घर बैठे उपलब्ध करवाता ’फटाके’, स्टैंडर्ड फायरवर्क्स के साथ मिलाया हाथ

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जैसे-जैसे रोशनी का पर्व दीपावली नजदीक आता जा रहा है वैसे-वैसे ही पटाखों के निर्माता और वितरक इस अवसर के लिये अपनी तैयारियों को अमली जामा पहनाने में लगे हैं। एक तरफ जहां अधिकतर उपभोक्ताओं ने विभिन्न ई-काॅमर्स वेबसाइटों पर चल रही भारी-भरकम छूट का फायदा उठाते हुए अपनी पसंद की खास चीजों को चिन्हित कर लिया है वहीं वे इस मौके पर प्रयोग में आने वाली एक बहुत महत्वपूर्ण वस्तु को अभी तक भूले हुए हैं और वह है आतिशबाजी।

घर से बाहर निकलकर आतिशबाजी की खरीददारी करना अधिकांश उपभोक्ताओं के लिये बहुत अच्छा अनुभव नहीं रहता है। एक तो उत्सव का माहौल होने के चलते उन्हें बाजारों में बहुत भारी भीड़ की चुनौती का सामना करना पड़ता है और अधिकतर होता यह है कि उन्हें बाजार में उपलब्ध कुछ सीमित उत्पादों में से ही अपनी लिये आतिशबाजी पसंद करनी पड़ती है। इसके अलावा अधिकतर अस्थायी दुकानें चूंकि बिना लाईसेंस के संचालित हो रही होती हैं इसलिये गुणवत्ता का कोई भरोसा नहीं होता है। ऐसे में एनआरके राजरत्नम द्वारा वर्ष 1942 में स्थापित किये गये और आतिशबाजी के क्षेत्र में देश के सबसे प्रतिष्ठित ब्रांड स्टैंडर्ड फायरवक्र्स ने उपभोक्ताओं के सामने आने वाली परेशानियों का हल तलाशने और हाइपरलोकल होने के प्रयासों में कदम आगे बढ़ाते हुए फटाके (Fhatake) के साथ हाथ मिलाया है।

फटाके क्या है?

फटाके एक ऐसा मोबाइल और वेब एप्लीकेशन है जिसके माध्यम से कोई भी उपयोगकर्ता पटाखों की एक विविध श्रेणी से अपनी पसंद के पटाखों को खोज और आसानी से अपने दरवाजे तक मंगवा सकता है। इसका एक और फायदा यह होगा कि उपभोक्ता उन पटाखों का आनंद भी उठा सकेंगे जो उन्हें आसानी से बाजार में उपलब्ध नहीं होते हैं। फिलहाल ये स्टैंडर्ड फायरवक्र्स के देशभर में फैले 40 कारखानों के नेटवर्क के साथ एक विशिष्ट गठजोड़ कर पटाखों का अपना कैटालाॅग तैयार कर रहे हैं। इस उपक्रम का संचालन एक पिता-पुत्र, शंकर और निखिल गुप्ता की जोड़ी के द्वारा किया जा रहा है जो बीते 15 वर्षों सेग्रेनाइट के खनन और निर्माण के क्षेत्र में ‘रसिया’ के ब्रांड से एक सफल व्यवसाय का संचालन कर रहे हैं। निखिल अभी सिर्फ 21 वर्ष के हैं और वे जैन यूनिवर्सिटी, सेंटर फाॅर मैनेजमेंट स्टडीज़ में बीबीएम के अंतिम वर्ष के छात्र हैं।

वर्तमान में फटाके का संचालन आठ लोगों की एक टीम कर रही है जो पैकिंग से लेकर मार्केटिंग और बिक्री तक के काम को देख रहे हैं। इसके अलावा इन्होंने अर्बन पाइपर के साथ एक बेनाम तीसरे पक्ष से हाथ मिलाया है ताकि ये उनकी प्रौद्योगिकी और लाॅजिस्टिक्स का प्रयोग कर सकें। सौरभ गुप्ता द्वारा स्थापित अर्बन पाइपर हाइपरलोकल स्तर पर कई वितरण केंद्रों की स्थापना कर एसएमई को बी2सी के सक्षम बनाता है। चाय पाॅईंट, कांति स्वीट्स, कैलिफोर्निया बर्रिटो और बिग बास्केट जैसे नाम इनके उपभोक्ताओं में से कुछ हैं।

