कूड़ा बीनते थे 15 साल के बिलाल, आज हैं म्यूनिसिपल बॉडी के अम्बैसडर

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15 साल के कश्मीरी किशोर, बिलाल अहमद को श्रीनगर म्युनिसिपल बॉडी ने अपना अम्बेसडर बनाया है। बिलाल कूड़ा बीनने का काम करते थे। बिलाल उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा ज़िले में रहते हैं। उन्होंने वहां की वुलर झील को साफ करने का जिम्मा उठाया। ये झील बीते कुछ सालों से अपार गंदगी से पटी होने के लिए बदनाम थी। 

साभार: एचटी, द क्विंट
साभार: एचटी, द क्विंट
अपने देश में लोगों की एक बड़ी आम टेंडेंसी है, अधिकतर का मानना है कि एक हमारे कर लेने से क्या हो जाएगा? एक हम ही कूड़ा नहीं फैलाएंगे तो क्या बाकी भी नहीं फैलाएंगे? एक हमारे ही पानी बचाने से क्या हो जाएगा? एक हमारे ही सफाई कर लेने से क्या हो जाएगा? लेकिन कुछ दिलेर लोगों ने इन सब सवालों का जवाब देने की ठान रखी है।

इन सब बेतुके सवालों की उंगलियों को अपने काम के जरिए जवाबों की मुट्ठी बना देने वाले यही लोग देश के असली सेवक हैं। जिम्मेदारियों का अहसास हो जाना, उम्र हीं देखता। इसका ताजा उदाहरण हैं, बिलाल अहमद।

अपने देश में लोगों की एक बड़ी आम टेंडेंसी है, अधिकतर का मानना है कि एक हमारे कर लेने से क्या हो जाएगा? एक हम ही कूड़ा नहीं फैलाएंगे तो क्या बाकी भी नहीं फैलाएंगे? एक हमारे ही पानी बचाने से क्या हो जाएगा? एक हमारे ही सफाई कर लेने से क्या हो जाएगा? लेकिन कुछ दिलेर लोगों ने इन सब सवालों का जवाब देने की ठान रखी है। इन सब बेतुके सवालों की उंगलियों को अपने काम के जरिए जवाबों की मुट्ठी बना देने वाले यही लोग देश के असली सेवक हैं। जिम्मेदारियों का अहसास हो जाना, उम्र हीं देखता। इसका ताजा उदाहरण हैं, बिलाल अहमद।

15 साल के कश्मीरी किशोर, बिलाल अहमद को श्रीनगर म्युनिसिपल बॉडी ने अपना अम्बेसडर बनाया है। बिलाल कूड़ा बीनने का काम करते थे। बिलाल उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा ज़िले में रहते है। उन्होंने वहां की वुलर झील को साफ करने का जिम्मा उठाया। ये झील बीते कुछ सालों से अपार गंदगी से पटी होने के लिए बदनाम थी। प्लास्टिक कचरे से लेकर जानवरों के मल अवशेष तक सब झील में डाल दिया जाता था।

छोटी सी उम्र में बड़ी जिम्मेदारियां-

बिलाल ने उस झील से करीब 12000 किलो का कचड़ा साफ कर डाला।15 जुलाई को बिलाल को ब्रांड अम्बेसडर बनाया गया है। श्रीनगर म्युनिसिपल काउंसिल के आयुक्त डॉ शफाकत खान ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में जानकारी दी, बिलाल कइयों के लिए प्रेरणा हैं। उनकी लगन को देखकर उन्हें अम्बेसडर बनाया गया है। वो सालों से झील से प्लास्टिक बैग, बोतलें, जूते-चप्पल और जानवरों के अवशेष साफ करते आए हैं। बिलाल को ऑफिस की तरफ से एक खास यूनिफॉर्म और आने जाने के लिए गाड़ी दी जाएगी।

वो पिछले पांच सालों से झील साफ करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। झील से उन्हें जो भी कचड़ा मिलता है, उसे वो कबाड़ में बेच देते हैं। इस तरह उन्हें हर दिन डेढ़ सौ से दो सौ रुपए मिल जाया करते थे। इतनी छोटी सी ही उम्र में उन पर अपने परिवार, मां और बहनों की जिम्मेदारियां आ गयी थीं। द क्विंट के मुताबिक, बिलाल के पिता का देहांत तब हो गाया था जब वो कम उम्र के थे। उनके पिता भी कूड़ा बीनने का काम करते थे। घर का खर्च मुश्किल से ही चल पाता था।

जमीर ही असली धन है-

अल्टीमेट हॉरिजन्स ने उन पर एक वीडियो बनाया है। इस वीडियो में बिलाल बताते हैं कि मैंने श्रीनगर में देखा, लोग ढेर सारा कूड़ा कचड़ा वुलर झील में डाल देते थे। मैं ये सब देखकर बहुत दुखी होता था। मैंने रास्ता निकाला कि क्यों न झील की सफाई का जिम्मा उठाया जाए। और उसमें से जो सामान निकलेगा वो बेचकर कुछ पैसे भी जुगाड़ लूंगा। एक पंथ दो काज हो जाएगा।

बिलाल झील साफ करने की मुहिम शुरू करने से पहले एक गैराज में मैकेनिक के तौर पर और एक चाय की दूकान पर हेल्पर के तौर पर काम करते थे। उन पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई गई है। जिसका नाम है, सेविंग द सेवियर- स्टोरी ऑफ अ किड एंड वुलर लेक। इसको कश्मीर के ही जलाल-यू-दिन बाबा ने डायरेक्ट किया है।

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