कमरे से शुरू हुआ फैशन का कारोबार, आज दो मंजिला इमारत में चल रहा है

कपड़े और ऐक्सेसरीज़ का है ऑनलाइन कारोबरसाल भर पहले शुरू किया था व्यापार50 लोगों की प्रतिभाशाली टीम

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देश में ऑनलाइन शॉपिंग तेजी से पॉपुलर हो रही है, हैरत की बात है ये है कि खरीदारों की सूची में महिलाओं की संख्या अच्छी खासी हैं। जून, 2013 में गूगल ने बताया कि करीब 60 मिलियन महिलाएं अपने रोज मर्रा के काम में इंटरनेट का इस्तेमाल करती हैं। इनमें से ज्यादातर महिलाएं अपने लिए कपड़े और ऐक्सेसरीज़ ऑनलाइन खरीदना ज्यादा पसंद करती हैं। इसकी एक वजह ये भी है कि देश में बढ़ता मीडिल क्लास और विदेश निवेश ने महिलाओं की क्रय शक्ति को बढ़ा दिया है। महिलाओं के इसी रूझान को देखते हुए अर्जुन और हर्ष सेठ ने मिलकर Miladyavenue.com की शुरूआत की। ये ईटेल स्टोर महिलाओं को उनके मन मुताबिक कपड़े मनचाहे दामों पर उपलब्ध कराता है।

ये ईटेल स्टोर खासतौर से उन महिलाओं को ध्यान में रख कर शुरू किया गया है जो फैशन परस्त हैं। ये स्टोर महिलाओं को ना सिर्फ कपड़े, बल्कि ऐक्सेसरीज़ और जूते चप्पल भी मुहैया कराता है। इस ऑनलाइन साइट की शुरूआत बेहद कम बजट में हुई थी। पिछले साल शुरू हुई इस वेबसाइट को एक छोटे से कमरे में दो कम्प्यूटर की मदद से शुरू किया गया था। जो अब बढ़कर दो मंजिला इमारत में शिफ्ट हो गया है साथ ही इस बेवसाइट के साथ 50 से ज्यादा लोगों की एक मजबूत टीम जुड़ी है। अपने शुरूआती दिनों के बारे में अर्जुन बताते हैं कि "शुरूआत में हफ्तों तक हम एक भी चीज नहीं बेच पाए थे, तब एक दिन मुंबई से उनको पहला ऑर्डर मिला और उसके बाद हमने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हम जानते थे कि ई-कॉमर्स में अपनी कड़ी मेहनत के बल पर हम अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।"

अर्जुन में फैशन को लेकर जुनून है और इससे पहले वो Forever 21 में भी काम कर चुके थे। जबकि हर्ष को कपड़ों की बिक्री के क्षेत्र में अच्छा खासा अनुभव रखते हैं।

दूसरों से अलग

अर्जुन के मुताबिक "हमारे बनाए कपडो़ं में मौलिकता और तकनीक का समावेश है यही वजह है कि फैशन वर्ल्ड में हमारे बनाये कपड़े दूसरे ब्रांड के मुकाबले अच्छे दामों पर मिलते हैं। इतना ही नहीं हमारे कपड़े फैशन वर्ल्ड में चल रहे ट्रेंड को ध्यान में रख कर तैयार किये जाते हैं।" बात जब कपड़ों या ऐक्सेसरीज़ की फिटिंग की हो, तो जब तक इसका अनुभव नहीं किया जा सकता तब तक ये पता नहीं चलता की वो चीज पहनने के बाद कैसी लगेगी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अर्जुन का कहना है कि "हम अपने ग्राहकों को कई विकल्प देते हैं। इसके लिए हम उत्पाद की कई तरह फोटो अपलोड करते हैं ये फोटो अलग अलग एंगल से खींचे गए होते हैं इसके अलावा हम ग्राहकों को साइज चार्ट भी उपलब्ध कराते हैं ताकि वो ये अच्छी तरह से जान सकें कि वो उत्पाद उन पर कैसा दिखेगा।"

ऑनलाइन बिजनेस के बाजार में इन लोगों को थोड़ी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है और इसकी वजह है अलग अलग राज्यों में पड़ने वाला टैक्स। हर्ष के मुताबिक "अगर जीएसटी बिल पास हो जाता है। इससे वो तमाम तरह के लगने वाले अप्रत्यक्ष कर से बच जाएंगे। साथ ही ये सप्लाई चैन के लिए भी फायदेमंद होगा।" यही वजह है कि टैक्स का भार उत्पाद की लागत और सेवा में खर्च को बढ़ाता है जिसका भार ग्राहक को उठाना पड़ता है। Miladyavenue.com इस वक्त कई बडे नामचीन लेबल के साथ अपनी बातचीत के अंतिम चरण है और इसकी योजना हर महिने 8 से 10 ब्रांड को लांच करने की है। इसके अलावा कोशिश है कि इस उद्यम को बढ़ाने के लिए धन जुटाने की। इस मामले में हर्ष का कहना है कि "ये जरूरी है कि निवेश के लिए वित्तिय संसाधनों का इस्तेमाल किया जाए है, बावजूद हमें परिचालन लागत को बनाए रखने के लिए पर्याप्त आय की भी जरूरत होती है।"