साइकिल की सवारी से धन जुटाया, समाज सेवा में पैसे लगाया...


साइकिलिंग की सवारियों का आयोजन कर सवारों के माध्यम से धन जुटाने का करते हैं काम

वर्ष 2014 से अबतक 7 सवारियों के माध्यम से 4 लाख रुपये के करीब कर चुके हैं इकट्ठे

120 से 150 किलोमीटर के सवारी सत्रों का आयोजन करते हैं सप्ताहांतों में

लोगों को इस तरह से समाजसेवा के साथ स्वस्थ रहने में भी मदद करने का है इरादा

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साइकिलिंग और वर्षा जल संचयन। इन दोनों कामों को एक साथ लाना हममें से अधिकतर को पहेली जैसा लग सकता है। बहरहाल बेहद उलझी हुई दिखने वाली यह पहेली वास्तव में बिलकुल सरल है। पुणे से करीब 75 मिलोमीटर दूर बीहड़ और पानी को तरसते इलाके में बसा इलाका ‘‘मंधार देवी’’ इसका जीता-जागता उदाहरण है। यहां के ग्रामीण खेती और अन्य कार्यों के लिये बारिश की उम्मीद और आशा लिये आसमान की तरफ टकटकी लगाए रहते हैं लेकिन अफसोस ही बार उन्हें मायूस ही होना पड़ता है। उनकी इस समस्या को देखते हुए एक एनजीओ ‘सेवावर्धनी’ वर्षा जल संचयन के एक प्रभावी समाधान के साथ सामने आया।

हालांकि समाधान कागजों पर तो बहुत अच्छा लग रहा था लेकिन जमीन पर इसका निष्पादन करना विभिन्न वित्तीय मुद्दों की चुनौतियों से भरा हुआ था। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 7 लाख रुपये थी और दाम में मिली रकम के बावजूद इन लोगों के पास लगभग 1.5 लाख रुपये कम रह गए। ऐसे में रोशनी की एक सुनहरी किरण के जैसे ‘अर्न ब्लैसिंग्स’ ने अपना कदम पूरे परिदृश्य में रखा। कुल 11 सवारों ने एक पहल के तौर पर पुणे के कटराज से लेकर मंधार देवी के गडागेवाड़ी इलाके तक के 154 किलोमीटर लंबे रास्ते को साइकिल के द्वारा पार करने की चुनौती को उठाया और इस परियोजना के लिये लगभग 1.1 लाख रुपयों की व्यवस्था करने में सफल रहे। सोहम बताते हैं कि इसका सबसे अच्छा हिस्सा यह रहा कि ग्रामीण इस समस्त प्रक्रिया में पूरी तरह से डूब गए थे और स्वयं को इसका एक हिस्सा मानने लगे थे।

यह तो उन सब उदाहरणों में से एक है जहां ‘अर्न ब्लेसिंग्स’ ने सामने आकर दूसरों की सहायता करने के लिये हाथ बढ़ाया है और ऐसा करने में सफल रहे हैं जिसे करने का सपना लेकर अधिकतर एनजीओ की स्थापना होती है। वर्ष 2014 के बाद से ये लोग विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिये 7 सवारियों का सफलतापूर्वक आयोजन कर 4 लाख रुपये के करीब की रकम को इकट्ठा कर चुके हैं। इस रकम का इस्तेमाल गरीब बच्चों की शिक्षा, एचआईवी संक्रमित बच्चों की सहायता, किशोरों के लिये शिक्षा कार्यक्रमों का आयोजन, जल संचयन, ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब बच्चों के लिये छात्रावास की सुविधा उपलब्ध करवाने इत्यादि जैसे कामों में किया जाता है। सोहम आगे कहते हैं, ‘‘हम दान की व्यवस्था करने के अलावा एनजीओ को रिपोर्ट तैयार करने, सीएसआर प्रस्तावों को तैयार करने और उनके लिये ब्रांडिंग और मार्केकटिंग सामग्री तैयार करने में मदद करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा हम एनजीओ को विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन में भी सहायता करते हैं।’’

‘अर्न ब्लेसिंग्स’ का मूल आधार सोहम का साइकिल के प्रति जुनून और उनके सकारात्मक पहल के द्वारा समाज को कुछ वापस करने के सहज भाव का मिश्रण है। सोहम आगे कहते हैं,

’’यह एक बेहद साधारण सा तथ्य है कि हम दूसरों को एक बेहतर जीवन जीने में मदद कर सकते हैं और यह तथ्य हमारे चेहरे पर एक बड़ी मुस्कुराहट ला देता है और हम अपनी प्रत्येक सवारी या आयोजन के बाद ऐसा ही करते हैं। और इसे ही हम आर्शीवाद कमाना कहते हैं और वह भी एक बार नहीं बार-बार।’’

यह टीम समाज के हर क्षेत्र से आने वाले सवारों और सवयंसेवकों का एक मिश्रण है। अपनी एक अलग अवधारणा में विश्वास करने वाले सोहम अपनी टीम को ऐसे जुनूनी सवारों से भर देना चाहते हैं जो सवारी से बेसाख्ता प्रेम करते हों और समाज को वापस कुछ देने का इरादा रखते हों। सोहम बताते हैं कि सवार इनके पास और अधिक की खोज में दोबारा वापस आते रहते हैं। वे आगे कहते हैं, ‘‘अर्न ब्लेसिंग्स’ अब उनके जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है और इसमें एक बार भाग लेने वाला हमेशा अगली सवारी को लेकर उत्साहित रहता है।’’ सोहम का इस बात पर अधिक जोर रहता है कि उनके साथ जुड़ने वाले लोग सवारी का अधिक से अधिक आनंद उठा सकें इसलिये वे अपने सवारों के लिये कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं करते हैं। साइकिलिंग के उत्साही अपने सवयं के लिये लक्ष्यों का चयन कर इस पहल का एक हिस्सा बन सकते हैं।

