किसानों के लिए हरा सोना बनी शिमला मिर्च, लाखों की हो रही आमदनी

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मॉनसून के इस सीजन में दोगुने भाव पर बिकने से शिमला मिर्च उत्तराखंड, हिमाचल, बिहार और उत्तर प्रदेश के किसानों पर हरा सोना बन कर बरस रही है। एक-एक किसान लाखो-लाख के मुनाफे से मालामाल हो रहा है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
इस समय अकेले शिमला मिर्च से ही सोलन सब्जी मंडी में करोड़ों रुपए का कारोबार हो रहा है। अभी तक मंडी में सात सौ कुंतल शिमला मिर्च से लगभग सात लाख रुपए का कारोबार हो चुका है। 

सब्जियों में शिमला मिर्च की खेती इन दिनों उन्नत किसानों की कमाई का एक महत्वपूर्ण जरिया बन गई है। फॉस्ट फूड की लोकप्रियता से शिमला मिर्च के बढ़ते बाजार ने उत्तराखंड और हिमाचल के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के किसानों को भी आकर्षित किया है। चंपावत (उत्तराखंड) के गांव कर्णकरायत के युवा किसान नवीन करायत धान, मड़ुवा आदि की परंपरागत कृषि छोड़कर अपने सत्रह नाली खेत में शिमला मिर्च की जैविक विधि से आधुनिक खेती कर रहे हैं। इस बार उन्होंने अपने खेतों में शिमला मिर्च के लगभग पंद्रह हजार पौधे रोपे, जिनसे सौ कुंतल से अधिक पैदावार हुई है। इससे उनको लगभग दो लाख रुपए का मुनाफा हुआ है। उनकी शिमला मिर्च की राज्य के ऊधम सिंह नगर, पीलीभीत, बरेली तक भारी डिमांड है।

नवीन की तरह ही लोहाघाट के गांव पऊ के मनोज चौबे उद्यान विभाग की मदद से शिमला मिर्च की पहली ही फसल में भारी मुनाफा कमा चुके हैं। वह पिछले पांच वर्षों से इसकी खेती कर रहे हैं। उद्यान विभाग ने उन्हें पॉलीहाउस भी दिया है, जिससे उनको 80 हजार से अधिक की कमाई हुई है। पिछले साल उन्होंने एक लाख 75 हजार रुपए कमाए थे। उत्तराखंड के पड़ोसी राज्य हिमाचल के सोलन क्षेत्र में किसानों को टमाटर की उपज ने तो इस बार निराश किया है लेकिन शिमला मिर्च से दो गुना से अधिक मुनाफा मिल रहा है। पिछले वर्ष जो शिमला मिर्च दस-बीस रुपए किलो बिकी थी, इस सीजन में चालीस रुपए किलो तक बिक रही है।

इस समय अकेले शिमला मिर्च से ही सोलन सब्जी मंडी में करोड़ों रुपए का कारोबार हो रहा है। अभी तक मंडी में सात सौ कुंतल शिमला मिर्च से लगभग सात लाख रुपए का कारोबार हो चुका है। शिमला मिर्च की कम पैदावार के चलते मैदानी क्षेत्रों में इसकी भारी मांग है। इससे अब करीब एक डेढ़ माह तक दाम कम होने की उम्मीद नहीं है। इस समय जो शिमला मिर्च के भाव मिल रहे हैं, वे दिल्ली, चंडीगढ़ व पंजाब की मंडियों में भी नहीं। सब्जी मंडी सोलन के सचिव प्रकाश कश्यप के मुताबिक इस वर्ष शिमला मिर्च के अच्छे के दोगुने भाव ने किसानों की बांछें खिला दी हैं। इसकी खेती को लेकर वे काफी उत्साहित हैं।

