सुगंधित फसलों से महक रहे खेत, मसालों और उद्यानिकी फसलों के रकबों में भी हुई बढ़ोतरी

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यह लेख छत्तीसगढ़ स्टोरी सीरीज़ का हिस्सा है...

राज्य के किसान 12 हजार 169 हेक्टेयर में फूलों की फसल ले रहे हैं और उत्पादन 2397 प्रतिशत बढ़ गया है। इसी तरह फलों के रकबे में 580 प्रतिशत वृद्धि रिकार्ड की गई है। सब्जी, औषधि और मसाले का रकबा भी कई गुना बढ़ चुका है। ऐसे किसान आर्थिक रूप से सुदृढ़ हुए हैं।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
किसानों के पशुधन की देखरेख के लिए भी सरकार चिंतित है। राज्य निर्माण के बाद अब तक 114 पशु औषधालयों का पशु चिकित्सालयों में उन्नयन किया गया है।

पारंपरिक खेती करने वाले किसान अब उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। हमारे खेत सुगंधित फसलों से महकने लगे हैं। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में फूलों की खेती हो रही है। आज से 14 साल पहले 1200 हेक्टेयर में फूलों की खेती होती थी, जिसमें 914 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। राज्य के किसान 12 हजार 169 हेक्टेयर में फूलों की फसल ले रहे हैं और उत्पादन 2397 प्रतिशत बढ़ गया है। इसी तरह फलों के रकबे में 580 प्रतिशत वृद्धि रिकार्ड की गई है। सब्जी, औषधि और मसाले का रकबा भी कई गुना बढ़ चुका है। ऐसे किसान आर्थिक रूप से सुदृढ़ हुए हैं।

उद्यानिकी को बढ़ावा देने के लिए 2016-17 में दो लाख 73 हजार 854 वर्गमीटर में ग्रीन हाउस बनाए गए। वहीं 31 लाख 68 हजार 110 वर्गमीटर में शेडनेट हाउस अधोसंरचना का निर्माण कराया गया। इसी तरह 50 हजार 725 हेक्टेयर के लिए मल्चिंग शीट पर अनुदान दिए गए। कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन विकास, मछली पालन विभाग ने तीन टिशू कल्चर लैब, चार हाईटेक नर्सरी, एक सीड अधोसंरचना, चार प्लग टाईप वेजिटेबल यूनिट और 19 मिनि प्लग टाईप वेजिटेबल सीडलिंग यूनिट की स्थापना की है। इसके अलावा फसलों की सुरक्षा को लेकर भी विभाग किसानों को जागरूक कर रहा है। वर्ष 2016 में 6681 किसानों के 2197 हेक्टेयर रबि और 2017 में 5284 हेक्टेयर खरीफ फसल का बीमा कराया गया।

फूल-फल से हटकर डेयरी उद्योग और मछली पालन को बढ़ावा देने के भी भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं और इसमें भी अभूतपूर्व सफलता मिली है। प्रदेश में 14 साल पहले केवल 812 हजार टन दूध का उत्पादन होता था, जो बढ़कर एक हजार 187 हजार टन हो चुका है। यानी अब प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध की उपलब्धता 134 ग्राम है, जो पहले 107 ग्राम थी। किसानों के पशुधन की देखरेख के लिए भी सरकार चिंतित है। राज्य निर्माण के बाद अब तक 114 पशु औषधालयों का पशु चिकित्सालयों में उन्नयन किया गया है। इससे इनकी संख्या बढ़कर 321 हो गई है। जबकि पशु औषधालयों की संख्या बढ़कर 803 हो गई है।

फसलों की उत्पादकता और विविधिकरण को बढ़ावा देने किए जा रहे प्रयासों का ही परिणाम है कि धान उत्पादन में भी 47 फीसदी बढ़ोतरी हुई। वहीं दलहन 43 और तिलहन का उत्पादन 158 प्रतिशत ज्यादा हो रहा है। वर्तमान में राज्य का बीज उत्पादन 10 लाख 50 हजार क्विंटल है। बीज वितरण में 15 गुना वृद्धि हुई है। पिछले साल 11 लाख 95 हजार 185 क्विंटल बीज किसानों को उपलब्ध कराया गया। इस तरह उत्पादन बढ़ाने के लिए विभाग के माध्यम से सरकार खुद किसानों की मदद कर रही है। उत्पादन बढ़े इसलिए मृदा परीक्षण, स्वायल हेल्थ कार्ड आदि को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा किसानों को जैविक खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सिंचित एरिया बढ़ाने के लिए सरकार ने कई सिंचाई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी ताकि इसका सीधा लाभ किसानों काे मिले। इसी के चलते सिंचाई क्षमता बढ़कर 20 लाख 52 हजार हो चुकी है, जो 14 साल पहले 13 लाख 28 हजार हेक्टेयर थी। यानी कुल फसल क्षेत्र का मात्र 23 प्रतिशत। पहले लघु एवं सीमांत किसानों को अनुदान पर सिंचाई पंप उपलब्ध कराने की कोई योजना नहीं थी। वर्ष 2016-17 में शाकंभरी योजना के तहत दो लाख नौ हजार 66 कृषकों को सिंचाई पंप बांटे गए। इससे लगभग दो लाख 50 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा का विकास हुआ।

खेती में अनुसंधान को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। हालही में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली ने देश के 72 कृषि विश्वविद्यालय की रैंकिंग सूची में 17वां स्थान दिया है। पिछले साल 165 कृषि छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर नेट परीक्षा पास की और देश में चौथा स्थान प्राप्त किया। राज्य गठन के समय रायपुर में एकमात्र महाविद्यालय था। 2003 में इनकी संख्या चार हुई। अब कुल 32 कॉलेज हैं। अब कवर्धा, राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा, भाटापारा, कांकेर, कोरिया, जगदलपुर, रायगढ़, बेमेतरा, मंुगेली और नारायणपुर में शुरू हो चुके हैं।

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