कर्नाटक की आईपीएस डी. रूपा का एक और बड़ा खुलासा 

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कर्नाटक की पहली जुझारू महिला आईपीएस डी रूपा सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस महकमे के बारे में महत्वपूर्ण रायशुमारी कराने के बाद एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इससे पहले वह कई बार बड़े-बड़ो के दांत खट्टे कर चुकी हैं।

अभी इसी वर्ष मार्च 2018 में डी रूपा ने बीजेपी के राज्यसभा सदस्य राजीव चंद्रेशखर की अध्यक्षता वाले एक फाउंडेशन से 'नम्मा बेंगलूरु अवॉर्ड' लेने से इनकार कर दिया था क्योंकि इसके साथ बहुत बड़ा कैश रिवॉर्ड था।

तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता की करीबी एआईएडीएमके नेता शशिकला को जेल में वीआइपी सुविधाएं मिलने का भंडाफोड़ करने वाली एवं कर्नाटक में होम गार्ड्स, सिविल डिफेंस की कमान संभाल रहीं आईजी डी. रूपा एक बार फिर अपनी एक अलग तरह की पहल के लिए सुर्खियों में हैं। आईजी डी. रूपा सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहती हैं। हाल ही में उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से कराए एक पोल के माध्यम से पुलिस के बारे में आम लोगों की रायशुमारी कराई। उन्होंने ट्विटर पर लोगों से जानना चाहा कि अब तक कितने लोग ऐसे हैं, जो अब तक पुलिस के संपर्क में आ चुके हैं, साथ ऐसे लोगों का पुलिस के बारे में नजरिया क्या है?

डी.रूपा ने सहभागिता करने वालो को अपने ट्वीट में चार विकल्प भी दिए गए- सकारात्मक, नकारात्मक, संपर्क में कभी नहीं आए (नकारात्मक), संपर्क में कभी नहीं ( सकारात्मक)। इस पोल पर कुल 11544 लोगों के जवाब मिले। उनमें से 51 फीसद ने निगेटिव विकल्प पर वोटिंग की, अट्ठाईस फीसद ने पुलिस से अपना संपर्क सकारात्मक माना, बारह फीसद का पुलिस से संपर्क नहीं हुआ और नौ फीसद ने पुलिस संपर्क न होने के बावजूद उसके प्रति सकारात्मक धारणा का ट्विटर पर जिक्र किया। इस वोटिंग में पुलिस के बारे में लगभग एक तिहाई लोगों की धारणा खराब रही।

यूपीएससी की परीक्षा के वर्ष 2000 बैच की 43वीं रैंक हासिल करने वाली कर्नाटक की फर्स्ट लेडी आईपीएस डी. रूपा ने बड़े-बड़ों को नहीं बख्शा है। वह अपने बैच की ऐसी अकेली अधिकारी रही हैं, जिन्हें कर्नाटक कैडर मिला। यद्यपि तबादलों के रूप में उन्हें इसकी कीमतें भी चुकानी पड़ी हैं। नेताओं से टकराने के कारण अठारह वर्ष के करियर में उनका दर्जनों बार तबादला हो चुका है। वह भरतनाट्यम डांसर भी हैं। आईएएस मुनीश मौदगिल उनके पति हैं। एनपीएस हैदराबाद में प्रशिक्षणप्राप्त डी. रूपा शार्पशूटर भी हैं। शूटिंग में उन्होंने कई पदक जीते हैं। उनकी सेवाओं के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रपति के पुलिस पदक से भी नवाजा जा चुका है। पिछले साल तमिलनाडु की पूर्व स्व.मुख्यमंत्री जयललिता की करीबी शशिकला जब जेल के भीतर ठाट की सीक्रेट लाइफ जी रही थीं, इसका खुलासा करने पर डी. रूपा पर उनके सीनियर अफर ने ही 20 करोड़ रुपए का मानहानि का मुकद्दमा ठोंक दिया था।

दरअसल, डी. रूपा ने आरोप लगाया था कि शशिकला ने तत्कालीन जेल डी.जी. एच.एन. सत्यनारायण को दो करोड़ रुपए की रिश्वत देकर अपनी तरफ कर लिया था। इसके बाद जेल में शशिकला को वीवीआईपी सुविधाएं मिलने लगी थीं। वह समय समय पर अख़बारों में सामजिक विषयों पर लेख लिखती रहती हैं। इसे वह अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का एक हिस्सा मानती हैं।

वर्ष 2004 में जब डी. रूपा धारवाड़ (कर्नाटक) की एसपी थीं, एक वारंट तामील कराने के लिए वह मध्य प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती को गिरफ्तार करने चल पड़ीं लेकिन उनके भोपाल पहुंचने से पहले ही उमा भारती का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा हो चुका गया। उमा भारती के खिलाफ हुबली (कर्नाटक) से जुड़े एक मामले में गैर जमानती वारंट लंबित था। उन्होंने 15 अगस्त 1994 को हुबली के ईदगाह पर तिरंगा फहरा दिया था, जिससे जिले का सांप्रदायिक सौहार्द खतरे में पड़ गया था। स्टांप घोटाले में दोषी करार दिए जाने के बाद जेल में बंद अब्दुल करीम तेगी के बारे में भी डी.रूपा ने खुलासा किया था। उन दिनो पता चला था कि जिस करीम तेलगी के व्हीलचेयर के लिए उसे अपने साथ एक आदमी रखने की अनुमति मिली थी, वह जेल में चार लोगों से मालिश करवाता था।

अभी इसी वर्ष मार्च 2018 में डी रूपा ने बीजेपी के राज्यसभा सदस्य राजीव चंद्रेशखर की अध्यक्षता वाले एक फाउंडेशन से 'नम्मा बेंगलूरु अवॉर्ड' लेने से इनकार कर दिया था क्योंकि इसके साथ बहुत बड़ा कैश रिवॉर्ड था। उस समय भी वह बेंगलूरु की पुलिस महानिरीक्षक (होम गार्ड एंड सिविल डिफेन्स) रहीं। रूपा आला अधिकारियों और नेताओं को आवंटित अतिरिक्त सरकारी गाड़ियों के मामले में भी कड़ी कार्रवाइयां कर चुकी हैं। एक बार जब मैसूर के भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा ने आईपीएस अधिकारियों के सेंट्रल डेप्यूटेशन पर जाने की चाहत पर एक न्यूज़ स्टोरी ट्वीट की थी तो उसके जवाब में डी. रूपा ने कहा था कि 'नौकरशाही के राजनीतिकरण से लंबे अर्से में सिस्टम और समाज का भला नहीं होने वाला है।'

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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