हिंदी बोले, चल ऑनलाइन मिल

हिंदी दिवस विशेष...

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गांधी, गोखले, बोस जैसे तमाम दिग्गज नेताओं ने हमेशा एक ही बात कही कि देश को जोड़े रख सकने वाली अगर कोई भाषा है तो वह है हिंदी। आजादी की लड़ाई में हिंदी ने अहम योगदान दिया है। हिंदी ही वो भाषा थी जो आमजनमानस को समझ आती थी। लेकिन आजादी मिलने के बाद जब देश की राष्ट्रभाषा बनाने की बात आई तो हमारे नीति नियंताओं की एक छोटी सी गलती ने हिंदी को उसके सम्मान से और दूर कर दिया।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
हिंदी की दुर्दशा पर गम मनाने की बजाय हम हिंदीभाषी लोगों को अपने में सुधार लाना चाहिए। हिंदी को दरकिनार करने की जगह हर जगह उसके इस्तेमाल में विश्वास दिखाना चाहिए। बीच में कॉन्वेंट और पब्लिक स्कूल के अंग्रेजी के लिए हाइप ने हिंदी को और दयनीय बना दिया था। लेकिन अब हिंदी में हिंदीभाषियों का यकीन फिर से लौट रहा है।

हिंदी हर वर्ग के हिसाब से खुद को ढाल लेती है, यही इस भाषा की खूबसूरती है और मजबूती भी। हिंदी के पाठकों, लेखकों, दर्शकों को हिंदी के लिए अपने प्यार को मुकम्मल करने के लिए ऑनलाइन बहुत सारी अच्छी सामग्रियां उपलब्ध हैं। दुनिया भर में बैठे हिंदी प्रेमी आसानी से हिंदी साहित्य और किसी भी तरह की जानकारी इन पतों पर पा सकते हैं। 

हिंदी, वो भाषा जिसने भारत देश को एक सूत्र पिरोकर रखा है, ऐसा हम सब का मानना है। लेकिन तमाम क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों से समृद्ध इस देश में किसी एक भाषा का पूरी देश की भाषा बन जाना थोड़ा मुश्किल है। ये सही है कि देश के सबसे ज्यादा राज्यों में हिंदी बोली जाती है। फिर भी देश के दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में भाषाई विविधता की व्यापकता ने एक राष्ट्र एक भाषा के सिद्धांत पर हमेशा प्रश्नचिन्ह लगाया है। गांधी, गोखले, बोस जैसे तमाम दिग्गज नेताओं ने हमेशा एक ही बात कही कि देश को जोड़े रख सकने वाली अगर कोई भाषा है तो वह है हिंदी। आजादी की लड़ाई में हिंदी ने अहम योगदान दिया है। हिंदी ही वो भाषा थी जो आमजनमानस को समझ आती थी। लेकिन आजादी मिलने के बाद जब देश की राष्ट्रभाषा बनाने की बात आई तो हमारे नीति नियंताओं की एक छोटी सी गलती ने हिंदी को उसके सम्मान से और दूर कर दिया। 

हुआ यूं कि दक्षिण के कुछ शिक्षाविदों और नेताओं ने ये कहकर हिंदी का विरोध किया, 'हम कितनी भाषा सीखेंगे इस जिंदगी में, हर बार नई भाषा ही सीखते रह जाएंगे क्या। पहले अंग्रेजों ने जबरदस्ती हमें इंग्लिश सीखने पर मजबूर किया और अब हम हिंदी भी सीखें।' विरोध के इस हल्के लेकिन तीव्र स्वर से नीति नियंता पार नहीं हो पाए और उन्होंने हिंदी को 20 साल का प्रतीक्षा समय थमा दिया। वो 20 साल तब से बढ़ता ही आ रहा है। और अब भी हिंदी का वही हाल है। जिस तरह राज्यों के एकीकरण में जैसी दूरदृष्टि और सख्ती सरदार पटेल ने दिखाई थी वैसा ही हिंदी को राष्ट्रभाषा बना देने में किया गया होता तो आज हमारा और हिंदी का वर्तमान कुछ और ही होता। निःसंदेह बहुत ही बेहतर होता।

