जन्म के बाद जिसको जहर दिया गया, उसी 'कृति' ने कराया 29 बाल विवाह को निरस्त

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कृति ने 2011 में स्थापित किया ‘सारथी ट्रस्ट’...

850 से ज्यादा बाल विवाह को रोकने में रही कामयाब...


जिस समाज ने उसको जन्म लेने से पहले मारने को कहा आज वो उसी समाज की सामाजिक बुराई बाल विवाह को खत्म करने की कोशिश कर रही है। जिसको जन्म लेने के बाद मारने के लिए जहर दिया गया, वो आज बाल विवाह का शिकार हुए बच्चों को अपनी जिंदगी जीने के मौके दे रही है। राजस्थान के जोधपुर में रहने वाली 28 साल की कृति भारती बाल विवाह मुक्त राजस्थान के लिए काम कर रही हैं। वो देश की पहली महिला हैं जिन्होने साल 2012 में किसी बाल विवाह को कानूनन निरस्त कराने में सफलता हासिल की। उनकी ये उपलब्धि ‘लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस’ में तो दर्ज है ही इसके अलावा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में भी इसे शामिल किया गया है।

साल 2011 में बाल विवाह रुकवाने और उसे कानूनन निरस्त करवाने की मुहिम के लिए सारथी ट्रस्ट की स्थापना करने वाली कृति पर कई बार हमले भी हुए हैं, लेकिन उनके हौसले में कोई कमी नहीं आई है। अब तक उनकी ये संस्था 850 से ज्यादा बाल विवाह रोक चुकी है। हालांकि बाल विवाह रोकने का काम सरकार से लेकर कई स्वंय सेवी संगठन कर रहे हैं लेकिन बाल विवाह से बच्चों को बाहर निकालने का काम ‘सारथी ट्रस्ट’ अकेले कर रहा है। इसके अलावा ये संगठन बच्चों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर काम करता है। खास बात ये है कि बाल विवाह निरस्त कराने की पैरवी कृति खुद करती हैं। इसके अलावा वो बच्चों की काउंसलिंग, परिवार वालों की काउंसलिंग और जाति पंचों की काउंसलिंग भी करती हैं। इतना ही नहीं जो बच्चे इस सामाजिक बेडी से बाहर आना चाहते हैं कृति और उनकी टीम ऐसे बच्चों का पुनर्वास का जिम्मा उठाती हैं। कृति के मुताबिक “अगर कोई बाल विवाह निरस्त हो जाता है तो समाज के लोग उसे नहीं मानते ऐसे में बच्चों को उनका सम्मान दिलाना बड़ी जिम्मेदारी का काम होता है।”

भारतीय कानून के तहत कोई भी लड़का अपनी उम्र के 24 साल तक बाल विवाह निरस्त करा सकता है जबकि लड़की अपनी उम्र के 20 साल तक बाल विवाह निरस्त करा सकती है। ऐसे बच्चे बाल विवाह के तहत होने वाले शोषण से अपने को बचा सकते हैं। हालांकि ज्यादातर लोग ये समझ नहीं पाते कि तलाक और बाल विवाह का निरस्त होना दो अलग अलग चीजें हैं। बाल विवाह निरस्त होने के बाद जिस दिन से बच्चे की शादी हुई है उस दिन से लेकर केस के अंतिम दिन तक बच्चे की शादी कैंसिल हो जाती है। वो बच्चा कुवांरा ही कहलाता है। बाल विवाह को निरस्त करवाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। बावजूद बाल विवाह को निरस्त कराने के लिए ये लोग सबसे पहले बच्चे के परिवार वालों से बात करते हैं, क्योंकि एक बार अगर बच्चे के माता पिता इस चीज के लिए मान जाते हैं तो बच्चे की मुश्किल थोड़ी कम हो जाती है। इसके बाद दूसरे पक्ष को बाल विवाह निरस्त करने के लिए समझाया जाता है। सबसे ज्यादा मुश्किल जाति पंच को समझाने में आती है क्योंकि ये उनके समाज की नाक का सवाल होता है। इस काम में उनको काफी धमकियां भी मिलती हैं। कृति और उनकी टीम पर कई हमले भी हुए हैं। वो बताती हैं कि “मुझे याद नहीं है कि ऐसा कोई केस होगा जिसमें मुझे धमकियां नहीं मिली हों, लेकिन हमें बच्चों को बाहर निकालना है इसलिए ये बातें कोई मायने नहीं रखती।” इन लोगों की कोशिश होती है कि दोनों पक्ष आपसी रजामंदी से बाल विवाह को निरस्त करने के लिए तैयार हो जाएं। अगर दोनों पक्ष मान जाते हैं तो बाल विवाह जल्द निरस्त हो जाता है लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो उसमें थोड़ा ज्यादा वक्त लगता है। कृति का कहना है कि “अगर दोनों पक्ष बाल विवाह को निरस्त करने के लिए तैयार हो जाते हैं तो ज्यादा आसानी होती है। क्योंकि मैंने इसी साल 3 दिन के अंदर बाल विवाह को निरस्त कराया है।”

