आवाज के माध्यम से मानव और मशीन के बीच सामंजस्य स्थापित करता यूनीफोर

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अब से सात वर्ष पूर्व स्मार्टफोन के युग का प्रारब्ध होने से पहले ही उमेश सचदेव और रवि सरावगी ने ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक मोबाइल उत्पाद का निर्माण करने का सपना देखा था। यूनिफोर साॅफ्टवेयर सिस्टम के सीईओ उमेश कहते हैं, ‘‘हमनें पायलट परियोजना प्रारंभ करने के लिये तमिलनाडु के कई जिलों का सिलसिलेवार दौरा किया।’’

अपने इस सफर के दौरान यह जोड़ी कई तरह की समस्याओं और मुद्दों से रूबरू हुई जिनमें से साक्षरता की कमी और बोलचाल इत्यादि के क्षेत्र में कई बोलियों का चलन मुख्य थीं। एक समाधान खोजने की दिशा में अपने कदम बढ़ाते हुए इन्होंने इस डिजिटल डिवाइड को पाटने के लिये एक भाषण विश्लेषिकी साॅफ्टवेयर को चुना।

इन्हें प्रोटोटाइप विकसित करने में एक वर्ष का समय लगा और उसके विकास के मात्र एक महीने के भीतर ही इन्हें 1 लाख डाॅलर का प्रारंभिक निवेश पाने में सफलता मिली। अपने प्रारंभिक दिनों में इस टीम का सारा ध्यान उपयोगकर्ताओं को सेवाओं के प्रयोग के लिये प्रेरित करने के लिये साधारण फोन के उपयोग पर रहा।

समय के साथ जैसे-जैसे इनके साथ जुड़ने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में इजाफा होता रहा वैसे-वैसे ही ये अपनी तकनीक में भी विकास करने में कामयाब रहे और विभिन्न उद्यमों को स्पीच एनालिटिक्स, वाइस बायोमेट्रिक्स और वर्चुअल असिस्टेंट साॅल्यूशंस भी उपलब्ध करवाने लगे।

आज की तारीख में यूनीफोर के पास 70 से भी अधिक उद्यमी उपभोक्ता और 4 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता हैं। वित्तीय वर्ष 2015 की दूसरी तिमाही में इनके स्पीच एनालिटिक्स साॅफ्टवेयर auMina बाजार में अपना आधार बढ़ाने में कामयाब रहा पूरे देश में इनके 6 पायलट प्रोजेक्ट संचालित हो रहे हैं जिनके जल्द ही पूर्ण उत्पाद के रूप में सामने आने की संभावना है। उमेश बताते हैं, ‘‘हमें फिलिपींस और संयुक्त अरब अमीरात से भी अपने उत्पादों को लेकर काफी प्रशंसा सुनने को मिली है।’’

उपभोक्ता की आवश्यकता को समझना

उमेश कहते हैं, ‘‘हमारे लिये सबसे महत्वपूर्ण पल वह रहा जब हम यह समझने में कामयाब रहे कि आवाज हमेशा ही उपभोक्ता सेवा के क्षेत्र में केंद्रीय भूमिका निभाती रहेगी और अगर किसी सेवा के पास वाॅइस चैनल नहीं है तो वह काफी गंभीर रूप से प्रभावित होगी। हमनें तय किया कि अगर स्वचालन को वास्तव में उपभोक्ता के साथ जुड़ने में सफल करना है तो मशीनों को मानव भाषा को समझने, प्रक्रिया करने और जवाब देने में सक्षम होना होगा।’’

यूनिफोर द्वारा प्रदान किये जाने वाले समाधान का विचार मुख्यतः भाषण की शक्ति का विस्तार करते हुए एक क्रांतिकारी बदलाव लाकर मानव और मशीन के बीच के वार्तालाप को सुगम बनाना है। यूनीफोर का एक जानामाना पायलट प्रोजेक्ट ग्रामीण इलाकों की वित्तीय समावेशन परियोजनाओं में देखा जा सकता है। उमेश कहते हैं, ‘‘हमनें कई संस्थानों से बातचीत की और उन्हें समझाया कि आज की तारीख में लगभग हर किसी के पास स्पीच और बायोमेट्रिक्स से सुसज्जित फोन हैं और ऐसे में बिना किसी कार्ड या डिवाइस के भी आसानी से बैंकिंग की जा सकती है।’’

