युवा लड़कियों को साइंटिस्ट बनाने के लिए असम की प्रियंका को फ्रांस ने बनाया एम्बैस्डर

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प्रियंका ने फ्रांस की राफैल फाइटर जेट के सैटेलाइट विंग में काम किया है। यह मुबहिम 2014 में लड़कियों को साइंस की पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से की गई थी। मकसद था कि लड़कियां साइंस में रुचि दिखाएं और आगे बढ़ें। इसे फ्रांस की मिनिस्ट्री ऑफ नेशनल एजुकेशन और फ्रांस की लॉरियल फाउंडेशन द्वारा सपोर्ट मिलता है।

प्रियंका दास
प्रियंका दास
प्रियंका जिस प्रॉजेक्ट पर काम कर रही हैं वह बिना ड्राइवर की कार की टेक्नोलॉजी को और भी आगे ले जाएगा। प्रियंका जब पॉलीटेक्निक में पढ़ाई करती थीं तो उन्हें पहली बार सैफ्रन कंपनी में जाने का मौका मिला था। 

कुछ ही दिनों पहले असम की प्रियंका दास को फ्रांस में सैफ्रन कंपनी के नेविगेशन सिस्टम डिविजन में काम करने और अपनी पीएचडी पूरी करने का मौका मिला था। अब उनके कंधों पर नए पंख लग गए हैं, क्योंकि फ्रांस की सरकार ने उन्हें लड़कियों के लिए शिक्षा को बढ़ावा देने वाले अभियान का ब्रैंड ऐम्बैस्डर बना दिया था। प्रियंका ने फ्रांस की राफैल फाइटर जेट के सैटेलाइट विंग में काम किया है। यह मुबहिम 2014 में लड़कियों को साइंस की पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से की गई थी। मकसद था कि लड़कियां साइंस में रुचि दिखाएं और आगे बढ़ें। इसे फ्रांस की मिनिस्ट्री ऑफ नेशनल एजुकेशन और फ्रांस की लॉरियल फाउंडेशन द्वारा सपोर्ट मिलता है।

26 वर्षीय प्रियंका ने बताया, 'इस प्रोग्राम का हिस्सा होने के नाते हम मिडिल स्कूल और हाई स्कूल के बच्चों से मिलते हैं और उनसे बातें करते हैं। इससे हम उनके भीतर फैली गतफहमियों को दूर करते हैं क्योंकि आज भी कई लोगों को लगता है कि महिलाएं साइंटिस्ट नहीं बन सकतीं।' यह पहल लॉरियाल वूमन इन साइंस प्रोग्राम से लिंक्ड है जो हर साल यूनेस्को के सहयोग से वूमन साइंटिस्ट ऑफ द ईयर का अवॉर्ड देता है। सैफ्रन में अपने काम के बारे में बताते हुए वह कहती हैं, 'मैं एक ऐसे वैज्ञानिक पहलू पर काम कर रही हूं जिसके सहारे पोजिशनिंग को और भी अधिक प्रभावशाली और संक्षिप्त बनाया जा सके। इसे कई सेंसर में इस्तेमाल किया जा सकता है।'

प्रियंका जिस प्रॉजेक्ट पर काम कर रही हैं वह बिना ड्राइवर की कार की टेक्नोलॉजी को और भी आगे ले जाएगा। प्रियंका जब पॉलीटेक्निक में पढ़ाई करती थीं तो उन्हें पहली बार सैफ्रन कंपनी में जाने का मौका मिला था। यह विजिट दक्षिणी फ्रांस के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग स्कूल द्वारा आयोजित की गई थी। उसी वक्त प्रियंका के भीतर सैफ्रन कंपनी में काम करने की ख्वाहिश जगी थी। आज उनका सपना पूरा हो गया है और वे फ्रांस की इस नामी कंपनी में काम कर रही हैं।

सैफ्रन में काम करने के दो सालों बाद प्रियंका को सुपैरो कॉलेज में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स करने का मौका मिल गया। मास्टर्स की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सोच लिया था कि वे यहां से पीएचडी करेंगी। अच्छी बात यह रही कि सैफ्रन ने उनकी पीएचडी की भी फीस भर दी। प्रियंका ने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से फिजिक्स में बीएससी की थी। एक छोटे से शहर से निकलकर दुनिया के सबसे बड़ी फाइटर जेट बनाने वाली कंपनी में काम करना कोई छोटा हासिल नहीं है। शायद यही वजह है कि प्रियंका को फ्रांस ने लड़कियों को प्रोत्साहित करने का जिम्मा दे दिया है।

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