खैर, हिंदी की दुर्दशा पर गम मनाने की बजाय हम हिंदीभाषी लोगों को अपने में सुधार लाना चाहिए। हिंदी को दरकिनार करने की जगह हर जगह उसके इस्तेमाल में विश्वास दिखाना चाहिए। बीच में कॉन्वेंट और पब्लिक स्कूल के अंग्रेजी के लिए हाइप ने हिंदी को और दयनीय बना दिया था। लेकिन अब हिंदी में हिंदीभाषियों का यकीन फिर से लौट रहा है। हिंदी बड़ी ही समन्वय और समागम वाली भाषा है। ये इतनी उदार और समझदार है कि प्रचलन में चल रही किसी और भाषा के शब्दों का भी यथासंभव सुविधानुसार अंगीकार कर ही लेती है। जो लोग हिंदी में अंग्रेजी के एक भी शब्द के इस्तेमाल को प्रदूषण मानते हैं, उनको ये समझना चाहिए कि हिंदी ने जैसे अरबी के तमाम शब्दों को अपने अंदर घोल लिया वही बात अंग्रेजी के शब्दों के साथ भी है। 

हां माना कि आप उर्दू-हिंदी बहन-बहन वाली थ्योरी में यकीन रखते हैं। लेकिन अंग्रेजी के शब्दों के लिए सेलेक्टिव घृणा आपकी कम समझ की ओर इशारा करती है। आप इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि अपने देश पर लंबे समय तक अरबी और अंग्रेजी भाषाओं के मालिकों का प्रभाव रहा है, शासन रहा है। तो बड़े ही स्वाभाविक रूप से अरबी के शब्द जिस तरह हिंदी में मिल गए हैं जैसे कि वो हमेशा से हिंदी के अंग थे, उसी तरह अंग्रेजी के प्रचलित शब्द भी मिल गए हैं। और इसमें कुछ भी खराब या गुलाम मानसिकता का प्रतीक नहीं है।

हिंदी हर वर्ग के हिसाब से खुद को ढाल लेती है, यही इस भाषा की खूबसूरती है और मजबूती भी। हिंदी के पाठकों, लेखकों, दर्शकों को हिंदी के लिए अपने प्यार को मुकम्मल करने के लिए ऑनलाइन बहुत सारी अच्छी सामग्रियां उपलब्ध हैं। दुनिया भर में बैठे हिंदी प्रेमी आसानी से हिंदी साहित्य और किसी भी तरह की जानकारी इन पतों पर पा सकते हैं। इन सभी पतों का लिंक भी हम आपको दिए दे रहे हैं।

क्या कैसे- 

कंप्यूटर, टेक्नोलॉजी, इंटरनेट और सोशल मीडिया के बारे में कई सवाल हैं, पर किस से पूछें? 'क्या कैसे' के पर आप इन सब सवालों के जवाब, हिन्दी में पा सकते हैं। ये एक बेहतरीन यूट्यूब चैनल है, जहां पर आपकी काफी जिज्ञासाएं शांत हो सकती हैं। इन सबके बारे में जानकारियां आमतौर पर अंग्रेजी में होती हैं। अंग्रेजी न समझ सकने वाले इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए ये एक दोस्त की तरह है।

लिंक- https://www.youtube.com/user/kyakaise

आओ सीखें-

 सीखना और सिखाना ये जिंदगी के दो सबसे खूबसूरत चीजें हैं। हम सीखते जाते हैं और हमारे आस-पास की चीजें हमें सिखाती रहती हैं। आओ सीखें एक अध्ययन-अध्यापन की संस्था है। हम जीवनपर्यंत कुछ न कुछ सीखते रहते हैं। हर मोड़ पर मिलते रहने वाला ज्ञान हमारी जिंदगी को और आसान बनाता जाता है। आओ सीखें, आम जनता के कला, स्वास्थ्य, विज्ञान, इतिहास संबंधी तमाम सवालों के जवाब देने की कोशिश करता है। इस यूट्यूब चैनल के माध्यम से कोई भी हिंदी भाषी अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने का यत्न कर सकता है।

