केरल का अनोखा रेस्टोरेंट: दिन में फ्री खाना और रात में पढ़ने के लिए किताबें

आज के दौर में क्या आप बिना पैसे के किसी रेस्टोरेंट में खाने की सोच सकते हैं? आप कल्पना भी नहीं कर सकते। लेकिन केरल के 'अंजप्पम' ट्रस्ट के बारे में सुनकर आप चौंक जाएंगे... 

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केरल में ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे एक रेस्टोरेंट में ऐसी सुविधा है कि वहां पर फ्री में खाना खिलाया जाता है और रात में यह रेस्टोरेंट लाइब्रेरी में बदल जाता है। केरल में अभी यह रेस्टोरेंट रन्नी और कोझेंचेरी में चल रहा है। इसके अंदर एक बॉक्स लगा हुआ है जिसमें लोग अपनी स्वैच्छा से पैसे डाल सकते हैं।

अंजप्पम रेस्टोरेंट
अंजप्पम रेस्टोरेंट
 इलाके के कई और लोग भी रेस्टोरेंट को चलाने के लिए डोनेशन देते हैं। कई लोग बिना किसी पैसे को रेस्टोरेंट में काम कर रहे हैं। यहां पर एक 'अप्पाकुट्टू' के नाम से कम्यूनिटी भी बनी है जिसके लोग ट्रस्ट को चलाने में मदद करते हैं। 

आज के दौर में क्या आप बिना पैसे के किसी रेस्टोरेंट में खाने की सोच सकते हैं? आप कल्पना भी नहीं कर सकते। लेकिन केरल के 'अंजप्पम' ट्रस्ट के बारे में सुनकर आप चौंक जाएंगे। केरल में इस ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे रेस्टोरेंट में ऐसी सुविधा है कि वहां पर फ्री में खाना खिलाया जाता है और रात में यह रेस्टोरेंट लाइब्रेरी में बदल जाता है। केरल में अभी यह रेस्टोरेंट रन्नी और कोझेंचेरी में चल रहा है। इसके अंदर एक बॉक्स लगा हुआ है जिसमें लोग अपनी स्वैच्छा से पैसे डाल सकते हैं।

अंजप्पम की परिकल्पना चर्च में फादर बॉबी जोस ने की थी। वह एक लेखक भी हैं। अंजप्पम ट्रस्ट के पीआरओ लुइस अब्राहम ने कहा, 'इसे शुरू करने का सबसे पहला उद्देश्य भूखे लोगों को सम्मान के साथ भोजन देना था। हमने शुरू में नाश्ते और खाने के लिए 15 और 25 रुपये का दाम तय किया था, लेकिन हम किसी से पैसे मांगते नहीं हैं। जिसका मन करता है वो रेस्टोरेंट में लगे हुए बॉक्स में पैसे डाल देता है।' कई सारे मौकों पर यहां खाना बनता है और बाहर जरूरतमंदों को बांटा भी जाता है।

इस ट्रस्ट में 10 लोग काम करते हैं। अंजप्पम का लक्ष्य हर भूखे इंसान को भोजन प्रदान करना है। लुईस ने कहा, 'हम यहां सिर्फ शाकाहारी खाना उपलब्ध करवाते हैं। हम यह भी सुनिश्चित करते हैं कि जो सब्जियां लाई जा रही हैं वो आसपास ही उगाई गई हैं। ये पूरी तरह से जैविक होती हैं और इसमें किसी तरह का कीटनाशक या रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं होता है। इससे लोगों का पेट तो भरता ही है साथ ही उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।'

फादर बॉबी जोस 
फादर बॉबी जोस 

लुईस ने बताया कि इलाके के कई और लोग भी रेस्टोरेंट को चलाने के लिए डोनेशन देते हैं। कई लोग बिना किसी पैसे को रेस्टोरेंट में काम कर रहे हैं। यहां पर एक 'अप्पाकुट्टू' के नाम से कम्यूनिटी भी बनी है जिसके लोग ट्रस्ट को चलाने में मदद करते हैं। खाना खिलाने के साथ-साथ ट्रस्ट के लोग पढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित करते हैं। शाम 6 बजे तक रेस्टोरेंट में खाना मिलता है वहीं उसके बाद यह लाइब्रेरी में बदलजाता है। जिसका भी मन करता है वो यहां आता है और अपनी पसंद की किताबें पढ़ता है। रन्नी में जो रेस्टोरेंट है वहां पर बुक स्टाल भी है। इसके अलावा यह ट्रस्ट बच्चों की काउंसिलिंग भी करता है और कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन करता है।

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