बाजार के हाहाकार में फंसे फेसबुक सीईओ मार्क जुकरबर्ग  

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फेसबुक के सीईओ मार्क एलियट जुकरबर्ग शेयर बाजार के हाहाकार में फंस गए हैं। आकस्मिक उठापटक में उन्हें करीब दो सौ तीस अरब रुपए का करारा धक्का लगा है। एक वक्त वह था, जब जुकरबर्ग अपने साथियों की मदद से एक छोटे से कमरे में फेसबुक का काम शुरू कर पूरी दुनिया पर छा गए थे, टाइम मैग्जीन ने उन्हें मैन ऑफ द ईयर घोषित किया था, आज उनके सितारे गर्दिश में चल रहे हैं।

मार्क जुकरबर्ग
मार्क जुकरबर्ग
इन दिनों शेयर बाजार में मची अफरातफरी में जुकरबर्ग ही नहीं, कई और दिग्गजों की भी लुटिया डूबने की सूचनाएं हैं। अमेरिका के दिग्गज निवेशक वॉरन बफेट का नेट वर्थ एक दिन में ही छह प्रतिशत कम हो गया है और उन्हें करीब तीन सौ चालीस अरब का नुकसान हुआ है। 

बाजार में जबर्दस्त उठापटक के बीच फेसबुक के सीईओ मार्क एलियट जुकरबर्ग को करीब दो सौ तीस अरब रुपए का करारा धक्का लगा है। बाजार के जानकार बता रहे हैं कि अब जुकरबर्ग के पास लगभग साढ़े चार हजार अरब की संपत्ति बची रह गई है। जुकरबर्ग ने अभी विगत दिसंबर में ही सिलिकॉन वैली चैरिटी को स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के लिए करीब सत्ताईस अरब रुपये दान कर दिए थे। जुकरबर्ग कहते हैं कि ये ऐसी दुनिया है, जिसमें हमारी पीढ़ी रोगों की रोक-थाम, शिक्षा को व्यक्ति-अनुकूल बनाकर, मजबूत समुदाय बनाकर, गरीबी कम कर, समान अधिकार मुहैया कराकर और विभिन्न देशों में समझ बढ़ाकर मानवीय क्षमता और समानता की भावना बढ़ा सकती है।

इससे पहले वर्ष 2015 में जकरबर्ग ने अपनी पहली संतान के जन्म की सार्वजनिक घोषणा के मौके पर दानवीरता का एक उदाहरण पेश करते हुए कंपनी में अपनी और अपनी पत्नी की हिस्सेदारी का 99 प्रतिशत हिस्सा दान करने का संकल्प लिया था ताकि दुनिया को अपनी बेटी मैक्सिमा और अन्य बच्चों के लिए बेहतर स्थान बनाने में सहयोग कर सकें। फेसबुक में जुकरबर्ग दंपति की 99 प्रतिशत हिस्सेदारी का बाजार मूल्य उस समय 2,925 अरब रुपए था। इन दिनो जुकरबर्ग के सितारे गर्दिश में चल रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से घरेलू शेयर बाजार में उठापटक काफी उठापटक चल रही है। वॉल स्ट्रीट से शुरू हुई गिरावट ने वैश्विक बाजारों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।

दुनियाभर के कई दिग्गजों के अरबों रुपए इसमें डूब चुके हैं। भारतीय बाजार भी बीएसई और एनएसई में हाहाकार मचा हुआ है। वर्ष 2012 में जुकरबर्ग जब 28 साल के थे, उन्होंने फेसबुक के 1.8 करोड़ शेयर दान करने की घोषणा की, जिनका मूल्य उस वक्त बाजार कीमत के हिसाब से करीब 49.88 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बराबर था। वह जकरबर्ग की ओर से दान की गई सबसे बड़ी राशि थी। उन्होंने उससे पहले न्यू यॉर्क, न्यू जर्सी और पब्लिक स्कूलों के लिए 10 करोड़ डॉलर की राशि दान कर दी थी। उससे पहले सितंबर 2017 में उन्होंने घोषणा की कि शिक्षा और हेल्थ सेक्टर के सामाजिक सहयोग के उद्देश्य 12 अरब डॉलर (करीब 778 अरब रुपये) जुटाने के लिए वह अपनी कंपनी की बड़ी हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं।

उस फंड का इस्तेमाल समाजसेवा में किया जाएगा। उस पूंजी को स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में लगाया जाएगा। उनकी योजना अगले 18 महीने में 3.5 करोड़ से 7.5 करोड़ शेयर बेचने की थी, जिसकी अनुमानित कीमत 12 अरब डॉलर बताई गई थी। सन 2014 में एक वक्त वह था, जब फेसबुक के शेयरों में भारी तेजी से जुकरबर्ग की संपत्ति दो साल से कम समय में करीब नौ खरब छब्बीस अरब 25 करोड़ रुपए बढ़ गई थी। कंपनी को मोबाइल प्लैटफार्म से होने वाली आमदनी के मद्देनजर फेसबुक के शेयरों में निवेशकों की रूचि के कारण ऐसा संभव हुआ था। आज भी फेसबुक इस्तेमाल करने वालों की दुनिया भर में सेना है।

