दिल्ली के बाद अब महाराष्ट्र के रिहायशी इलाकों में भी पटाखों की बिक्री पर बैन

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महाराष्ट्र के मंत्री रामदास कदम ने पूरे राज्य में पटाखा बैन करने की मांग करने वाली याचिका दाखिल की थी। उनके याचिका दाखिल करने के बाद ही कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
 हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि पटाखे सुरक्षित स्थानों पर फोड़ने चाहिए जिससे दुर्घटना का खतरा भई कम हो जाता है। इसके अलावा पटाखा बेचने की दुकानें रिहायशी इलाकों से दूर होनी चाहिए।

हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि लाभ के लिए पटाखा बेचना गलत नहीं है। लेकिन पटाखों का बिजनेस करने वाले लोगों को सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

राजधानी दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में पटाखों पर बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने पर्यावरण के हित में सराहनीय कदम उठाते हुए दिवाली पर राज्य के रिहायशी इलाकों में पटाखों की बिक्री पर बैन लगा दिया है। एक दिन पहले ही दो बच्चों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर पहले ही रोक लगा दी गई है। मंगलवार को बॉम्बे हाइकोर्ट ने कहा कि जिन पटाखा विक्रेताओं को पहले से लाइसेंस दिए जा चुके हैं उनके लाइसेंसों को इस आदेश के बाद रद्द माना जाएगा।

महाराष्ट्र के मंत्री रामदास कदम ने पूरे राज्य में पटाखा बैन करने की मांग करने वाली याचिका दाखिल की थी। उनके याचिका दाखिल करने के बाद ही कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। शिवसेना के नेता रामदास ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, 'मैं सीएम देवेंद्र फडणनवीस से बात कर सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली में पटाखा बेचने पर बैन वाले फैसले के आधार पर पूरे माहाराष्ट्र में पटाखों पर पाबंदी लगाने की बात करूंगा।' मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में सारे त्योहार पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मनाने चाहिए और इससे प्रदूषण भी नहीं फैलना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिवाली पर जब हम पटाखे फोड़ते हैं तो इससे न केवल प्रदूषण होता है बल्कि शोर से इंसानी दिमाग पर बुरा असर भी पड़ता है।

मंत्री ने कहा कि पटाखों से होने वाले प्रदूषण से बच्चों को काफी दिक्कतें होती हैं। इसी वजह से ग्लोबल वॉर्मिंग जैसे खतरों का सामना करना पड़ता है और सूखे जैसी समस्या के लिए भी पर्यावरण के साथ होने वाली छेड़छाड़ जिम्मेदार होती है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि पटाखे सुरक्षित स्थानों पर फोड़ने चाहिए जिससे दुर्घटना का खतरा भई कम हो जाता है। इसके अलावा पटाखा बेचने की दुकानें रिहायशी इलाकों से दूर होनी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि लाभ के लिए पटाखा बेचना गलत नहीं है। लेकिन पटाखों का बिजनेस करने वाले लोगों को सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

सुनवाई करने वाली बेंच ने कहा कि हमें हमें पटाखों की वजह से हुए हादसों से सबक लेना चाहिए और भविष्य में ऐसी गलती से बचना भी होगा। कोर्ट ने मुंबई में 2016 फरवरी और केरल के कोल्लम जिले में पटाखों की वजह से भीषण हादसों का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि यह दुखद है कि भारत में जब ऐसी घटनाएं होती हैं उसके बाद ही हम सीख लेते हैं। जबकि हमें पहले से हादसों से निपटने के लिए तैयार होना पड़ेगा। इससे पहले सोमवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगा दी है। प्रदूषण की मार झेल रही दिल्ली को इस फैसले से काफी राहत मिलेगी।

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