इनकी सवारियां 120 किलोमीटर से 150 मिलोमीटर के मध्य की होती हैं और इनका आयोजन सिर्फ सप्ताहांतों में ही होता है। एक तरफ जहां इनमें भाग लेने वाले सवार किसी भी प्रकार का मौद्रिक लाभ नहीं पाते हैं ऐसे में प्रत्येक सवारी के दौर में तय की जाने वाली दूरी को देखते हुए इन सवारियों का एक सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह आपको आकार में रखने में काफी मददगार होती हैं। सोहम चुटकी लेते हुए कहते हैं, ‘‘इसलिये हमारी टैगलाइन है, ‘हम चर्बी जलाते हैं और आप आर्शीवाद कमाते हैं।’’


विधि और उसके पीछे का गणित

इनका दृष्किोण काफी सीधा और सरल है। ये जिस दिशा में योगदान करना चाहते हैं पहले उसका चुनाव कर लेते हैं। इसके बाद वे उस काम को सफलतापूर्वक करने के लिये पृष्ठभूमि की कड़ी जांच के बाद एक एनजीओ का चयन कर लेते हैं। चुने गए एनजीओ और दूसरे विभिन्न स्त्रोंतों के माध्यम से वे उन क्षेत्रों के बारे में जानकारी लेते हैं जिन्हें काम की आवश्यकता होती है और साथ ही उस परियोजना को पूरा करने के लिये जरूरी धन की भी गणना करते हैं।

इसके बाद धन इकट्ठा करने के लिये ये सफर के प्रत्येक मिलोमीटर में इकट्ठी की जाने वाली रकम को प्रतिज्ञा के रूप में विभाजित कर देते हैं। सोहन बताते हैं, ‘‘उदाहरण के लिये मान लीजिये कि हमने एक सप्ताहांत में 100 मिलोमीटर की सवारी करने का फैसला किया और लोगों ने 5 रुपये प्रति किलोमीटर की प्रतिज्ञा ली। इस प्रकार 500 रुपये की धनराशि दान दी जाती है। लोग अपने योगदान के लिये सवारों की संख्या को चुन सकते हैं और इस प्रकार दान राशि बढ़ती रहती है। ऐसे में जैसे-जैसे शामिल सवारों की संख्या में इजाफा होता है वैसे-वैसे ही सहयोग राशि में इजाफा होता रहता है।’’

एक सवारी के बाद उपलब्धि की भावना
एक सवारी के बाद उपलब्धि की भावना

सोहम हमें जानकारी देते हुए बताते हैं कि सवारी में शामिल होने वाले सवार किसी भी प्रकार का मौद्रिक लाभ अर्जित नहीं करते हैं। वयवस्था को पारदर्शी रखने की दिशा में एक विस्तृत आॅडिट की हुई रिपोर्ट इनकी वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी जाती है ओर वे अपने खर्चों और मिले हुए दान की जानकारी देने के लिये हमेशा खुले हैं।


राजस्व माॅडल

वे एक शून्य बैंक बैलेंस प्रंसिपल पर काम करते हैं जिसके अंतर्गत वे जो कुछ भी इनके पास है उसे देने के लिये तैयार रहते हैं। सोहम आगे कहते हैं, ‘‘हम दानदाताओं से धन इकट्ठा करते हैं और पूरी रकम विभिन्न एनजीओ के हाथों में सौंप देते हैं। हम किसी भी तरह से वित्त पोषित नहीं हैं और हमारी प्रत्येक सवारी और यहां तक कि भोजन का समस्त खर्चा भी अपनी जेब से करते हैं। हालांकि अगर कोई सवारी के किसी भाग को, जैसे बैक-अप वाहनों पर आने वाला व्यय, भोजन इत्यादि, को प्रायोजित करना चाहे तो हमारे विकल्प खुले हैं।’’


चुनौतियां और इनके बड़े सपने

सोहन के अनुसार युवाओं की भागीदारी का अभाव और उनका बेगाना रवैया उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है। चुंकि दान में मिली पूरी राशि सवारों की संख्या के अिल्कुल अनुपातिक है इसलिये वे अधिक से अधिक लोगों को अपने साथ जोड़ने के प्रयासों में लगे हैं। उनकी योजला बेहद सीधी और सरल है के शामिल लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि करो ओर धन उगाहने को फिटनेस के साथ जोड़ दो।

‘अर्न ब्लेसिंग्स’ के लिये सोहम का सपना इसे देशभर के एनजीओ के एक कंेंद्र के रूप में स्थापित करना है। वे अपने इन अच्छे इरादों को केवल धन की कमी चलते नष्ट होते हुए देखना नहीं चाहते। इसके अलावा वे एक ऐसे सवस्थ समाज का निर्माण भी करना चाहते हैं जो एक बेहतर जीवनशैली को अपनाने में विश्वास करते हों और इसके माध्यम से समाज को वापस कुछ देने में मदद कर सकें।

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Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

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