हाल ही में बैंगलोर में संचालन प्रारंभ करने के बाद फटाके पहले दिन दोपहर तीन बजे तक दिये गए सभी आर्डरों की डिलीवरी अगले दिन दोपहर तक करने का वादा करता है।

अबतक की कहानी

फटाके की टीम ने व्यापार के सभी पहलुओं के बारे में विचार करने और उन्हें अंतिम रूप देते हुए लागू करने से पहले दो महीने का समय लगाया। इन्हें प्रारंभ में यह समझ में आ गया था कि लाॅजिस्टिक्स इनके सामने आने वाली सबसे बड़ी चुनौती रहेगा क्योंकि भारतवर्ष में अधिकतर लाॅजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं के पास उपभोक्ता के दरवाजे तक पटाखे वितरित करने के लिये आवश्यक लाईसेंस इत्यादि नहीं हैं। ऐसे में अब आवश्यकता सभी कानूनी अनुमति लेने के बाद फटाके अब आग बुझाने के अलावा अन्य सभी सुरक्षा उपकरणों से पूरी तरह लैस वाहनों के माध्यम से पटाखों की डिलीवरी करेगा। इसके अलावा इन्हें सरकारी नियमों के अनुसार एक बार में सिर्फ 100 किलोग्राम आतिशबाजी ले जाने की ही छूट मिली है।

कंपनी का दावा है कि ये एप्लीकेशन और वेब के माध्यम से आॅफलाइन बाजार में बिकने वाली आतिशबाजी के मुकाबले अधिक व्यापाक विविध उत्पाद पेश कर पाएंगे और वह भी अंकित मूल्यों पर 80 प्रतिशत की लुभावनी छूट के साथ। याॅरस्टोरी से बात करते हुए निखिल कहते हैं, ‘‘इस वर्ष हम कम लाभ कमाते हुए आतिशबाजी बेच रहे हैं क्योंकि हमारा इरादा आने वाले वर्षों में पटाखों की खरीद के काम को आॅनलाइन रूप देने का है।’’

पैकेजिंग और वितरण की बात करें तो वितरण की लागत को कम करने के क्रम में फटाके मार्ग अनुकूलन तकनीक का प्रयोग करते हुए आॅर्डर मिलने के अगले दिन डिलीवरी कर रहा है। इसके अलावा ये सुरक्षा और प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिये वैक्यूम-पैक कंटेनरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। फिलहाल फटाके दो डिलीवरी केंद्रो के आसपास संचालन कर रही है और दक्षिणी बैंगलोर के जेपी नगर, जयानगर, बनेरघट्टा और केंद्रीय बैंगलोर के कोरामंगला और इंदिरानगर में आतिशबाजी पहुंचा रहे हैं। इनका इरादा उपभोक्ताओं की प्रतिक्रियाओं और मांग के आधार पर बैंगलोर के अन्य इलाकों में भी केंद्र स्थापित करने का है। फिलहाल ये सिर्फ कैश आॅन डिलीवरी के आधार पर संचालन कर रहे हैं और अपनी मोबाइल एप्प और बेब माध्यम पर व्यापार बढ़ाने के लिये आॅफलाइन और आॅनलाइन दोनों ही तरीकों का सहारा ले रहे हैं।

अर्बन पाइपर के सौरभ कहते हैं कि वे एडब्लूएस सर्वर के माध्यम से प्रौद्वोगिकी का काम संभाल रहे हें और इसी के चलते वे आर्डरों की भरी से भारी संख्या को संभालने में सक्षम हैं। वर्तमान में फटाके के लिये सबसे बड़ी चुनौती गोदामों पर लगा हुआ प्रतिबंध है। निखिल कहते हैं, ‘‘हमें शहरी सीमा क्षेत्र में आतिशबाजी जमा करने की अनुमति नहीं है इसलिये हम इन्हें शहर के बाहरी इलाकों में स्थित गोदामों में इकट्ठा करते हैं। अन्य नियामक चुनौतियों के अलावा यह एक सबसे बड़ी चुनौती है जिनके चलते अधिकतर ई-काॅमर्स खिलाड़ी इस क्षेत्र में कदम रखने से पीछे हट रहे हैं।’’

