33 साल की अर्पिता खदारिया ने तीन साल में तीन स्टार्टअप की बनी संस्थापक

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भारत आज उद्यमशीलता और स्टार्टअप के दौर से गुजर रहा है और महिलाएं भी इस क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं इन्हीं महिलाओं में से एक हैं अर्पिता खदारिया। आज से 4 साल पहले तक अर्पिता बड़ी कम्पनियों की ब्रांड मैनेजर थीं। टीएपीएमआई से एमबीए करने के बाद वह फास्ट ट्रैक और टाईटन जैसी बड़ी कम्पनियों के साथ जुड़कर उन्होने सफलता की सीढ़ियां चढ़ी। आज वह 3 अलग अलग स्टार्टअप की संस्थापक हैं। जीवन को हास्यास्पद बताने वाली अर्पिता का कहना है कि हमें नहीं पता होता कि जिंदगी हमें किस मोड़ में ले जाएगी। अर्पिता के ऐप ‘साइंटिश्ट’ का चयन भारत की ओर से मोबाईल प्रिमियर अवार्ड के लिए हुआ है। जिसको लेकर वो बहुत ही उत्साहित हैं। ये एवार्ड इस महिने के अन्त में बार्सिलोना में दिये जाएंगें।

‘साइंटिश्ट’ को अर्पिता की गेम और ऐप बनाने वाली कंपनी ‘बैजरक’ ने विकसित किया है, यह एक तार्किक गेम है। ‘साइंटिश्ट’ को बनाने का आईडिया उन्हें एक दिन टी 9 फोन को इस्तेमाल करते समय आया, जब उन्होने देखा कि एक की को बार बार दबाने पर अलग अलग शब्द आते हैं और उसी की को जब उल्टा दबाते हैं तो वह एक गेम का पैर्टन बन जाता है। इससे वह आश्चर्यचकित हो गयी। तव उन्होने कॉपीराइट के लिए 135 देशों में आवेदन किया जिसके बाद वो बहुत ही रोमांचित थी।

उन्होने अप्रैल 2015 में फ्लिपकार्ट के प्लेटफॉर्म पर इस गेम पजल बुक को लांच कर दिया। बिना किसी प्रचार प्रसार के ही इस पजल बुक को लोगों की बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली और उन्होने इसकी डेढ़ लाख प्रतियां बेच दीं। अर्पिता ने देखा की उनकी 80 प्रतिशत ब्रिकी उन स्टालों पर हुई जो उन्होने लगाई थीं।

तब उन्होने इस ऐप के एंड्राइड वर्जन को दिसंबर 2015 में लांच कर दिया और जनवरी 2016 में इसका आईओएस वर्जन भी लांच कर दिया। अर्पिता का कहना है कि इस गेम का इस्तेमाल बच्चों की तर्क शक्ति बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। फिलहाल वो विभिन्न समाचार पत्रों से बातचीत कर रही हैं ताकि वो एक खेल को क्रॉसवर्ड के तौर पर पेश करें। साथ ही उनके इस गेम को फेसबुक स्टार्ट बुकस्टैप ट्रैक प्रोग्राम के तहत सूचीबद्ध किया गया है जिसमें विजेता को 30 हजार डालर का इनाम दिया जाएगा।

बैजरक 4 सदस्यीय इन हाउस टीम है। ‘साइंटिश्ट’ की रेटिंग एंड्राइड में 4.6 है। एप्पल ने 12 देशों में सबसे अच्छे नये गेम के रूप में इसे प्रसारित किया है। अब तक इस गेम के 25 हजार डाउनलोड हो चुके हैं ‘साइंटिश्ट’ ने इसका प्रचार एक टैग लाइन “दिमाग की बत्ती जला दे” से किया है। अर्पिता इस बात को बखूबी जानती हैं कि किसी भी कंपनी के प्रचार प्रसार में विज्ञापन का बहुत योगदान होता है क्योंकि उन्होने भी अपने काम की शुरूआत एक विज्ञापन एंजेसी मैकेन एरिकसन से की थी। बोझिल वातावरण और असहयोगी बॉस के कारण उन्होने 2012 में अपनी नौकरी छोड़ दी। मारवाड़ी परिवार की होने के कारण कारोबार उनके खून में ही था। अपने पति प्रोमित और दोस्तों के सहयोग से उन्होने जिंदगी की एक नई शुरूआत की।