लोग फेसबुक के शेयरों के इसलिए मालिक बनना चाहते हैं क्योंकि वे इससे खासे जुड़े हुए हैं। कई लोग तो पूरा समय फेसबुक को ही देते रहते हैं। फेसबुक ने ये माना है कि मोबाइल फोन पर इसके इस्तेमाल से उसे खासा मुनाफा हुआ है। इससे कई लोगों के मन में ये शंका है कि ऐसे प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देने-दिखाने की कितनी गुंजाइश है। आज लोग अपने समय में से लगभग एक-तिहाई इंटरनेट पर गुजारते हैं, इसलिए फेसबुक के लिए अपार अवसर मौजूद हैं।

इन दिनों शेयर बाजार में मची अफरातफरी में जुकरबर्ग ही नहीं, कई और दिग्गजों की भी लुटिया डूबने की सूचनाएं हैं। अमेरिका के दिग्गज निवेशक वॉरन बफेट का नेट वर्थ एक दिन में ही छह प्रतिशत कम हो गया है और उन्हें करीब तीन सौ चालीस अरब का नुकसान हुआ है। विश्व के सबसे अमीर ऐमजॉन सीईओ जेफ बेजॉस को भी करीब दो सौ पांच अरब रुपए का धक्का लगा है। भारत में भी कई अर्थप्रभुओं को तेज चपत लगी है। झुनझुनवाला के कुछ पोर्टफोलियोज में शामिल शेयर बत्तीस प्रतिशत तक टूट गए। ऐपटेक चौतीस प्रतिशत, प्रॉनजोन इंटू, जियोजीत फाइनैंशल सर्विसेज, एमसीएक्स और अनंत राज के शेयरों की कीमतें भी करीब सत्ताईस प्रतिशत तक ध्वस्त हो गई हैं।

इस दौरान ऑटो लाइन इंडस्ट्रीज, फेडरल बैंक और ओरियंट सीमेंट के शेयर भी लगभग चौबीस प्रतिशत तक कमजोर हुए हैं। मार्क एलियट जुकरबर्ग एक अमेरिकेन उद्यमी और सामाजिक नेट्वोर्किंग साइट फेसबुक के संस्थापक हैं। फेसबुक की सह-स्थापना उन्होंने अपने सहपाठियों के सहयोग से उन दिनो की थी, जब वे हार्वर्ड में अध्ययनरत थे। न्यूयॉर्क के यहूदी परिवार में पैदा जुकरबर्ग बचपन से ही काफी प्रतिभाशाली और बहुमुखी थे। जब वह मिडिल स्कूल में पढ़ते थे, तभी से ही कंप्यूटर प्रोग्राम विकसित करने में मज़े लिए करते थे।

फिलिप्स एक्सेटर अकादमी में भाग लेने से पहले हाई स्कूल में शास्त्रीय संगीत में जुकरबर्ग का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा था। उनका स्थानांतरण फिलिप्स एक्सेटर अकादमी में हुआ तो लेटिन में तल्लीन हो गए। उन्होंने उन दिनो अपने पिता के ऑफिस के कर्मचारियों की मदद के लिए भी एक प्रोग्राम बनाया था। उन्होंने उन्ही दिनो एक खेल रिस्क का संस्करण और सिनाप्स नामक संगीत वादक बनाया, जो सुनने वाले की आदतों को सीखने के लिए कृत्रिम बुद्धि का इस्तेमाल करता था। मैक्रोसोफ्ट और येओएल ने सिनाप्स को खरीदने और जुकरबर्ग को शांमिल करने की कोशिश की, लेकिन वह तो हार्वर्ड विश्वविद्यालय जाना चाहते थे। उस विश्वविद्यालय के ही एक कमरे से जुकरबर्ग ने फरवरी 4, 2004 को फेसबुक पर काम प्रारंभ किया था।

उनके मन में कालजयी फेसबुक का विचार फिलिप्स एक्सेटर अकादमी के दिनों से ही जमा हुआ था। उन्होंने अपने रूममेट डस्टिन मोस्कोवित्ज़ की मदद से फेसबुक के प्रति सबसे पहले स्कूलों में समर्थन जुटाया। इसके बाद वह कैलिफ़ोर्निया चले गए। वहां उन्होंने एक छोटा सा घर पट्टे पर लिया, जो उनका पहला ऑफिस बना। सबसे पीटर थिएल ने उसी साल फेसबुक कंपनी में पूँजी लगाई। 5 सितम्बर, 2006 को फेसबुक ने समाचार फीड प्रारंभ किया।

इसके दो साल बाद 24 मई, 2007 को जुकरबर्ग ने फेसबुक प्लेटफोर्म की घोषणा की। अगला पड़ाव था 23 जुलाई, 2008, जब जुकरबर्ग ने उपयोगकर्ताओं के लिए फेसबुक मंच संस्करण की घोषणा की। इसके बाद तो इस कंपनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज दुनिया में इसके असंख्य उपयोगकर्ता हैं। सन् 2010 में जुकरबर्ग जब मात्र 26 वर्ष के थे, अमरीकी पत्रिका टाइम ने उनको उस वर्ष का 'पर्सन ऑफ द ईयर' घोषित किया था।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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