वहीं दूसरी ओर जब कोई बच्चा इनके पास मदद के लिए आता है तो कृति और उनकी टीम एक साथ दो मोर्चों पर काम करती है। एक ओर वो जहां बाल विवाह को निरस्त करने के लिए कानूनी लड़ाई के लिए तैयारी करते हैं तो दूसरी ओर उस बच्चे के पुनर्वास पर भी ध्यान देते हैं। इसके लिए सबसे पहले बच्चे की मूलभूत जरूरतों पर ध्यान देना होता है। इसमें बच्चे की पढ़ाई, वोकेशनल ट्रेनिंग, आजीविका, शामिल होती हैं। कृति अप्रैल, 2012 से अब तक 29 बाल विवाह निरस्त करा चुकी हैं। ये कृति की कोशिशों का ही नतीजा है कि राजस्थान ऐसा पहला राज्य है जहां सबसे ज्यादा बाल विवाह निरस्त हो रहे हैं। बाल विवाह को निरस्त करने के लिए सारथी ट्रस्ट कैम्प भी लगाता है। ये कैम्प विभिन्न आंगनवाड़ी, स्कूल, कॉलेज या सार्वजनिक स्थान पर लगाते हैं। जहां पर लोगों को ना सिर्फ जानकारी दी जाती है बल्कि ये लोग ऐसे बच्चों को पहचानने की कोशिश भी करते हैं जो बाल विवाह के शिकार होते हैं। जिसके बाद ये लोग उस बच्चे को इस बात के लिये तैयार करते हैं कि वो बाल विवाह से होने वाले नुकसान को समझे। इसके अलावा ये ट्रस्ट एक हेल्पलाइन भी चलाता है जहां पर पीड़ित बच्चे या कोई दूसरा इन तक बाल विवाह होने की जानकारी पहुंचा सकता है। इसके अलावा मीडिया के जरिये जो केस सामने आते हैं उनको देख दूसरे बच्चे जो बाल विवाह कर चुके हैं उनको यकीन हो जाता है कि उनका विवाह भी खत्म हो सकता है। जिसके बाद वो मदद के लिए इनके पास आते हैं।

कृति भले ही इतना नेक काम कर रही हों लेकिन इनका बचपन अच्छा नहीं बीता। इनके पिता डॉक्टर थे लेकिन उन्होने कृति के जन्म लेने से पहले ही उनकी मां को छोड़ दिया था। ऐसे में रिश्तेदार नहीं चाहते थे कि कृति जन्म ले और उनकी मां को दूसरी शादी करने की सलाह देते थे। जन्म लेने के बाद भी कृति की मुश्किल आसान नहीं हुई। बचपन में उनको जहर भी दिया गया, इस कारण उनकी पढ़ाई बीच में छूट गई। लेकिन इरादों की पक्की कृति आज बाल संरक्षण और सुरक्षा पर पीएचडी कर रही हैं। बाल विवाह के क्षेत्र में उनके काम को देखते हुए कृति को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार भी मिले हैं। हाल ही में उनको लंदन में वहां की सरकार और थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन ने मिलकर फैलोशिप से भी नवाजा है। आज कृति की यही इच्छा है कि समाज से बाल विवाह खत्म हो और वो सिर्फ किताबों में पढ़ा जाये कि बाल विवाह जैसी कोई चीज भी अपने वक्त में थी।


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