जब आप नीचे गिरते हो तभी ऊपर उठने का रास्ता मिलता है।

‘बेअरफुट’ की स्थापना सितंबर 2012 में हुई थी, अर्पिता के मुताबिक ये उनके करियर की शुरूआत थी। बेअरफुट स्टार्टअप के लिए एक ब्रांड कंसल्टेंसी फर्म है। यह उन बड़ी कंपनियों के बांडों का प्रचार व प्रसार करती है जो कि इन्हें हायर करते हैं, लेकिन नई कंपनियां जो अपने ब्रांड का प्रचार प्रसार अधिक रेट की वजह से नहीं कर पाती ये उन कंपनियों को मुनासिब रेट पर परामर्श सेवाएं देते हैं। अर्पिता अपने ग्राहकों को अच्छी सेवा प्रदान करने के लिए एक समय में 5 या 6 ग्राहकों का ही काम लेती हैं जिससे की वे उनके काम पर ज्यादा ध्यान दे सकें। इस समय बेअरफुट के पास आर्य फर्म, असेट्ज ग्रुप, लोवेट्रेक्ट्स के ग्राहक हैं। इस काम को देखने के लिए बेअरफुट में 4 सदस्य हैं, साथ ही डिजाइन की जरूरत को संभालने के लिए इन्होने 15 फ्रीलांसर भी रखे हैं।

अर्पिता अपने काम में सामंजस्य बैठाना बखूबी जानती हैं, उन्हें घूमना बहुत पसंद है। छुट्टियों में बिताये हुए पलों को वह डायरी में सजों कर रखती हैं और उन्होने बहुत ही खूबसूरती से इन पलों को अपने ट्रैवल ब्लॉग में रिकार्ड किया है। जनवरी 2016 में उन्होने बिना किसी फायदे के लिए एक स्टार्टअप ‘गिव फ्रीली’ शुरू किया है। उनका कहना है कि एनजीओ और धर्मार्थ सेवाओं के लोग अक्सर दान से मिलने वाले पैसे का दुरूपयोग ही करते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एक विचार आया कि क्यों ना पैसे की जगह पर लोगों से सामान और वस्तुएं ली जाएं। उन्होने एक ऐसा प्लेटर्फाम वनाया जिसमें कोई भी व्यक्ति 20 किलो चावल, आटा या फर्नीचर कुछ भी दान दे सकता है। इसके अतिरिक्त वह वेब और सोशल मीडिया के माध्यम से भी ऐसे एनजीओ से संपर्क बनाकर उनको अपने साथ जोड़ती हैं। हाल ही चैन्नई में आई भीषण बाढ़ में वहां के लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बहुत ही कम समय में लोगों तक मदद पहुंचाई। अर्पिता ने इस काम को अपने बचत के पैसे लगाकर किया। उन्हें उम्मीद है कि बड़ी संस्थाएं उनके धर्मार्थ स्टार्टअप के लिए काम करेंगी। यह उनके सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी) प्रोग्राम के तहत होगा।

सफलता का मंत्र

अर्पिता रिचर्ड ब्रैनसन की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं, उनका कहना है कि उन्होंने अभी बस शुरूआत की है वह चाहती हैं कि उन्हें एक सफल उद्यमी के रूप में जाना जाये। उनके जीवन का सिद्धांत है कि ‘बड़ा सोचो और काम की शुरूआत हमेशा छोटे से करो।’ उनका कहना है कि छोटे काम में धैर्य की बहुत जरूरत होती है इससे गलतियां कम होती हैं। जिससे सफल होने के मौके बढ़ जाते हैं। उनका मानना है कि जीवन में सफलता से जरूरी है कि आप जो भी काम करें वो सही हो। उन्होने अपने कर्मचारियों, वेंडर और ग्राहकों के बीच बहुत ही अच्छा संबंध बना कर रखा है। कई बार जब वह बड़े संगठनों के साथ डील कर रही थीं तब भी उन्होने इस बात का ध्यान रखा कि कोई भी डील बैअरफुट के सिद्धांतों के खिलाफ न हों। अर्पिता कहती हैं कि किसी भी काम में टिके रहने के लिए मेहनत और सच्चाई ही काम आती है, सफलता का कोई भी शार्टकर्ट नही होता।

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