चायवाले की बेटी उड़ाएगी फाइटर प्लेन, एयरफोर्स के ऑपरेशन से ली प्रेरणा

राहत एवं बचाव अभियान से प्रेरित हो चायवाले की बेटी जुड़ रही है इंडियन एयरफोर्स से

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 आंचल उन 22 स्टूडेंट्स में एक है जिन्हें इस बार इंडियन एयरफोर्स के फ्लाइंग ब्रांच में चयनित किया गया है। इतना ही नहीं वह पहली ऐसी लड़की है जिसे इंडियन एयरफोर्स के फ्लाइंग ब्रांच में सेलेक्ट किया गया है।

आंचल गंगवाल
आंचल गंगवाल
 उन्होंने लेबर इंस्पेक्टर की परीक्षा भी क्वॉलिफाई कर ली थी और इन दिनों वे ट्रेनिंग कर रही थीं। साथ ही आंचल का यह सोचना था कि अगर वे इस नौकरी में रहेंगी तो उन्हें पढ़ने का वक्त नहीं मिलेगा और एय़रफोर्स में जाने का उनका सपना शायद पूरा भी नहीं हो पाएगा।

24 साल की आंचल गंगवाल उत्तराखंड आपदा के वक्त भारतीय वायुसेना द्वारा चलाए गए राहत एवं बचाव अभियान से प्रेरित हुई थीं और भारतीय सेना में जाने का फैसला कर लिया था। अब उनका सपना सच होने के बिलकुल करीब है। आंचल उन 22 स्टूडेंट्स में एक है जिन्हें इस बार इंडियन एयरफोर्स के फ्लाइंग ब्रांच में चयनित किया गया है। इतना ही नहीं वह पहली ऐसी लड़की है जिसे इंडियन एयरफोर्स के फ्लाइंग ब्रांच में सेलेक्ट किया गया है। आंचल की सफलता इस वजह से भी मायने रखती है क्योंकि वे एक अत्यंत साधारण परिवार से आती हैं और उनके पिता एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते हैं।

दृढ़ निश्चयी आंचल ने स्कूल के वक्त ही सोच लिया था कि वह सैन्य बल का हिस्सा बनेंगी। उन्होंने उत्तराखंड आपदा के दौरान भारतीय सेना द्वारा चलाए गए राहत एवं बचाव अभियान से प्रेरणा ली। वह कहती हैं, '2013 में जब उत्तराखंड में बाढ़ आई थी तो मैं 12वीं क्लास में थी। मैंने भारतीय सेना द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में पढ़ा और सुना। इस चीज ने मुझे काफी प्रेरित किया और मैंने फैसला कर लिया कि मैं सेना में ही जाऊंगी।' हालांकि आंचल के घर की माली हालत कुछ अच्छी नहीं थी। लेकिन वह स्कूल के वक्त से ही मेधावी छात्रा थीं और स्कूल की कैप्टन भी।

स्कूल से निकलने के बाद उन्हें स्कॉलरशिप मिली और वे पढ़ने के लिए उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी चली आईं। लेकिन पारिवारिक हालात की वजहों से वे कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ वे अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रही थीं। उन्होंने लेबर इंस्पेक्टर की परीक्षा भी क्वॉलिफाई कर ली थी और इन दिनों वे ट्रेनिंग कर रही थीं। साथ ही आंचल का यह सोचना था कि अगर वे इस नौकरी में रहेंगी तो उन्हें पढ़ने का वक्त नहीं मिलेगा और एय़रफोर्स में जाने का उनका सपना शायद पूरा भी नहीं हो पाएगा।

आंचल लगातार एयरफोर्स के लिए तैयारी करने में लगी थीं और एग्जाम भी देती थीं। एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट को क्वॉलिफाई करना कतई आसान नहीं होता है। आंचल ने पांच बार यह एग्जाम दिया औऱ इंटरव्यू तक पहुंचीं। लेकिन उनका सेलेक्शन नहीं होता था। यह उनका छठा प्रयास था और इस प्रयास में उन्होंने बाजी मार ही ली। रिपोर्ट के मुताबिक इस बार इस परीक्षा में लगभग 6 लाख अभ्यर्थियों में हिस्सा लिया था।

आंचल के पिता सुरेश अग्रवाल नीमच जिले में ही चाय बेचते हैं। वे कहते हैं कि आर्थिक स्थिति की वजह से कभी उनके बच्चों की पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं आई। आंचल की मां कहती हैं, 'साथ हमने दिया, मेहनत उसने की। उसके पापा ने भी काफी तकलीफ उठाई। वे सुबह पांच बजे तड़के उठते थे और देर रात को घर आते थे। सिर्फ अपनी बेटी की पढ़ाई पूरी करवाने के लिए वे इतनी मेहनत करते हैं।' आंचल के घर इन दिनों बधाई देने वालों की लाइन लगी हुई है। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्वीट कर आंचल को इस सफलता की बधाई और भविष्य की शुभकामनाएं दीं। इसी महीने के 30 जून से आंचल हैदराबाद के डुंडीगुल से एक साल की ट्रेनिंग पर जाएंगी।

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