यूपी की लड़की ने शुरू किया बिजनेस, बनाती है करौंदे और चुकंदर की टॉफियां

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उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के तमकुही रोड इलाके में रहने वाली शालू बिजनेस में हाथ आजमा रही हैं और नए प्रॉडक्ट तैयार कर रही हैं। कॉलेज में ही नीति आयोग द्वारा शुरू किए गए अटल इनक्यूबेशन सेंटर में उन्होंने उद्यमिता के गुर सीखे।

शालू नथानी
शालू नथानी
शालू को अटल इनक्यूबेशन सेंटर से कई तरह की मदद मिली है, लेकिन उन्हें और अधिक पैसों की जरूरत है ताकि उद्यम का विस्तार किया जा सके। वे कहती हैं कि बिजनेस में निवेश का सबसे अहम योगदान होता है।

छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले लोगों के भी बड़े सपने होते हैं। शालू नथानी की कहानी इसका जीता जागता सबूत है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के तमकुही रोड इलाके में रहने वाली शालू बिजनेस में हाथ आजमा रही हैं और नए प्रॉडक्ट तैयार कर रही हैं। कुशीनगर से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद शालू राजस्थान के बनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी में आगे की पढ़ाई करने के लिए चली गईं। यहीं पर उन्होंने बिजनेस शुरू करने के गुर सीखे और फिर 'स्वजन एंड कंपनी' की शुरुआत हुई।

हालांकि शालू के मन में शुरू से ही बिजनेस करने के ख्वाब थे, लेकिन कई सारी चीजों ने उन्हें इसके लिए प्रेरित किया। वह बताती हैं, 'मेरी मां हीमोग्लोबिन की कमी से पीड़ित थीं और डॉक्टर ने उन्हें सुझाव दिया कि वह चुकंदर खाएं और आयरन की खुराक लें। लेकिन मां को चुकंदर का स्वाद पसंद नहीं आया और फिर मैंने सोचना शुरू किया कि कैसे चुकंदर जैसी अच्छी चीजों को स्वादिष्ट विकल्प के रूप में बदला जाए।'

शालू उस समय हालांकि बनस्थली विद्यापीठ में मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही थीं और वह सेकेंड ईयर में थीं। लेकिन वह सही जगह थीं। कॉलेज में ही नीति आयोग द्वारा शुरू किए गए अटल इनक्यूबेशन सेंटर में उन्होंने उद्यमिता के गुर सीखे। उन्होंने ने कॉलेज परिसर में शोध शुरू किया और फिर इस नतीजे पर पहुंचीं कि परंपरागत रूप से प्रचुर मात्रा में मिलने वाले फलों और फसलों से कैसे कॉन्फेक्शनरी प्रॉडक्ट तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने करौंदा और चुकंदर जैसी चीजों का इस्तेमाल अपनी कंपनी के तहत जैम, जेली और कैंडी बनाने में किया।

शालू कहती हैं, 'तमकुही रोड में रहने की वजह से मुझे स्थानीय, पौष्टिक लेकिन कम उपयोग की जाने वाली पारंपरिक फसलों की पहचान करने का अवसर मिला। इसके साथ ही इस जगह पर रहने से मुझे लगा कि बिजनेस को अच्छे से चलाया जा सकता है। जिन निवेशकों से मैं मिली उनका भी यही मानना है कि छोटे शहरों के व्यवसायी अधिक ऊर्जावान और जुनूनी होते हैं और वे कभी भी मेहनत करने के लिए तैयार रहते हैं।'

स्वजन ने इसी साल मई से ऑपरेशन शुरू किया। शालू अपनी कंपनी का कॉन्सेप्ट विस्तार से बताते हुए कहती हैं, 'हम परंपरागत फसलों को संरक्षित करते हैं जिनमें अधिक पौष्टिकता होती है। हम इन्हें बिना केमिकल के इस्तेमाल के प्रयोग करते हैं ताकि ये पूरी तरह से ऑर्गैनिक बने रहें। मुझे लगता है कि खाने में किसी का भी दिल जीतने की ताकत होती है। अगर किसी को अच्छा खाने को कुछ मिल जाए तो उसकी खुशी देखने लायक होती है। तो इस तरह से हम पूरी तरह से ऑर्गैनिक जैम, जेली और कैंडी जैसे उत्पादों की लंबी श्रंखला प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे हम लोगों को वापस उनकी जड़ों की तरफ लौटाने का प्रयास कर रहे हैं।'

शालू को अटल इनक्यूबेशन सेंटर से कई तरह की मदद मिली है, लेकिन उन्हें और अधिक पैसों की जरूरत है ताकि उद्यम का विस्तार किया जा सके। वे कहती हैं कि बिजनेस में निवेश का सबसे अहम योगदान होता है। उन्होंने आगे कहा, 'हम जयपुर के मुरारका फाउंडेशन के साथ कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल पर काम कर रहे हैं। जितना भी पैसा हमें फायदे के रूप में मिल रहा है हम उसे पूरी तरह से फिर से बिजनेस में डाल रहे हैं। हमने निधि के लिए कई जगहों पर आवेदन किया है, हमें उम्मीद है कि जल्द ही हमारी पैसों की किल्लत दूर हो जाएगी।'

शालू ने अपने बिजनेस को लेकर कई बड़े सपने देखे हैं। वे कहती हैं, 'हम अपना खुद का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क स्थापित करना चाहते हैं ताकि हमें और ग्राहक मिल सकें और हमारे उत्पादों की पहुंच ज्यादा हो सके। हम पारंपरिक फसलों के बारे में और अधिक जागरूकता फैलाना चाहते हैं। आने वाले समय में हमारा सपना है कि हम कॉन्फेक्शनरी के बड़े ब्रैंड बनें जिससे स्वास्थ्य और पोषण के बीच सामंजस्यपूर्ण संतुलन पैदा हो सके।'

शालू का मानना है कि बिजनेस करना काफी कठिन काम है क्योंकि इसमें पढ़ाई के साथ-साथ काम करना पड़ रहा है। वे कहती हैं, 'दिखने में भले ही ये काम आसान लगे, लेकिन निवेश जुटाना काफी मुश्किल काम है। इसके साथ ही अगर आप महिला हैं तो आपको और भी मुश्किलें आ सकती हैं क्योंकि किसी को यकीन नहीं होता कि महिलाएं भी बिजनेस कर सकती हैं।' हालांकि वे अपने सपनों को लेकर काफी दृढ़ प्रतिज्ञ हैं और पूरे आत्मविश्वास के साथ कहती हैं कि मुश्किलों को पार पाए बगैर बड़े सपने नहीं पूरे किए जा सकते।

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