लिंक- https://www.youtube.com/user/aaoseekho

काव्यालय- 

एक बढ़िया प्लैटफॉर्म है हिंदी के वृहद और समृद्ध काव्य को समझने के लिए। यहां पर अलग अलग कवियों और गीतकारों की वर्गीकृत रचनाएं मिल जाएंगी। मुक्तिबोध से लेकर रसखान तक और सर्वेश्वर दयाल सक्सेना से लेकर कबीर तक सब आपको एक ही जगह उपलब्ध हो जाएगा। आपका जब भी कविताएं पढ़ने का मन हो तो लाइब्रेरी जाकर घंटों किताब ढूंढने की बजाय सीधे यहां पहुंचिए।

लिंक- http://kaavyaalaya.org/

ज्ञान यज्ञ- 

टैली ईआरपी 9, एमएस वर्ड, एमएस एक्सेल, एमएस पॉवर प्वॉइंट, इंटरनेट बैंकिंग, आईआरटीसी, हिंदी टाइपिंग, एटीएम कम डेबिट कार्ड, फेसबुक, यूट्यूब से जुड़े ट्यूटोरियल वीडियो हिंदी में देख सकते हैं। ये यूट्यूब चैनल छोटे शहरों और अर्धशहरीय इलाकों में काफी लोकप्रिय है। साथ ही इसका एक बड़ा दर्शक प्रौढ़ वर्ग भी है, जो नया नया तकनीकि से रूबरू हो रहा है।

लिंक- https://www.youtube.com/user/Gyanyagya

कविता कोश- 

कविता कोश की वेबसाइट अपने बारे में दावा करती है कि वो भारतीय काव्य का सबसे विशाल ऑनलाइन संकलन है। कविता कोश वाकई एक मुकम्मल जगह है अगर हिंदी की कोई सी भी कविता पढ़नी है। कविता कोश पर हिंदी के अलावा कविता कोश पर अवधी, छत्तीसगढ़ी, भोजपुरी, मराठी, मैथिली, राजस्थानी, हरियाणवी कविताएं भी आपको पढ़ने के लिए मिल जाएंगी। कविता कोश की टैगलाइन है; भारत की संस्कृति के लिए, भाषा की उन्नति के लिए, साहित्य के प्रसार के लिए।

लिंक- http://kavitakosh.org/

अनुभूति- 

ये वेब पोर्टल हिंदी की तमाम विधाओं, हास्य साहित्य, कविता, नवगीत आदि का बेहतरीन संकलन है। इस पोर्टल की खासियत है कि यहां पर नए साहित्यकारों और कवियों की ताजी रचनाएं पढ़ सकते हैं। बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जो हिंदी में खुद रचना करना चाहते हैं, उन उत्सुक लोगों के लिए पढ़ने की अच्छी सामग्री यहां मिल जाएगी। पढ़िए, अनुभव बटोरिए और अपने लिखने के सपने को उड़ान दीजिए।

लिंक- http://www.anubhuti-hindi.org/

अभिव्यक्ति- 

इसको हिंदी की पहली ऑनलाइन पत्रिका माना जाता है। इसकी स्थापना साल 2000 में हुई थी। इस ऑनलाइन पत्रिका में आपको स्वास्थ्य, बागबानी, घरेलू उपचार से लेकर हिंदी साहित्य की कालजयी रचनाएं तक पढ़ने को मिल जाएंगी। हिंदी में ऐसी ऑनलाइन पत्रिकाएं और ज्यादा से ज्यादा आनी चाहिए। ये एक अच्छी शुरुआत की गई थी। हिंदी में हर क्षेत्र, हर विषय पर जितना ज्यादा मौलिक लिखा जाएगा, उतना ही हिंदी की उन्नति होगी।

लिंक- http://www.abhivyakti-hindi.org/

हमारी सफलता- 

हमारी सफलता डॉट कॉम नाम की ये वेबसाइट आपके लिए ढेरों प्रेरक किस्से कहानियां लेकर आती है। किरन साहू हमारी सफलता साइट की फाउंडर हैं। आप जब भी उदास हों, जिंदगी में भटकन महसूस करें, जब भी आपको लगे कि आप बहुत पीछे जा रहे हैं तो ये लीजिए नीचे दिया हुआ है यूआरएल, सीधे इस पते पर पहुंच जाइएगा। यकीन मानिए, आपको बहुत कुछ नया सीखने को मिलेगा।

