खूब मोलभाव करें और 'Grabon' से ढेर सारे कूपन लें

भारतीय उपभोक्ताओं को खरीददारी में बचत के लिये आॅनलाइन कूपनों और सौदों से करवाते हैं रूबरूफिलहाल 20 हजार से भी अधिक उपयोगकर्ता इनके साथ जुड़े हुए हैं अैर लगभग सभी बड़ी आॅनलाइन कंपनियों के साथ कर रहे हैं कामबीते वर्ष ग्रैबआॅन ने प्राप्त किया लैंडमार्क आईटी साॅल्यूशंस 250,000 अमरीकी डाॅलर का निवेश हाल ही में एक मोबाइल और डेस्कटाॅप नोटिफिकेशन प्रणाली Buzz Me को लाये हैं सामने

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उपभोक्ताओं को आॅनलाइन कूपन और सौदों को उपलब्ध करवाने वाला उद्यम Grabon (ग्रैबआॅन) फिलहाल नवीनीकरण और तकनीकी कायापलट के दौर से गुजर रहा है और इसने हाल ही में Buzz Me (बज्ज़ मी) नामक एक मोबाइल और डेस्कटाॅप नोटिफिकेशन प्रणाली की भी शुरुआत की है। इनकी यह नई नोटिफिकेशन उपयोगकर्ता के डेस्कटाॅप पर स्वयं ही खुल जाती है और उन्हें नवीनतम सौदों और कूपनों के बारे में जानकारी प्रदान करती है।

ग्रैबआॅन के संस्थापक और सीईओ अशोक रेड्डी कहते हैं, ‘‘एक महीने से भी कम के अंतराल में एक लाख से भी अधिक उपयोगकर्ता इस मंच के माध्यम से अपने कार्यस्थलों और मोबइल फोन के माध्यम से सबसे विशेष कूपनों को पाने में सफल हो चुके हैं। वास्तविक रियल-टाइम कूपन और तकनीकी नवाचार ये वे दो नए मंच हैं जिन्हें ग्रैबआॅन ने अपने इस अनुभाग में सम्मिलित किया है।’’

ग्रैबआॅन का दावा है कि यह पहला ऐसा मंच है जिसने इस अनुभाग में पहल करते हुए अंतिम छोर पर खड़े उपभोक्ता को तकनीक के आसान और सबसे तेज साधनों के माध्यम से बाजार में सबसे कम संभव कीमत उपलब्ध करवाता है। यह मंच काॅस्ट-पर-सेल के माॅडल पर काम करता है और अंत बिक्री के आधार पर पैसा कमाता है।

अशोक आगे कहते हैं कि ग्रैबआॅन बाजार में सबसे बेहतरीन माने जाने वाले साधनों के माध्यम से अपने उपभोक्ताओं को सौदे करवाने में ध्यान केंद्रित करते हैं। इसके अलावा वे यह भर सुनिश्चित करते हैं कि उनके व्यापारिक साझेदार भी समय-समय पर सौदों में परिवर्तन करते रहे ताकि उपभोक्ता को रोजाना एक जैसे सौदों से रूबरू न होना पड़े।

ग्रैबआॅन देश की लगभग सभी बड़ी आॅनलाइन कंपनियों के साथ एक सामरिक व्यापार माॅडल पर काम करता है। इनका दावा है कि इनके 20 हजार से भी अधिक उपभोक्ता हैं और ये बाजार की सभी बड़ी कंपनियों के साथ कारोबार कर रहे हैं। उबर, पेटीएम, फ्रीचार्ज, स्नैपडील, फ्लिपकार्ट, जबोंग, स्विगी और मोबीक्विक उनमें से कुछ जानेमाने नाम हैं।

विकास का आंकड़ा

लैंडमार्क आईटी साॅल्यूशंस के समर्थन से संचालित ग्रैबआॅन ने बीते वर्ष 250,000 अमरीकी डाॅलर का निवेश प्राप्त किया और इस राशि का उपयोग टीम को तैयार करने, बुनियादी सुविधाओं को जुटाने के अलावा प्रौद्योगिकी के विस्तार और उपभोक्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिये विज्ञापनों इत्यादि में खर्च करने में किया गया। कंपनी का दावा है कि बीते 18 महीनों में संख्या, विजिटर्स और राजस्व के मामलों में इन्होंने आशातीत वृद्धि हासिल की है।

