लॉन्चपैड एक्सीलेटर में गूगल ने भारत से चुने सात स्टार्टअप

फ्लाईरोब, रेंटोमोजा व हेशलर्न चयनित स्टार्टअप की सूची में शामिल।

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सर्च इंजिन गूगल ने आज काह कि उसने अपने लांचपैड एक्सीलेटर कार्य्रकम के तीसरे चरण के लिए भारत से सात स्टार्टअपन को चुना है।चयनित स्टार्टअप में फ्लाईरोब, रेंटोमोजा व हेशलर्न शामिल है। कंपनी ने एक बयान में यह जानकारी दी है। ये स्टार्टअप इस कार्य्रकम के तहत ब्राजील, मेक्सिको, कोलंबिया, फिलीपीन आदि अन्य देशों की कंपनियों के साथ भाग लेंगे।

फोटो साभारा : Logo Google
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उधर दूसरी तरफ विभिन्न ब्रांड के उत्पादों के खरीदारों को लायलटी रिवार्ड (भारोसे के लिए पुरस्कार) कार्यक्रम चालने वाली पेबैक ने तीन नये ई-कॉमर्स स्टार्टअप से गठजोड़ की घोषणा कर दी है। कंपनी के बयान में कहा गया है, कि उसने स्टार्टअप वोयला, रेयररेबिटवंडरटेल्स से गठजोड़ किया है। इसके जरिए वह फैशन जूलरी व प्रीमियम क्लोथिंग जैसे नये क्षेत्रों में कदम रख सकेगी। इसके अनुसार इन नये स्टार्टअप के उसके साथ जुड़ने से उपयोक्ताओं को फायदा और उसके नेटवर्क का विस्तार होगा।

पेबैक के मुख्य विपणन अधिकारी गौरव खुराना ने कहा कि फैशन और ट्रेवल क्षेत्र में इस समय भारी संभावनाएं हैं ओैर इन नई भागीदारियों से पेबैक के नेटवर्क को और अधिक ताकत मिलेगी और कंपनी को ज्यादा ग्राहकों से अपेक्षाकृत पहले से ज्यादा ब्रांडों के साथ भरोसा स्थापित करने का अवसर मिलेगा।

साथ ही कंप्यूटर क्षेत्र की कंपनी डेल के पूर्व कार्यकारी निदेशक ‘ग्राहक और लघु एवं मध्यम कारोबारमहेश भल्ला को स्टार्टअप क्लब इंडिया ने मुख्य परामर्शदाता नियुक्त किया है। कंपनी ने एक विज्ञप्ति में बताया कि भल्ला के पास इस क्षेत्र में करीब 20 वर्ष का अनुभव है। इससे पहले वह उबर इंडिया जैसी कंपनी में भी शीर्ष पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

स्टार्टटप क्लब इंडिया देश में नए उद्यमियों के सबसे बड़े समुदायों में से एक है। इसके मंच पर 10,000 से ज्यादा नव उद्यमी शामिल हैं।

दूसरी तरफ साफ्टवेयर सेवा कंपनी इन्फोसिस ने डेनमार्क स्टार्टअप यूएनएसआईएलओ में लगभग 14.49 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह निवेश इन्फोसिस इन्नोवेशन फंड के जरिए किया गया है। यूएनएसआईएलओ कृत्रिम इंटेलीजेंस समूह है। इन्फोसिस ने नवोन्मेष कोष की स्थापना 2013 में की थी। कंपनी ने इस कोष को 2015 में पांच गुणा बढ़ाकर 50 करोड़ डालर कर दिया। इसका काम नये स्टार्टअप को वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराना है।

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