इसके फलस्वरूप इनकी टीम अपना विस्तार करने में सफल रही और साथ ही यूनीफोर प्रतिमाह हजारों उपयोगकर्ताओं को अपने साथ जोड़ रही थी। उमेश आगे कहते हैं, ‘‘चूंकि हम एक विस्तृत समस्या के साथ काम कर रहे थे इसलिये हमारा उत्पाद और तकनीक में भी सुधार देखने को मिला।’’

एक बड़े आधार तक अपनी पहुंच बनाना

आबादी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हमारे जैसे संसाधनों और संचार के साधनों से अभी भी महरूम हैं। उमेश कहते हैं, ‘‘वर्नाकुलर वाॅइस निम्नतम आम विभाजक था और ऐसे में हमारा इरादा स्थानीय भाषाओं का प्रयोग करते हुए गांवों के लिये जस्टडायल जैसा कुछ प्रारंभ करने का था।’’

हालांकि अगर व्यापार के नजरिये से देखें तो यह इरादा विस्तार योग्य नहीं था। इसी दौरान इन्होंने संपूर्ण प्रक्रिया को स्वचलित करने पर जोर दिया और 3 उत्पाद समाधान के साथ सामने आए। auMina (स्पीच एनालिटिक्स), amVoice (वाॅइस बायोमेट्रिक्स) और Akeria (वर्चुअल एसिस्टेंट)।

उमेश आगे कहते हैं, ‘‘हमारी तकनीक बिल्कुल नई है और हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती उद्यमियों को इसके प्रयोग के लिये राजी करना था। हमनें इस व्यापार को आसान बनाते हुए उपभोक्ताओं को कम से कम एक बार उपयोग करके देखने के राजी किया।’’

बीते सात वर्षों के दौरान यूनीफोर विभिन्न प्रकार और स्तरों की स्केलिंग चुनौतियों का सामना करता आया है। उमेश बताते हैं कि प्रारंभिक दौर में एक नई टीम को तैयार करना और एक व्यापार को स्थापित करते हुए उसका निर्माण करना प्रमुख चुनौती था। उमेश कहते हैं, ‘‘उस समय हम उद्यमिता के क्षेत्र में बिल्कुल नौसखिये थे और हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विचार को अमली जामा पहनाने की थी।’’

इनकी मुख्य टीम में शामिल उमेश इसके अलावा सिंगुलेरिक टेक्नोलाॅजीज़ के भी सहसंस्थापक रह चुके हैं और सीओओ रवि सरावगी का भी यह दूसरा उपक्रम है। इसके अलावा इनके सीएमओ संजीव गादरे अडोब और विप्रो के अलावा कई अन्य नामचीन कंपनियों के साथ साॅफ्टवेयर उत्पादों की मार्केटिंग में 20 वर्षों से भी अधिक का अनुभव रखते हैं।

कोर तकनीकी के निदेशक राम सुंदरम माइक्रोसाॅफ्ट और ब्राॅडकाॅम जैसी कंपनियों के साथ 15 वर्ष से भी अधिक का अनुभव रखते हैं। व्यवसायिक सेवाओं के प्रमुख रोहित माहेश्वरी समाधान परामर्श, व्यापार विकास, सेल्स और प्रोग्राम मैनेजमेंट के क्षेत्र में 18 वर्ष के अनुभवी हैं।

यूनीफोर 14 भारतीय भाषाओं सहित 25 वैश्विक भाषाओं और 100 से भी अधिक बोलियों का समर्थन करता है। इनके प्रमुख निवेशक क्रिस गोपालकृष्णन, आईडीजी वेंचर्स, इंडिया एंजेल नेटवर्क, याॅरनेस्ट फंड और स्टाटा वेंचर्स हैं।

यूनीफोर ने हाल ही में बैंगलोर में अपना नए कार्यालय स्थापित किया है और इनका इरादा आने वाले 15 महीनों में 100 के करीब लोगों को अपनी टीम में जोड़ने का है। फिलहाल इनके भारत के अलावा फिलिपींस और दुबई में भी कार्यालय हैं और ये जल्द ही अमरीका में विस्तार की योजना बना रहे हैं।

लेखिकाः सिंधु कश्यप

अनुवादकः निशांत गोयल

Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

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