काॅलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ी और कम उम्र में उद्यमिता के क्षेत्र में सरताज बने आनंद नाइक

मात्र कुछ अंकों से अपनी पसंद के इंजीनियरिंग काॅलेज में दाखिला न मिलने के बाद पढ़ाई छोड़ने का लिया फैसला18 की उम्र में अपने गृहनगर हुबली वापस लौटकर बोर्डबीज़ टेक साॅल्यूशंस की स्थापना करीप्रारंभ के कुछ स्कूली सीनियरों को अपने साथ जुड़ने के लिये मनाया और अब कंपनी में 60 लोगों की टीम कर रही है कामअतक 25 शहरों के 30 हजार से भी अधिक युवाओं को कम उम्र में उद्यमिता के क्षेत्र में उतरने के लिये कर चुके हैं प्रेरित

0

‘‘अगर मेरी उम्र और काॅलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ने के निर्णय पर एक नजर डालें तो कोई भी इसपर यकीन करने के लिये तैयार नहीं होता है कि मैंने क्या सोचकर यह किया। लेकिन मैं इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट था कि मुझे क्या करना है। मैं अपने निर्णय पर अडिग रहा और धीरे-धीरे आगे बढ़ा!’’

मूलतः कर्नाटक के हुबली से आने वाले आनंद नाइक कोटा में आईआईटी की प्रवेश परीक्षा की तैयारियों में जुटे हुए थे। वे उन सर्वोत्कृष्ट उज्जवल छात्रों में से थे जिनसे सबसे बेहतरीन और कुलीन स्कूलों में पढ़ने के बाद इंजीनियर बनकर उस जीवन को गुजारने की उम्मीद की जाती है जिसे दुनिया आमतौर पर ‘अच्छे और सुखी जीवन’ के रूप में देखती है। लेकिन उन्होंने सबकी उम्मीद के बिल्कुल उलट फैसला किया और काॅलेज को बीच में छोड़कर और भी अधिक ‘बद्तर’ कुछ करने का फैसला किया। उन्होंने वापस अपने गृहनगर का रुख किया और मात्र 18 वर्ष की उम्र में अपने एक उद्यम की नींव डाली।

आने वाले समय में उन्हें काफी प्रसिद्धी और पुरस्कार मिले और आज वे उत्तरी कर्नाटक के सबसे लोकप्रिय उद्यमियों में से एक हैं। इतनी आसानी से न बैठने वालों में से एक आनंद ने एक नई यात्रा प्रारंभ की जिसमें उन्होंने 25 शहरों की 10 हजार किलोमीटर से भी अधिक की यात्रा 30 हजार से भी अधिक छात्रों को कम उम्र में उद्यमिता के साथ प्रयोग करने के लिये प्र्रेरित किया। हमने इस युवा उद्यमी के व्यापार की दुनिया के सफर के बारे में जानने के लिये उनसे बात की और साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया कि वह क्या है जो इन्हें इतना लोकप्रिय बनाता है।

किशोरावस्था में सफर का प्रारंभ

आनंद कहते हैं, ‘‘मैं मात्र कुछ अंको की कमी से देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग काॅलेजों में से एक में पढ़ने में नाकामयाब रहा। हालांकि इसके बाद भी मेरे सामने कई बेहतरीन विकल्प मौजूद थे लेकिन मैंने अपने मन की आवाज सुनी और वापस अपने घर का रुख किया। बेहद परेशानहाल माता-पिता और अपने आसपास मौजूद लोगों की अपमानजनक टिप्पणियों के बीच आनंद ने कर्नाटक के मुख्य व्यवसायिक केंद्र हुबली में बोर्डबीज़ टेक साॅल्यूशंस (BoredBees Tech Solutions) की स्थापना की। वे बताते हैं, ‘‘जब मैंने पहले-पहल काम प्रारंभ किया तब लोगों को अपने व्यवसाय के बारे में यकीन दिलाना सबसे बड़ी चुनौती था। इसके अलावा तकनीकी पृष्ठभूमि से भी मेरा कोई वास्ता नहीं था।’’ तो फिर ऐसे में उन्होंने हुबली जैसे शहर में तकनीक के क्षेत्र में कदम रखने का विचार कैसे किया? आनंद बताते हैं, ‘‘उस समय बाजार में इस क्षेत्र के जानकारों की बेहद कमी थी। इसके अलावा उस समय बोर्डबीज़ समूचे क्षेत्र का पहला टेक स्टार्टअप था।’’

इसके बाद उन्होंने जानी-मानी साॅफ्टवेयर कंपनियों के साथ काम कर रहे अपने स्कूल के सीनियरों को अपनी टीम में शामिल होने की गुजारिश की जिसमें वे सफल रहे। हालांकि अनुभवी इजीनियरों को अपने साथ काम करने के लिये जोड़ना आनंद के लिये काफी आसान साबित हुआ लेकिन उन्हें अच्छी तरह से इस बात का अहसास था कि अब उनके सामने इन्हें अपने साथ जोड़े रखने की और भी अधिक कठिन चुनौती है। वे कहते हैं, ‘‘मैंने उन्हें अपने साथ जोड़े रखने में आने वाले खर्चे से पार पाने के लिये आइसीएआई और कुछ अन्य संस्थानों में अध्यापन करना प्रारंभ किया। मैंने कुछ कमाई करने के लिये शैक्षिक संस्थानों में आईटी का प्रशिक्षण देने के अनुबंध करने में भी सफलता पाई।’’ प्रारंभिक दौर में बर्डबीज़ ने विनिर्माण की चिंताओं से निबटने के क्रम में आउटसोर्सिंग प्रारंभ की और समूचे इलाके के फलते-फूलते विनिर्माण के क्षेत्र में एक पूर्ण ईआरपी समाधान कंपनी का रूप लेने में सफल रहे। इसके अलावा यह कंपनी अबतक 150 से भी अधिक मोबाइल एप्लीकेशन का निर्माण कर चुकी है जिनके 3 लाख से भी अधिक डाउनलोड हो चुके हैं।

