भारत के चरणप्रीत ने यूके की शाही परेड में पगड़ी पहन रचा इतिहास

मूल रूप से भारत के पंजाब के रहने वाले 22 वर्षीय चरणप्रीत ने बकिंघम पैलेस में परंपरागत तौर पर पहनी जाने वाली बियरस्किन कैप की जगह क्यों पहनी अपनी सिख पगड़ी?

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पगड़ी पहनकर इस परेड में हिस्सा लेने वाले सिपाही का नाम चरणप्रीत सिंह लाल है। चरणप्रीत मूल रूप से भारतीय हैं और बचपन में ही वे ब्रिटेन चले गए थे। 22 वर्षीय चरणप्रीत ने बकिंघम पैलेस में परंपरागत तौर पर पहनी जाने वाली बियरस्किन कैप की जगह अपनी सिख पगड़ी ही पहनी।

चरणप्रीत सिंह लाल (तस्वीर साभार- एचटी मीडिया)
चरणप्रीत सिंह लाल (तस्वीर साभार- एचटी मीडिया)
चरणप्रीत जनवरी 2016 में ब्रिटिश सेना में नियुक्त हुए थे। मूल रूप से भारत के पंजाब के रहने वाले चरणप्रीत के माता-पिता बचपन में ही उन्हें लेकर ब्रिटेन चले गए थे।

हाल ही में ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ द्वितीय ने अपना 92वां जन्मदिन मनाया। ब्रिटिश राजशाही परिवार में मेगन मर्कले नई मेहमान बनकर आई हैं। इस मौके पर हमेशा की तरह शाही परेड का आयोजन किया गया। इस शाही परेड की खास बात ये थी कि पहली बार किसी सिख समुदाय के सिपाही ने पगड़ी पहनकर इस परेड में हिस्सा लिया था। पगड़ी पहनकर इस परेड में हिस्सा लेने वाली सिपाही का नाम चरणप्रीत सिंह लाल है। चरणप्रीत मूल रूप से भारतीय हैं और बचपन में ही वे ब्रिटेन चले गए थे। 22 वर्षीय चरणप्रीत ने बकिंघम पैलेस में परंपरागत तौर पर पहनी जाने वाली बियरस्किन कैप की जगह अपनी सिख पगड़ी ही पहनी।

शाही परेड को देखने के लिए पूरी रॉयल फैमिली मौजूद थी। परेड में शामिल होकर इतिहास रचने वाले चरणप्रीत ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि अब विभिन्न धार्मिक समुदाय से आने वाले लोगों को सेना में जगह और उचित सम्मान मिलेगा। मुझे लगता है कि लोगों ने न केवल देखा बल्कि इसे एक इतिहास के रूप में अपने मन में संजो कर रख लिया। मुझे लगता है कि सिखों के साथ ही और भी कई समुदायों के लोग सेना में जाने का फैसला लेंगे।'

चरणप्रीत जनवरी 2016 में ब्रिटिश सेना में नियुक्त हुए थे। मूल रूप से भारत के पंजाब के रहने वाले चरणप्रीत के माता-पिता बचपन में ही उन्हें लेकर ब्रिटेन चले गए थे। परेड में जहां बाकी सभी सैनिकों ने बियरस्किन वाली परंपरागत काली टोपी पहनी थी वहीं चरणप्रीत ने अपनी काली टोपी पहनी थी, जिसमें एक स्टार भी लगा था। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि ब्रिटिश सेना में पगड़ी पहनकर हिस्सा बनना मेरे लिए गौरवपूर्ण बात है। यह मेरे लिए जितना बड़ा गौरव है उम्मीद है बाकी लोग भी इससे खुश होंगे।'

उन्होंने कहा कि जब वे पास आउट हुए थे तो उनकी मां की आंखों से आंसू निकल गए थे। पता नहीं वे इस मौके पर कैसे प्रतिक्रिया देंगी। 'ट्रूपिंग द कलर' नाम से मशहूर इस जश्न की शुरुआत 1748 में हुई थी। इसे महारानी के आधिकारिक जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है। महारानी एलिजाबेथ वैसे तो बीते 21 अप्रैल को ही अपना असल जन्मदिन मनाती हैं लेकिन जनता भी महारानी के जन्मदिन का जश्न मना सके इसलिए जून के किसी भी शनिवार को यह परेड होती है। आपको बता दें कि यह समारोह 250 से भी ज्यादा वर्षों से आयोजित किया जाता रहा है। इसमें सैनिक परेड करते हुए हिस्सा लेते हैं और ड्रिल के साथ संगीत भी बजाते हैं।

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