अरबपतियों में चैंपियन भारतीय मूल की जयश्री उल्लाल और नीरजा सेठी

भारतीय मूल की वो अरबपति महिलाएं जिनका कारोबार अमेरिका में फल-फूल रहा है...

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संपत्ति से हर किसी के गहरे सरोकार होते हैं। भारतीय अरबपतियों की नंबरिंग तो आए दिन मीडिया करता ही रहता है, 'फोर्ब्स' ने ताजा-ताजा दुनिया की दो ऐसी शीर्ष अरबपति महिलाओं के नाम का खुलासा किया है, जो हैं तो भारतीय मूल की, लेकिन उनका कारोबार अमेरिका में फूल-फल रहा है। उनके नाम हैं जयश्री उल्लाल और नीरजा सेठी।

नीरजा सेठी और जयश्री उल्लाल
नीरजा सेठी और जयश्री उल्लाल
अभी-अभी 'फोर्ब्स' पत्रिका ने दुनिया की अमीर महिलाओं की एक ताजा लिस्ट जारी की है, जिसमें अमेरिका की 60 धनाढ्य महिलाओं की सूची में भारतीय मूल की प्रौद्योगिकी कार्यकारी जयश्री उल्लाल और नीरजा सेठी भी नई ताकतवर महिलाओं में उभरी हैं।

इसी वर्ष मार्च में 'फोर्ब्स' मैग्जीन ने सबसे अमीर महिलाओं की एक लिस्ट जारी की थी, जिसमें 46 बिलियन डॉलर की कमाई वाली वॉलमार्ट की मालकिन एलिस वाल्टन नंबर वन घोषित हुई थीं। एलिस वॉलमार्ट फाउंडर सैम वाल्टन की बेटी हैं। दुनिया की जिन 256 अमीर महिलाओं की लिस्ट जारी हुई थी, उनमें विदेशी बिजनेस वुमेन के साथ आठ भारतीय महिलाएं भी शामिल थीं। भारतीय अमीर महिलाओं में जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड की चेयरपर्सन सावित्री जिंदल, बायोकॉन कंपनी की किरण मजूमदार-शॉ, गोदरेज की मालकिन स्मिता कृष्णा गोदरेज, डायबिटीज और कार्डियोवैस्कुलर की दवाइयां बनाने वाली कंपनी वीएसयू इंडिया की लीना तिवारी, हैवेल्स इंडिया की विनोद राय गुप्ता के अलावा शीला गौतम और मधु कपूर को धनाढ्य स्त्रियों में शुमार किया गया था।

यह भी गौरतलब है कि भारत में 29 करोड़ लोगों की आय 30 रुपए से कम है लेकिन अमेरिका और चीन के बाद हमारे देश में ही सबसे अधिक लोग अरबपति बन गए हैं। फोर्ब्स ने हाल ही में अरबपतियों की एक और लिस्ट जारी की है, जिसमें इस साल भारत के अरबपतियों की संख्या बढ़कर 119 हो गई है। इन 119 अरबतियों की संपत्ति 440 बिलियन डॉलर यानि 30 लाख करोड़ से ज्यादा है, जबकि 1990 में भारत में केवल दो अरबपति थे। सन् 1991 में भारत की अर्थव्यवस्था में अप्रत्याशित उछाल आया और 2016 आते-आते भारत में अरबपतियों की संख्या 84 हो गई। भारत में 29 करोड़ लोगों की आय आज भी 30 रुपए से कम है। वर्ष 2014 में प्रतिव्यक्ति आय 88,538 रुपये थी, जो अब 2018 में बढ़कर 1 लाख 12 हजार हो गई है। इसी साल भारत ने अर्थव्यवस्था के मामले में फ्रांस को पीछे छोड़ दिया। फ्रांस की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ने का जश्न मनाया जा रहा है जिसकी आबादी महज 616 करोड़ यानि राजस्थान की आबादी के बराबर है लेकिन भारत तो 135 करोड़ लोगों का है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के हालात के लिए एक और बात गौरतलब है कि विदेशों से धन प्राप्त करने के मामले में हमारा देश दुनिया में सबसे आगे है। देश के प्रवासी कामगारों ने पिछले साल 69 अरब अमेरिकी डॉलर विदेश से भारत भेजे थे। इसके तहत एशिया प्रशांत क्षेत्र में विदेश से 256 अरब डॉलर भेजे गए, जबकि चीन को 64 अरब डॉलर, फिलीपीन को 33 अरब डॉलर, पाकिस्तान को 20 अरब डॉलर और वियतनाम को 14 अरब डॉलर की विदेशी रकम मिली।

अभी-अभी 'फोर्ब्स' पत्रिका ने दुनिया की अमीर महिलाओं की एक ताजा लिस्ट जारी की है, जिसमें अमेरिका की 60 धनाढ्य महिलाओं की सूची में भारतीय मूल की प्रौद्योगिकी कार्यकारी जयश्री उल्लाल और नीरजा सेठी भी नई ताकतवर महिलाओं में उभरी हैं। सूची में पहले स्थान पर एबीसी सप्लाई कंपनी की डायने हेंडरिक्स हैं। विस्कोंसीन निवासी एवंअपने बलबूते पर पहचान बनाने वाली 60 महिलाओं की सूची में जयश्री 1.3 अरब डॉलर के साथ 18वें स्थान पर और नीरजा एक अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ 21वें पायदान पर रही हैं।

