किसान के बेटे ने IIT से पढ़ाई कर शुरू किया स्टार्टअप, मौसम और बीमारियों से फसल को करेगा सुरक्षित

किसान का बेटा आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से कर रहा है किसानों की राह आसान...

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फ़सल, एक आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस आधारित आईओटी प्लेटफ़ॉर्म है। खेती करने का वाले समुदायों का एक बड़ा प्रतिशत ऐसा है, जो फ़सल या उत्पादन से जुड़े सही और उपयुक्त निर्णय में लेने में असमर्थ है और सहयोग के अभाव में जी रहा है।

आनंद वर्मा
आनंद वर्मा
बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप 'फ़सल', आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की तकनीक की मदद से किसानों की राह आसान करने का काम कर रहा है। इस स्टार्टअप की शुरूआत इसी साल, जनवरी से हुई है।

स्टार्टअप: फ़सल
फ़ाउंडर्स: आनंद वर्मा और शैलेंद्र तिवारी
शुरूआत: जनवरी, 2018
जगह: बेंगलुरु
काम: आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस आधारित IoT प्लेटफ़ॉर्म, जो खेती से जुड़े लोगों को बेहतर से बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद करता है।
सेक्टर: ऐग्रिटेक
फ़ंडिंग: दोस्तों और परिवार की मदद सेः 45,000 डॉलर्स, Zeroth.ai से प्री-सीड फ़ंडिंगः 120,000 डॉलर्स

खेती, एक ऐसा व्यवसाय है, जो बेहद लंबे समय से चला आ रहा है और इसने परिवर्तन के कई दौर देखे हैं। समय के साथ-साथ तकनीक और तरीक़ों में भी बड़े बदलाव हुए हैं। किसानों ने बदलते वक़्त के साथ अपनी कार्यप्रणाली को बेहतर उत्पादन के अनुकूल बनाया है। इसके बावजूद, मौसम और पर्यावरण की बढ़ती अनियमितताओं के बीच, परंपरागत रूप से खेती से जुड़े इन किसानों को भी एक तकनीकी सहयोग और सही मार्गदर्शन की ज़रूरत है। बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप 'फ़सल', आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की तकनीक की मदद से किसानों की राह आसान करने का काम कर रहा है। इस स्टार्टअप की शुरूआत इसी साल, जनवरी से हुई है।

फ़सल, एक आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस आधारित आईओटी प्लेटफ़ॉर्म है। खेती करने का वाले समुदायों का एक बड़ा प्रतिशत ऐसा है, जो फ़सल या उत्पादन से जुड़े सही और उपयुक्त निर्णय में लेने में असमर्थ है और सहयोग के अभाव में जी रहा है। फ़सल स्टार्टअप, परंपरागत खेती की अंदाज़े पर चलने वाली कार्यप्रणाली को ख़त्म करने का काम कर रहा है।

फ़सल के को-फ़ाउंडर, 28 वर्षीय आनंद वर्मा कहते हैं कि किसानों से बातचीत के दौरान उन्होंने पाया कि संसाधनों का ठीक तरह से इस्तेमाल न कर पाना, एक बहुत ही आम मसला बन चुका है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, फ़सल में कीड़े आदि लग जाना भी किसानों के लिए चिंता का एक बड़ा सबब है। आनंद कहते हैं कि किसानों के सामने आने वाली इन चुनौतियों को दूर करने के लिए फ़सल स्टार्टअप, फ़सल में लगने वाली बीमारियों का पहले से पता लगा लेता है और किसान समय पर इलाज करके अपनी फ़सल को बचा सकते हैं।

आनंद, ख़ुद एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह वाराणसी के नज़दीक आज़मगढ़ ज़िले के रहने वाले हैं। आनंद बताते हैं कि उन्होंने अपने पिता को भी इन्हीं आम समस्याओं से जूझते हुए देखा था। आईआईआईटी बेंगलुरु से ग्रैजुएशन करने के बाद उन्होंने 5 साल आईटी सॉफ़्टवेयर इंडस्ट्री में काम किया। इस दौरान ही उन्हें ऐहसास हुआ कि वह फ़सल के लिए मौसम और बीमारियों के अनुमान की चुनौती को आईओटी और मशीन लर्निंग के माध्यम से ख़त्म कर सकते हैं।

आनंद ने अपने इस आइडिया के साथ शैलेंद्र तिवारी को जोड़ा, जो फ़सल स्टार्टअप के को-फ़ाउंडर हैं। 27 वर्षीय शैलेंद्र, प्रोडक्ट मैनेजमेंट बैकग्राउंड से आते हैं। उन्होंने नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ैशन टेक्नॉलजी से इंडस्ट्रियल इंजिनियरिंग में ग्रैजुएशन किया है। आनंद ने बताया कि भारत से सबसे बड़े वाइनयार्ड्स में से एक ग्रोवर-ज़ांपा, उनके फ़सल स्टार्टअप का कस्टमर है।