लिंक- https://www.hamarisafalta.com/

प्रतिलिपि- 

ये तो बहुत ही सुंदर सा पोर्टल है। इसमें वर्गीकृत श्रेणियां हैं। उपन्यासों, प्रेमकहानियों, सस्पेंस-हॉरर कहानियों, सामाजिक कहानियों और भी ऐसी ही तमाम विधाओं की रचनाएं आपको एक ही जगह पढ़ने को मिल जाएंगी। इस पोर्टल की खूबी है कि इसमें नवोदित रचनाकारों की कहानियां भी प्रकाशित होती हैं और उसे कितने लोगों ने पढ़ा है, ये भी देखा जा सकता है।

लिंक- https://hindi.pratilipi.com/

नेटिवप्लैनेट- 

ये एक उपयोगी पोर्टल है अगर आपको यात्रा, फ्लाइट, होटल संबंधी जानकारियां चाहिए। यहां पर अलग-अलग टूरिस्ट स्पॉट के बारे में विस्तृत जानकारियां भी मिल जाएंगी। यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए अंग्रेजी में तमाम वेबसाइट्स और पोर्टल हैं लेकिन हिंदी में इस क्षेत्र में वेबसाइट्स का टोटा है। नेटिवप्लैनेट इस कमी को पूरा करने का प्रयास करता दिख रहा है।

लिंक- http://hindi.nativeplanet.com/

हिंदी जीके- 

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को आसान भाषा में देश-दुनिया के बारे में जानकारी मिल जाएंगी। इंटरनेट पर हिंदी में सामान्य ज्ञान पढ़ने के लिए इससे बढ़िया जगह नहीं हो सकती। ये एक द्वि-भाषी साइट है। यहां पर हिंदी के साथ अंग्रेजी में आपको पठन सामग्री मिल जाएगी। इससे ये भी बढ़िया होगा कि आप एक साथ दो भाषाओं में अपने कंटेंट को समझ सकते हैं।

लिंक- http://www.hindi-gk.com/

चलत मुसाफ़िर- 

ये हिंदी में यात्रा वृत्तांत पढ़ने के लिए बढ़िया पोर्टल है। यहां पर युवा घुमक्कड़ों के अनुभव और पूरे देश की अनदेखी-अनसुनी जगहों के बारे में अच्छी जानकारी मिलती है। खास बात ये है कि आप भी अपने यायावरी के अनुभवों को वहां पर पब्लिश करवा सकते हैं। चलत मुसाफ़िर एक प्रयास है, महान घुमक्कड़ राहुल सांकृत्यायन की विरासत को आगे बढ़ाने का। इस वेबसाइट का मकसद है, हिंदी में ज्यादा से ज्यादा यात्रा साहित्य का लिखा जाना।

लिंक- http://www.chalatmusaafir.in/

जानकीपुल- 

ये हिंदी के शीर्ष के लेखकों, कवियों, व्यंगकारों का एक ऑनलाइन अड्डा है। हिंदी के समसामायिक मुद्दों पर भी यहां बेहतरीन लेखन मिल जाएगा। इस पोर्टल पर आपको बाल साहित्य से लेकर स्त्री विमर्श तक और वाम साहित्य से लेकर रॉम-कॉम साहित्य का विस्तृत वर्णन मिल जाएगा। जानकीपुल एक उम्दा उदाहरण है कि कैसे हर वर्ग, हर विचारधाराओं को हिंदी एक धागे में पिरोती जा रही है।

लिंक- http://www.jankipul.com/

ये भी पढ़ें- भारतेंदु की मुकरी में 'क्यों सखि सज्जन, नहिं अँगरेज!'

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IIMC दिल्ली से पत्रकारिता की एबीसीडी सीखी। नेटवर्क-18 और इंडिया टुडे के लिए दो साल तक काम किया। घूमने का जुनून है। इस जुनून को chalatmusaafir.in पर देखा जा सकता है। देश के कोने-कोने में जाकर वहां की विरासत और खासियत को सामने लाने का सपना है।

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