हिमाचल में शिमला मिर्च मध्य पर्वतीय क्षेत्रों सोलन, कुल्लू, सिरमौर, मंडी, चम्बा, कांगड़ा, चंपावत शिमला क्षेत्र) की एक प्रमुख नकदी फसल है। हिमाचल प्रदेश में शिमला मिर्च व मिर्च की खेती लगभग 1014 हैक्टेयर क्षेत्रफल में की जाती है तथा पैदावार लगभग 9.563 टन है। इससे लगभग 155-2500 रूपये प्रति बीघा लाभ होता है। सोलन की शिमला मिर्च ने दिल्ली की मार्केट में जगह बना ली है। सलोगड़ा पंचायत के गांव मनसार के अमर चंद शर्मा जैविक विधि से शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं। दिल्ली की एक कंपनी रोजाना उनके यहां से चालीस क्विंटल सब्जी ले जाती है। अमर चंद बताते हैं कि पहले शिमला मिर्च व टमाटर उगाते थे। जब कारोबार ने तेजी पकड़ी तो अपने 18 बीघे खेत में मटर, खीरा, आलू, गोभी, मक्का व गेहूं उगाना शुरू कर दिया है। इससे उनको सालाना करीब छह लाख की आय हो रही है। हिमाचल कृषि विभाग उनको बेस्ट फार्मर अवार्ड से नवाज चुका है।

जैसाकि नाम से लगता है, शिमला मिर्च मूलतः हिमाचल प्रदेश की फसल मानी जाती है, लेकिन अब इसकी बड़े पैमाने पर उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में भी खेती हो रही है। शिमला मिर्च का आज हर फास्ट फूड में इस्तेमाल हो रहा है। इससे इसकी भारी डिमांड है। पूर्णिया (बिहार) के गांव बैरबन्ना के किसान शिमला मिर्च का उत्पादन कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। वे अपनी शिमला मिर्च खुश्कीबाग और गुलाबबाग मंडियों में बेंच रहे हैं, जहां से उसकी अन्य राज्यों में भी सप्लाई हो रही है। शिमला मिर्च की फसल तैयार होने में दो से ढाई महीने का समय लगता है और उत्पादन भी अच्छा होता है। इससे प्रेरित होकर आज यहां के आधा दर्जन गांव बैरबन्ना, कालीगंज, चांदीबाड़ी, मझुआ, चांदी कठवा, बिलरिया आदि के किसानों ने इसकी पैदावार शुरू कर दी है। इस सीजन में बैरबन्ना के किसान सचिदानंद चौहान शिमला से एक लाख रुपए से ज्यादा कमा चुके हैं। इस समय यहां के बाजार में भी शिमला मिर्च दोगुने दाम पर बिक रही है।

रामपुर (उ.प्र.) के टांडा तहसील के कई गांवों शहपुरा, मंडवा हसनपुर, धनुपुरा, टोड़ीपुरा आदि में शिमला मिर्च की बड़े पैमाने पर खेती की जा रही है। शहपुरा के किसान शम्सुल आजम बताते हैं कि एक एकड़ में दो सौ क्विंटल शिमला मिर्च पैदा हुई है। उन्होंने चालीस हजार रुपए प्रति क्विंटल बेंचकर इस बार डेढ़ लाख रुपये कमाए हैं। मध्य प्रदेश में कटनी जिले के सुबीर चतुर्वेदी ट्रेनिंग और इंटरनेट के माध्यम से पॉली हाउस में शिमला मिर्च का उत्पादन कर रहे हैं। उन्हे शिमला मिर्च से लाखों की कमाई हो रही है।

शिमला मिर्च को ग्रीन पेपर, स्वीट पेपर, बेल पेपर आदि नामों से भी जाना जाता है। आकार एवं तीखेपन में इसका स्वाद मिर्च से भिन्न होता है। इसके फल गुदादार, मांसल, मोटा, घण्टी नुमा कही से उभरा तो कही से नीचे दबा हुआ होता है। शिमला मिर्च में मुख्यतः विटामिन ए तथा सी की मात्रा अधिक होती है। इन दिनो शिमला मिर्च की उन्नत एवं वैज्ञानिक तरीके से खेती करने वाले किसानों को बाजार मालामाल कर रहा है। शिमला मिर्च की उन्नत किस्मों में अर्का गौरव, अर्का मोहिनी, किंग ऑफ नार्थ, कैलिफोर्निया वांडर, अर्का बसंत, ऐश्वर्या, अलंकार, अनुपम, हरी रानी, पूसा दिप्ती, भारत, ग्रीन गोल्ड, हीरा, इंदिरा आदि उल्लेखनीय हैं। शिमला मिर्च की तुड़ाई पौध रोपण के पैंसठ से सत्तर दिनों बाद शुरू हो जाती है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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