फ़सल स्टार्टअप की उपयोगिता और प्रभाविता के संदर्भ में बात करते हुए आनंद, दुर्ग के एक किसान की कहानी का उदाहरण देते हैं। उन्होंने बताया कि दुर्ग में बड़े स्तर पर खेती का उत्पादन करने वाला एक किसान, सिंचाई के लिए अपने खेत में आवश्यकता से अधिक पानी का इस्तेमाल कर रहा था, जबकि उसके इलाके में पानी की ख़ासी कमी थी। फ़सल की मदद से किसान के खेत में पानी की खपत 50 प्रतिशत तक कम हुई। ज़मीनी स्तर पर किसानों की मदद करने में फ़सल की उपयोगिता और सफलता पर आनंद ख़ुशी ज़ाहिर करते हैं।

फसल की टीम
फसल की टीम

आनंद ने जानकारी दी कि आईओटी का इस्तेमाल खेतों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल माइक्रोक्लाइमेट वेदर प्रेडिक्शन (मौसम से जुड़े अनुमान आदि), आशंकित बीमारियों का पहले से पता लगाने और पेस्ट प्रेडिक्शन में किया जाता है।

ग्रैजुएशन के समय से ही आनंद, खेतों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग पर काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्होंने कई तकनीकी प्रयोग किए, लेकिन कोई भी एक संपूर्ण और प्रभावी प्रोडक्ट का रूप नहीं ले सका। आजीविका की ज़रूरतों के चलते वह आईटी इंडस्ट्री में काम करते रहे। जैसे ही उन्हें लगा कि अब आर्थिक रूप से वह एक स्थाई जीवन जी सकते हैं, उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने आइडिया को ही बड़ा रूप देने का फ़ैसला लिया।

आनंद ने बताया कि उनका भाई अर्पित और उनके दोस्त आदर्श, फॉसबाइट्स नाम से एक मीडिया स्टार्टअप चलाते हैं और उन्हीं की मदद से आनंद को अपने स्टार्टअप के लिए शुरूआती फ़ंडिंग मिली। इसके बाद आनंद के बैचमेट वैभव ने उनके स्टार्टअप में निवेश किया। आनंद ने बताया कि सिर्फ़ 3 महीनों में उन्होंने फ़सल के लिए 6 लोगों की टीम तैयार कर ली।

फ़सल के दो फ़ाउंडर्स लगातार एक बड़ी प्री-सीड फ़ंडिंग के जुगाड़ में लगे हुए थे। आनंद ने कहा, "हम चाहते थे कि हमारी कंपनी को Zeroth.ai का सहयोग मिले, क्योंकि यह कंपनी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एशिया में एक बड़ा मुकाम रखती है और यह कंपनी पहले भी भारत में कुछ एआई स्टार्टअप्स को फ़ंडिंग दे चुकी है। जेरॉथ की मदद से फ़सल स्टार्टअप को 120,000 डॉलर की फ़ंडिंग मिली।

फ़सल स्टार्टअप, अपनी सेवाओं के लिए लगभग न के बराबर मासिक सब्सक्रिप्शन फ़ीस लेता है। फ़सल स्टार्टअप, अपने उपभोक्ताओं से किसी भी तरह का डिपॉज़िट नहीं लेता है। बड़े स्तर पर या संस्थागत खेती से जुड़े किसानों के लिए फ़सल स्टार्टअप, आईओटी डिवाइस की सुविधा देता है और बेहद किफ़ायती दर पर सॉफ़्टवेयर का सब्सक्रिप्शन देता है।

आनंद ने बताया, "हम कर्नाटक, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 6 पायलट प्रोजेक्ट्स चला रहे हैं। फ़रवरी से हमने अपना पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल शुरू किया था। फ़िलहाल, हमारे पास तीन सब्सक्रिप्शन्स से पैसा आ रहा है। आने वाले तीन महीनों में 10-20 सब्सक्रिप्शन बढ़ाने की योजना है।" बीआईएस रिसर्च के मुताबिक़, 2022 तक प्रिसिज़न ऐग्रीकल्चर का ग्लोबल मार्केट 6.34 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है और 2015-2022 के बीच इसकी कम्पाउंड ऐनुअल ग्रोथ 13.09 प्रतिशत की रहने की संभावना है।

आनंद ने बताया कि उनकी कंपनी के सामने अपने ऑपरेशन्स को मैनेज करने की सबसे बड़ी चुनौती थी। उन्होंने बताया कि कंपनी तीन अलग-अलग राज्यों में काम कर रही है और और किसानों को इस तकनीक के बारे में समझाना काफ़ी मुश्किल होता है। फ़सल ने डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स बनाए हैं और ऑपरेशनल मैनेजमेंट के लिए प्रोडक्ट इंजीनियर्स नियुक्त किए हैं।

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