बिदार के 'वॉटरमैन' और IAS अॉफिसर अनुराग तिवारी का चले जाना दिल तोड़ने वाला है

पिछले साल जब अनुराग कर्नाटक बीदर के डिप्टी कलेक्टर बन कर गए थे, तो वहां पानी की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए बेहतरीन काम किया था। बीदर में 130 से ज्यादा टैंक और 100 से ज्यादा कुंआ खुदवाकर वो सुर्खियों में आ गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो अनुराग कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के खिलाफ हजारों करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश करने वाले थे। इस वजह से कर्नाटक के राजनेता और कुछ अधिकारी उनके पीछे पड़ गए थे।

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भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अनुराग तिवारी की डेडबॉडी लखनऊ में 17 मई को मिली थी। उनकी मौत से देश भर के लोग दुखी हैं। दुर्भाग्य की बात है, कि जिस दिन उनकी मौत हुई उसी दिन उनका जन्‍मदिन भी था। कर्नाटक कैडर के 2007 बैच के IAS अधिकारी अनुराग अपने काम और ईमानदार व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे।

अनुराग तिवारी, फोटो साभार: Facebook
अनुराग तिवारी, फोटो साभार: Facebook
अनुराग तिवारी के काम से प्रभावित होकर कर्नाटक सरकार ने टैंकों की सफाई के लिए केरे संजीवनी योजना चलाई। जिले के लोग उन्हें प्यार से वाटरमैन के नाम से पुकारते थे। वो तेजतर्रार और सरल नौकरशाह के रुप में जाने जाते थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुराग कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के खिलाफ हजारों करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश करने वाले थे। इस वजह से कर्नाटक के राजनेता और कुछ अधिकारी उनके पीछे पड़ गए थे।

पिछले साल जब अनुराग कर्नाटक बीदर के डिप्टी कलेक्टर बन कर गए थे, तो वहां पानी की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए बेहतरीन काम किया था। बीदर में 130 से ज्यादा टैंक और 100 से ज्यादा कुंआ खुदवाकर वो सुर्खियों में आ गए थे। बारिश के दौरान ये सभी वॉटरबाडीज भर गईं। 550 साल पुरानी जहाज की बावड़ी जो सूखी पड़ी रहती थी, उससे आज पुराने शहर में पीने के पानी की सप्‍लाई हो रहा है। उन्‍होंने कुओं में 80 फीट तक जमे कुड़े को साफ करवाया। यहां के चिदरी रोड़ स्थित कुएं में जो कूड़े से भरा रहता था आज के समय में पानी की सप्‍लाई हो रहा है। अनुराग तिवारी के काम से प्रभावित होकर कर्नाटक सरकार ने टैंकों की सफाई के लिए केरे संजीवनी योजना चलाई। जिले के लोग उन्हें प्यार से वाटरमैन के नाम से पुकारते थे। वो तेजतर्रार और सरल नौकरशाह के रुप में जाने जाते थे।

बीदर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनुराग तिवारी ने हैदराबाद-कर्नाटक इलाके में टूरिस्ट सर्किट बनवाने का प्लान बनाया था। बीदर के किले में ऑडियो-विज्युअल गाइड की सुविधा भी शुरू करवाने वाले थे। यहां तक रि उन्होंने वहां के मैजिस्ट्रेट कोर्ट और नगर पंचायतों को कंप्यूटराइज्ड करवा दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुराग कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के खिलाफ हजारों करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश करने वाले थे। इस वजह से कर्नाटक के राजनेता और कुछ अधिकारी उनके पीछे पड़ गए थे। विधान सभा में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने गुरुवार को ये दावा किया। पुलिस ने इसको 'रहस्‍यमय परिस्थितियों' में मौत कहा है। मृतक IAS अधिकारी अनुराग तिवारी 2007 बैच के कर्नाटक कैडर के आईएएस थे। वे यूपी के ही बहराइच के रहने वाले थे।

बहराइच के उनके घर पर 17 मई को उनके जन्मदिन पर पूजा की तैयारी चल रही थी। उनके नाम से सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने का रिवाज उनकी पैदाइश से आज तक चला आ रहा था। लेकिन अचानक उनकी एकाएक मौत की खबर ने सबको स्तब्ध कर दिया।

अनुराग तिवारी के बड़े भाई मयंक ने मीडिया से बात करते हुए बताया, कि अनुराग की सुरक्षा को पहले से खतरा था। उन्होंने बताया कि अनुराग ने दो महीने पहले बताया था कि उनके साथ कोई हादसा हो सकता है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा, कि 'अनुराग ने मुझे बताया था कि कोई मंत्री उनके काम करने के तरीके से खुश नहीं था क्योंकि वे किसी घोटाले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे। अनुराग पर उनके विभाग के कुछ अधिकारी और राजनेताओं का दबाव था और अब अचानक हमें उनकी मौत की खबर मिली।' मामले में लखनऊ पुलिस ने पांच पुलिस अधिकारियों की SIT का गठन कर दिया था। इस टीम को 72 घंटे में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था।

अनुराग तिवारी जैसे अधिकारी को केवल बीदर के लोग ही नहीं, बल्कि पूरा देश याद रखेगा। आप सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं की प्रेरणास्त्रोत बने रहेंगे।

-मन्शेष

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