आतिशबाजी के क्षेत्र पर एक नजर

वैसे तो भारतभर में विभिन्न अवसरों के लिये आतिशबाजी की बिक्री पूरे वर्ष ही होती रहती है लेकिन अगर मात्रा के आधार पर देखें तो दीपावली सबसे बड़ा अवसर और बाजार है। निखिल का अंदाजा है कि करीब-करीब 90 प्रतिशत बिक्री दीपावली से 15 से 20 दिन पहले के दिनों में होती है।

सिर्फ भारत में ही 800 मिलियन अमरीकी डाॅलर का बाजार होने के बावजूद यह क्षेत्र बिल्कुल ही असंगठित है जबकि यह करीब 25 हजार लोगों को रोजगार प्रदान करता है। वी टू और अजंता फायरवक्र्स भी इस क्षेत्र में दूसरे स्थापित नाम हैं। भारत में निर्मित होने वाली अधिकतर आतिशबाजी तमिलनाडु के एक छोटे से क्षेत्र शिवकाशी में तैयार होती है।

एक तरफ फटाके ही आतिशबाजी उपलब्ध करवाने वाले एक इकलौते एप्प और वेब आधारित माध्यम के रूप में हमारे सामने आया इस क्षेत्र में कुछ अन्य खिलाड़ी भी सक्रिय हैं जिनमें चेन्नई आधारित क्रैकरबास्केट, तमिलनाडु में डिलीवरी करने वाला ज्यूबिलैंट क्रैकर्स और मुंबई में आधारित लवांगी हैं। इसके अलावा इस वर्ष भारतीय बाजार में चीनी पटाखों के भी प्रवेश करने की अफवाहे हैं। हालांकि निखिल इस बात को नकारते हैं और कहते हैं कि भारतीय नियम-कानून इसकी अनुमति नहीं देंगे।

भविष्य की योजनाएं

वर्तमान में फटाके का सारा ध्यान बैंगलोर पर है और उनकी योजना इस त्यौहरी मौसम में बाजार और उपभोक्ता की पसंद-नापसंद को और बेहतर तरीके से जानने-समझने की है। इसके अलावा इनका इरादा आने वाले वर्षों में देश के अन्य शहरों और क्षेत्रों में प्रवेश करने का है ताकि वे अधिक लोगों को आशिबाजी की खरीद के एक बेहतर और अनुकूलित अनुभव से रूबरू करवा सकें।

फटाके थोक के आॅर्डरों के लिये एक बिल्कुल ही अलग दाम प्रस्तुत करता है। नियमित उपभोक्ताओं के लिये ये और अधिक व्यक्तिगत विकल्पों को शामिल कर रहे हैं। निखिल कहते हैं, ‘‘आने वाले दो से तीन सप्ताहों में हमारा इरादा उपभोक्ताओं को उनकी उम्र और लिंग के आधार पर व्यक्तिगत ‘काॅम्बो पैक’ उपलब्ध करवाने का है। हो सकता है कि हमारे पास उपलब्ध उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला को देखकर अधिकतर उपभोक्ता अनिश्चितता के फेर में फंस जाते हों।

योरस्टोरी का निष्कर्ष

फटाके ने उपभोक्ताओं के सामने आने वाली वास्तविक समस्या की नब्ज को पहचाना और पकड़ा है और लगता है कि उन्होंने निष्पादन की योजनाओं में सभी पहलूओं को संबोधित किया है। लेकिन इसके बावजूद अभी भी सुधार की काफी गुंजाइश बाकी है। फटाके अपने उपभोक्ताओं को उनके मित्रों और परिजनों को ‘गिफ्ट ए बाॅक्स’ का विकल्प देता है लेकिन भुगतान के लिये सिर्फ कैश आॅन डिलीवरी का माध्यम होने के चलते यह सुविधा अपना सारा आकर्षण खो देती है।

इसके अलावा यह भी देखना काफी दिलचस्प होगा कि क्या फटाके अपने ‘काॅम्बो पैक’ को सही व्यक्तिगत माॅडल तैयार करने में सफल होगा या नहीं। इनकी मोबाइल एप्लीकेशन और वेबसाइट बहुत अच्छी तरह से डिजाइन की गई हैं और प्रयोग में आसान हैं। हाइपरलोकल के क्षेत्र में अन्य उपभोक्ताओं के साथ काम करने का अर्बन पाइपर का अनुभव भी फटाके के लिये काफी मददगार साबित होगा।

वेबसाइट

एप्प

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Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

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