जीएसटी को अपनाने के लिए राजस्व आडिट के तौर-तरीके में बदलाव की जरूरत: कैग

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सरकारी आडिटर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को अपनाने के लिए तैयारी कर रहा है। एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि एकीकृत कर प्रणाली लागू होने के बाद आडिट के नये तौर तरीके अपनाने की जरूरत होगी। 

उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) एच प्रदीप राव का कहना है, कि

जीएसटी को जल्द क्रियान्वित किया जाना है। ऐसे में हमें प्रौद्योगिकी के स्तर पर बदलाव लाने की जरूरत होगी। हमें अपने तरीके और रख में बदलाव करना होगा। हमारा राजस्व आडिट का रख राज्य और केंद्र के शुल्कों पर आधारित है। अब हम नई तकनीकों के लिए तैयारी कर रहे हैं। 

आईपीएआई की एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राव ने यह सब बातें कहीं।

एच प्रदीप राव ने कहा,  

जीएसटी को लेकर सभी राज्य सरकारों में सहमति है। उन्हें नेटवर्क (जीएसटीएन) के साथ एकीकरण करना होगा। चाहे आंकड़ों के विश्लेषण की बात हो या प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की, हम लगाातर बदल रहे हैं। हम इसके लिए सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं।

इसी मौके पर विशेष संबोधन में वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने सुझाव दिया कि एनजीओ को भी कैग आडिट के दायरे में लाया जाना चाहिए क्योंकि उन्हें विदेश, केंद्रीय तथा अन्य स्रोतों से धन मिलता है।


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