फोर्ब्स ने काइली का नाम सबसे कम उम्र की अमेरिकी अमीर महिला के तौर प्रदर्शित किया है। जेनर ने मैगजीन को धन्यवाद कहते हुए ट्विटर पर लिखा है कि मैं खुशकिस्मत हूं। उस काम को रोजाना करती हूं जिससे मुझे प्यार है। ट्विटर पर उन्हें 2.56 करोड़ लोग और इंस्टाग्राम पर 1.64 करोड़ लोग फॉलो करते हैं। किम कर्दाशियां की सौतेली बहन काइली जेनर से पहले सबसे कम उम्र के अरबपति का खिताब फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के नाम रहा है। काइली ने तीन साल पहले अपनी कंपनी काइली कॉस्मेटिक्स की शुरुआत की थी। मार्क जुकरबर्ग ने फेसबकु के जरिए 23 साल की उम्र में ही ये खिताब अपने नाम कर लिया था।

बताया जा रहा है कि काइली जेनर जल्द ही सबसे कम उम्र की बिलियनर बन सकती है। काइली इस साल की शुरुआत में ही मां बनी हैं। तीन साल पहले काइली ने एक कॉस्मेटिक कंपनी की स्थापना की थी, जो महिलाओं के मेकअप का सामान बेचती है। उन्होंने इस कंपनी की शुरुआत 29 डॉलर के लिप किट से की थी। काइली की कंपनी 63 करोड़ डॉलर का मेकअप का सामान बेच चुकी है। फोर्ब्स ने काइली कॉस्मेटिक की एस्टिमेटेड वैल्यू 80 करोड़ डॉलर की बताई है। साथ ही उनकी नेटवर्थ 90 करोड़ डॉलर है। उनकी नेटवर्थ में ये बढ़ोतरी उनके टीवी स्टिंट्स और एंडोर्समेंट के कारण हुई है। काइली अपनी कंपनी की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी अपने पास रखती हैं।

एक कामयाब देश के पीछे महिलाओं का भी उतना ही हाथ होता है जितना पुरुषों का। इस समय हमारे देश की सबसे अमीर महिला सावित्री जिंदल स्टील किंग ओपी जिंदल की वाइफ और पूर्व सांसद नवीन जिंदल की मां हैं। वह कुल 350 करोड़ डॉलर की संपत्ति की मालकिन हैं। उनका जन्म 20 मार्च, 1950 को हरियाणा के तिनसुकिया हिसार में हुआ था। जिंदल ग्रुप की नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन सावित्री 2005 में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में पति की मौत के बाद से ग्रुप प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। ओपी जिंदल हिसार से विधायक भी रहे। जिंदल ग्रुप की नींव ओपी जिंदल ने ही रखी थी। सावित्री जिंदल के चार बेटों - पृथ्वीराज जिंदल, सज्जन, रतन और नवीन ने उनके बिजनेस को आगे बढ़ाया।

पृथ्वीराज, जिंदल सॉ कंपनी के चेयरमैन, सज्जन जिंदल जेडब्लूएस कंपनी के और सबसे छोटे नवीन जिंदल 'जिंदल स्टील' के चेयरमैन हैं। उनके बड़े भाई रतन इस कंपनी में डायरेक्टर हैं। सावित्री जिंदल की बहू शालू कुचिपुड़ी डांसर भी हैं। वह कई नेशनल अवॉर्ड भी जीत चुकी हैं, और एक सोशल वर्कर के रूप में भी काम करती हैं। अमीरों की अमीरी और ग़रीबों की ग़रीबी के बीच फ़र्क के सही आंकड़े क्या हैं, कई बार ये पिछली पीढ़ियों की मेहनत और कमाई के ज़रिए भी हमें हासिल होती है। अमीर-ग़रीब के बीच फ़र्क़ का पता लगाने वाले ज़्यादातर रिसर्च अपने शोध कार्य में आमदनी को पैमाना बनाते हैं।

इसकी एक खास वजह है, आमदनी से जुड़े आंकड़े आसानी से मिल जाते हैं लेकिन ये भी गौरतलब है कि कोई एक साल की आमदनी से अमीर नहीं बन जाता है। इसके लिए सालोसाल संपत्ति जोड़नी पड़ती है। अमीर लोग चाहते हैं कि उनकी संपत्ति और आमदनी को लेकर भले दुनिया अटकलें लगाती रहे, उसका कभी भी हक़ीक़त से पाला न पड़े। किसी के पास कितनी संपत्ति है, इससे उसके रहन-सहन और ज़िंदगी में तरक़्क़ी के मिलने वाले मौक़ों के बारे में भी जानकारियां मिलती हैं। संपत्ति से ही तय होता है कि बच्चों की शिक्षा पर कितने पैसे ख़र्च होते हैं और संपत्तियां ख़रीदने में कितना पैसा लगाया जाता है। अमीर कितनी रक़म अपने ऐशो-आराम पर ख़र्च करते हैं और रिटायरमेंट के प्लान में वे कितना निवेश करते हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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