अशोक कहते हैं, ‘‘हमारे मंच पर प्रतिमाह 4 मिलियन से अधिक के करीब विशिष्ट विजिटर्स आते हैं। प्रतिमाह करीब 5.5 मिलियन कूपनों का प्रयोग किया जाता है और इसके अलावा प्रतिमाह करीब 1.4 करोड़ पेज व्यू किये जाते हैं। हम जून 2016 तक करीब 12 करोड़ रुपये के आंकड़े को प्राप्त करने की उम्मीद कर रहे हैं और दिसंबर 2015 से हम प्रतिमाह 1.5 करोड़ रुपये कमाना शुरू कर देंगे।’’

इसके अलावा अशोक बताते हैं कि आॅफलाइन विस्तार और तकनीकी रोडमैप के लिये धन जुटाने की प्रक्रिया में वे करीब 15 मिलियन अमरीकी डाॅलर की सीरीज-ए फंडिंग की प्रक्रिया के अंतिम दौर में हैं और वे आने वाले कुछ महीनों में इस धन को पाने की उम्मीद लगाये हुए हैं।

प्रतिस्पर्धा का परिदृश्य

गूगल और फोरेस्टर रिसर्च द्वारा किये गए वार्षिक आॅनलाइन शाॅपिंग ग्रोथ ट्रेड्स रिपोर्ट के अनुसार भारत में कूपन का व्यवसाय ई-काॅमर्स की दुकानकारी का कुल 13.5 प्रतिशत है और यह प्रतिमाह 7.6 मिलियन विशेष उपयोगकर्ताओं की संख्या के साथ 62.9 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और इसपर आधारित बाजार का बहुत बड़ा और विस्तृत क्षेत्र है। कंपनियों के अलावा कई ऐसे फ्रीलंसर भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं जो तुरंत पैसा कमाने की चाहत में कूपन बेच रहे हैं।

हालांकि अगर संगठित क्षेत्र की बात करें तो Grabon, CouponDunia, 27coupons, CoupoNation, Pennyful और Cashkaro जैसे कुछ स्टार्टअप अन्यों के साथ इस बाजार पर छाने के लिये प्रतिस्पर्धा में हैं।

बीते वर्ष टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड द्वारा अधिग्रहित किया गया कूपनदुनिया इस सेंगमेंट में इनका सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी है क्योंकि अधिग्रहण के बाद से यह एक महत्वपूर्ण वृद्धि का साक्षी बना है। इसने अब ईंट और मोर्टार की खुदरा बिक्री के क्षेत्र में कदम रखा है। यह कंपनी प्रतिमाह अपने मोबाइल और वेब एप्लीकेशंस के माध्यम से 10 मिलियन के करीब सेशन कर रही है। फिलहाल इस मंच के साथ 2000 से भी अधिक आॅनलाइन स्टोर और 5000 रेस्टोरेंट सूचिबद्ध हैं।

राॅकेट इंटरनेट द्वारा समर्थित कूपन उपलब्ध करवाने वाली एक और वेबसाइट कूपोनेशन इस सेगमेंट में एक और बड़ी प्रतिस्पर्धी है। इसके अलावा कैशकरो भी अपने अनूठे और विशिष्ट सौदों और आॅफरों के माध्यम से प्रतियोगिता को और अधिक गलाकाट बना रही है।

इस सेगमेंट में दूसरों के द्वारा पेश किये जाने वाली प्रतिस्पर्धा को स्वीकार करते हुए अशोक कहते हैं, ‘‘हम प्रतियोगिता के परिदृश्य को बदलने के लिये लगातार कड़ी मेहनत कर रहे हैं। अभी हमें बाजार में उतरे हुए दो वर्ष से भी कम का समय हुआ है और हम इतने कम समय में प्रतिमाह एक करोड़ से भी अधिक विजिटर्स को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल हो रहे हैं। उचित प्रौद्योगिकी और निवेश के सहारे हम भारत में आॅनलाइन और आॅफलाइन दोनों ही तरीकों से सबसे बड़े बचत करवाने वाले मंच बन सकते हैं।


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Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

Stories by Nishant Goel