भारतीय सेना के रौबीले ऑफिसर कुलमीत कैसे बने एडोब इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर

सेना के पूर्व अफसर कुलमीत से सीखिए बिजनेस के गुर...

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उनके पिता फोर्स में थे इस वजह से वो हमेशा से चाहते थे, कि उनका बेटा भी आर्मी में जाये। एनडीए अकैडमी में तीन साल बिताने के बाद उन्हें इंडियन मिलिट्री अकैडमी देहरादून में भेजा गया जहां से उन्हें सेकेंड लेफ्टिनेंट के तौर पर सेना में कमीशंड किया गया। उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 20 साल थी। वहीं उन्होंने सीखा कि किसी भी मुश्किलात का सामना सामने से करना है, पीछे से नहीं...

"मूल रूप से पंजाब के रहने वाले कुलमीत बावा ने दिल्ली से स्कूलिंग की और 16 साल की उम्र में ही घर छोड़ दिया। उसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, पुणे में दाखिला लिया। कुलमीत अभी एडोब इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर काम करते हुए कंपनी की ग्रोथ को लीड कर रहे हैं।"

सेना की नौकरी करने के बाद बिजनेस की दुनिया में कदम रखने वाले कुलमीत बावा की पर्सनैलिटी ऐसी है कि आप एक बार देखने के बाद उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। कुलमीत अभी एडोब इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर काम करते हुए कंपनी की ग्रोथ को लीड कर रहे हैं। एक निजी बातचीत में कुलमीत ने अपने ऑफिस के कोने से अपनी जिंदगी की दास्तान साझा की। मूल रूप से पंजाब के रहने वाले कुलमीत ने दिल्ली से स्कूलिंग की और 16 साल की उम्र में ही घर छोड़ दिया। उसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, पुणे में दाखिला लिया।

कुलमीत बताते हैं, 'मेरे पिता फोर्स में थे इस वजह से हमेशा से मुझे आर्मी में जाने का सपना था। एनडीए अकैडमी में तीन साल बिताने के बाद उसके बाद मुझे इंडियन मिलिट्री अकैडमी देहरादून में भेजा गया। इसके बाद मुझे सेकेंड लेफ्टिनेंट के तौर पर सेना में कमीशंड किया गया। उस वक्त मेरी उम्र 20 साल थी। एनडीए में मुझे सिखाया गया कि किसी भी मुश्किल का सामना सामने से करना है।' कुलमीत के लिए सेना की दुनिया काफी नई थी। आर्मर्ड कॉर्प्स में कमीशंड मिलने के बाद कुलमीत ने 12 साल तक अपनी सेवाएं दीं। वह गवर्नर ऑफ स्टेट को एडीसी के तौर पर सेवाएं देते रहे।

कुलमीत बीच में
कुलमीत बीच में

"कुलमीत कहते हैं कि बिना टीम के आप कोई युद्ध नहीं जीत सकते, यदि आप कोई गलती करते हैं तो पूरी टीम को उसकी सजा भुगतनी पड़ती है।"

कुलमीत ने जम्मू-कश्मीर में अपनी सेवा के कई साल बिताए। वह कहते हैं कि सेना से बेहतर लीडरशिप सिखाने वाला कोई संस्थान नहीं मिलेगा। सेना में कुलमीत को काफी कुछ सीखने को मिला। वह बताते हैं, 'मुझे ये स्वीकार करना पड़ा कि एनडीए में बिताने वाली जिंदगी काफी मुश्किलों भरी होती है। वहां रैगिंग भी होती है, लेकिन अनुशासन भी काफी ज्यादा होता है। मुझे वहां सबसे बड़ी सीख ये मिली कि कैसे टीमवर्क का सही इस्तेमाल किया जा सकता है।' वह कहते हैं कि बिना टीम के आप कोई युद्ध नहीं जीत सकते हैं। अगर आप कोई गलती करते हैं तो पूरी टीम को उसकी सजा भुगतनी पड़ती है। इसलिए एक दूसरे से अच्छी तालमेल भी बनाकर रखनी पड़ती है।

इसके लिए कई सारे समझौते भी करने पड़ते हैं। यह सीख कभी बेकार नहीं जाती और आप पूरी जिंदगी भर के लिए इसे गांठ बांधकर रख लेते हैं। इसीलिए कुलमीत इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण चीज मानते हैं।

आर्मी में रहते हुए खाली समय में कुलमीत ने कई सारी टेक्निकल स्किल भी सीखीं। उन्होंने MCSE, CCNA, CCNP और CISSP जैसे कोर्स किए। 12 साल सेना में बिताने के बाद उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया और वापस स्कूल की ओर लौट गए। यह स्कूल बिजनेस स्कूल था। उन्होंने वॉर्टन डिग्री लेने के लिए इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस का रुख किया। यहां से डिग्री लेने के बाद उन्हें यूनीलीवर और कुछ अन्य कंपनियों से नौकरी के ऑफर मिले, लेकिन आखिरी में उन्होंने सन माइक्रोसिस्टम के साथ काम करने का फैसला किया।

कुलमीत अपने परिवार के साथ
कुलमीत अपने परिवार के साथ

कुलमीत बताते हैं कि सन माइक्रोसिस्टम के प्रेसिडेंट भास्कर प्रमाणिक ने उनको कॉर्पोरेट वर्ल्ड में आने की ट्रेनिंग दी। उन्होंने 6 साल से भी ज्यादा का वक्त यहां बिताया इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट के साथ एक साल तक काम किया और उसके बाद एडोब के साथ जुड़ गए। जहां काम करते हुए उन्हें 6 साल हो चुके हैं। कुलमीत कॉर्पोरेट की दुनिया में टीमवर्क के सिद्धांत और अनुशासन के साथ काम करते हैं जोकि उन्होंने सेना में सीखा था। 

वह कहते हैं, 'मैं किसी दूसरे के काम में दखलंदाजी नहीं करता। आपको अपनी टीम पर भरोसा करना होगा और उन्हें सोचने की भी छूट देनी होगी। ताकि वे बड़ा सोच सकें। '

कुलमीत के लिए अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है। खासतौर पर जब कोई लोगों के प्रति उत्तरदायी हो। वह मानते हैं कि मजबूत टीम के आधार पर ही आप अच्छी परफॉर्मेंस दे सकते हैं। कुलमीत कहते हैं, 'जब मेरे पास कोई इंटरव्यू के लिए आता है तो मैं उस इंसान की प्रोफाइल अपने सामने नहीं रखता हूं। मैं वह नहीं देखना चाहता जो लोग दिखाना चाहते हैं। मैं तो ये देखता हूं कि उस व्यक्ति के अंदर कौन सी प्रतिभा छिपी हुई है जो हमारे काम आ सकती है। मैं देखता हूं कि व्यक्ति ने किसी जगह पर पहुंचने के लिए कितना संघर्ष किया है।

कुलमीत के मुताबिक किसी भी बिजनेस को बढ़ाना काफी चैलेंजिंग होता है, लेकिन इसमें मजा भी आता है।

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