हुबली और अपनी टीम के बारे में विचार

उत्तरी कर्नाटक का एक गुलजार वाणिज्यिक केंद्र हुबली, आमतौर पर ‘छोटा बंबई’ के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन परंपरागत व्यवसायों के क्षेत्र में आईटी समाधान कंपनी प्रारंभ करना एक खट्टा-मीठा अनुभव रहा है। आनंद ने बड़े पैमाने के अप्रयुक्त बाजार और प्रतिस्पर्धा के अभाव को देखते हुए अपने जन्मस्थान को चुना। हालांकि परंपरागत व्यवसायों वाले क्षेत्र में तकनीक की शक्ति की पैठ बनाना इतना आसान काम नहीं था। 

वे बताते हैं, ‘‘कई बार हमें महीनों तक भुगतान नहीं किया जाता था। दुकानदार परीक्षण करने और फिर मोलभाव करने के लिये अक्सर रसूख का इस्मेताल करते।’’ आखिरकार स्थितियां बदलीं, समय के साथ अन्य खिलाड़ी मैदान में आए और इस क्षेत्र का पहला स्टार्टअप होने का फायदा भी इन्हें मिला।

आज आनंद की टीम में 60 अनुभवी पेशेवर है जिनमें से अधिकतर तो उम्र में उनसे बड़े हैं। लेकिन उनके जैसा युवा अपने से उम्र में बड़ों के साथ तालमेल कैसे बना पाते हैं? वे कहते हैं, ‘‘मैं किसी को भी अपने साथ जोड़ने से पहले आमने-सामने की बातचीत जरूर करता हूँ। ऐसा सिर्फ इसलिये ताकि हमारी टीम में शामिल होने वाला प्रत्येक सदस्य प्रत्येक कर्मचारी की ज्ञान और अनुभव को जाने और सम्मान करे। मेरी टीम के सबसे उम्रदराज सदस्य 62 वर्ष के हैं।’’

सफलता की कहानी

बर्डबीज़ को शुरू करे हुए आनंद को सिर्फ दो ही वर्ष हुए थे और वह वर्ष 2013 के एक सोमवार की सामान्य सी दोपहर थी जब उनके पास एक फोन आया। एक उपभोक्ता का फोन समझकर उन्होंने फोन करने वाले को अपनी कंपनी द्वारा किये जा रहे कामों से रूबरू करवाया और फोन कटने पर उन्हें लगा कि वे उसे अपनी बातों से संतुष्ट करने में सफल रहे हैं। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अहसास नहीं था कि यही एक फोन उनका जीवन और भाग्य बदलने वाला साबित होगा। इससे पहले कि वे यह समझ पाते उनके पास एक और फोन आया कि वे ‘सर्वश्रेष्ठ युवा उद्यमी पुरस्कार’ के विजेता हैं और रतन टाटा उन्हें यह पुरस्कार प्रदान करेंगे। वे कहते हैं, ‘‘इसने मेरी जिंदगी बदल दी। पुरस्कार और सराहना प्रारंभिक दौर में अपना एक अलग महत्व रखते हैं क्योंकि इनके मिलने के बाद आपको मान्यता मिलने के अलावा बाजार में स्वीकार्यता भी मिलती है।’’

एक प्रेरणादयी यात्रा

बोर्डबीज़ अपने क्षेत्र में अब एक स्थापित नाम है और इसके द्वारा सफलता का स्वाद चखने के बावजूद आनंद आराम से नहीं बैठे हैं। वे अपने अनुुभवों को छात्रों और विशेषकर किशोरों के साथ साझा करना चाहते हैं और उन्हें कम उम्र में ही अपने पांवों पर खड़ा होने के लिये प्रोत्साहित करते हैं। वे अबतक देश के कोने-कोने तक होकर आ चुके हैं और अपने एक अभियान ‘18 बट नाॅट टीन’ के माध्यम से कई काॅलेजों के युवाओं, जो आने वाले समय में उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रखेंगे, के साथ बातचीत करते हैं। 

वे बताते हैं, ‘‘मैंने प्रारंभिक दौर में बहुत अधिक आलोचना का समाना किया। मुझे याद है कि कैसे मेरे इस कदम को खतरनाक करार दे दिया गया था। मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि युवा कम उम्र में ही बड़े सपने देखने और विफलता को अपनाने में मेरे अनुभवों से कुछ सीख लेने में सफल रहें।’’

आगे का रास्ता

उम्र अभी इस युवा उद्यमी के पक्ष में काम करन वाला सबसे बड़ा कारक है। जीवन में बहुत ही कम उम्र में सफलता और विफलता दोनों का स्वाद चखने के बाद आनंद भविष्य की सोचने वाले एक उद्यमी के रूप में स्वयं को ढाल चुके हैं जिसके पास ऊर्जा और परिपक्वता का बिल्कुल सही मिश्रण है। अब आगे क्या?

‘‘मैं इस क्षेत्र से बाहर दूसरे शहरों में विस्तार करना चाहता हूँ।’’ अंत में वे हंसते हुए कहते हैं, ‘‘अब जब याॅरस्टोरी पर मेरी सफलता की कहानी प्रकाशित हो रही है, तब मेरे माता-पिता मेरे काम को लेकर आश्वस्त हो जाएंगे।’’

Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

Stories by Nishant Goel