहीद सैनिकों के परिवारों की आर्थिक मदद के लिए फंड जुटाने का अभियान शुरु करने का फैसला किया. उन्होंने एक एनजीओ-गैर सरकारी सेवा संस्था शुरु की। सागर का दावा है कि पिछले कुछ साल के दौरान उनकी संस्था शहीद सैनिकों के परिवारों की मदद के लिए एक करोड़ छियालीस लाख रुपए वितरित कर चुके हैं।

पेशे से एक इवेंट कम्पनी चलाने वाले सागर ठक्कर पर्यावरण और वन्य प्राणी संरक्षण के लिए भी काम कर चुके हैं। वे फ्रेंड्स क्लब के नाम से इस दिशा में काम करते रहे हैं।

मात्र 40 दिन में 48 हजार किलोमीटर कार चलाकर गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में शामिल होने का चैलेंज लेने से पहले भी वे ऐसे ही साहसिक कार्य कर चुके हैं। इससे पहले वे मात्र चार दिन और 22 घंटे में गुजरात के कच्छ से पश्चिमी बंगाल के कोलकाता तक की 7600 किलोमीटर की यात्रा मोटरसाइकिल पर पूरी कर चुके हैं। इसके लिए उनका नाम लिमका बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज हो चुका है।

इस अभियान के बारे में उन्होंने बताया कि इससे पहले गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में 37 दिनों में 36000 किलोमीटर गाड़ी चलाने का रिकार्ड दर्ज है। वे उस रिकार्ड को तोडक़र नया रिकार्ड बनाना चाहते हैं।

उन्होंने यह अभियान सूरत से शुरु किया है और इसके पहले चरण में हिमाचल प्रदेश के मनाली पहुंचे। इसके बाद वे उत्तराखंड से उत्तरप्रदेश के रास्ते बिहार में दाखिल होंगे। वहां से उत्तर-पूर्वी सातों राज्यों मनीपुर, मेघालय, असम, त्रिपुरा, नागालैंड और अरूणाचल प्रदेश होते हुए पश्चिमी बंगाल, झारखंड और मध्यप्रदेश होते हुए फिर से गुजरात में दाखिल होंगे जहां यह यात्रा खत्म होगी।

इस यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाली कार में कुछ खास तरह के बदलाव किये गए हैं। इसमें तीन कैमरे लगाए गए हैं। इसे जीपीएस सिस्टम से जोड़ा गया है जिसका कंट्रोल रूम लंदन में है। इसकी मदद से कार और ड्राइवर दोनों की ही सारी गतिविधियों पर नज़र रखी जाती है। यात्रा के दौरान कार के इंजिन को बंद नहीं किया जाता ताकि कार की माइलेज और अन्य सूचनाएं लगातार लंदन भेजी जाती रहें।

यात्रा में सागर के साथ उनके दोस्त और इवेंट मैनेजमेंट कम्पनी में सहयोगी कनक बलसादिया भी हैं। लेकिन वे सिर्फ उन्हें बोर होने से बचाने के लिए बातें करने के अलावा अन्य कोई मदद नहीं कर सकते क्योंकि शर्त के मुताबिक 40 दिन में 48000 किलोमीटर की यात्रा के दौरान एक ही व्यक्ति गाड़ी चलाएगा।

सागर के मुताबि• वे इस चैलेंज को हर हाल में पूरा करेंगे ताकि इसके जरिए वे फंड इक्कठा करके शहीद सैनिकों के परिवारों की मदद कर सकें।

लेखक: रवि शर्मा

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