बिग बास्केट के प्रमोद जाजू ने बताए, ग्राहकों को आकर्षित करने के 7 खास नुस्खे

किसी भी स्टार्टअप में किन बारीक तकनीकी चीज़ों का खयाल रखना चाहिए, जानने के लिए पढ़ें ये...

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बेंगलुरू में योरस्टोरी के प्रोग्राम मोबाइलस्पार्क में बिग बास्केट के सीटीओ प्रमोद जाजू ने स्पष्ट करते हुए बताया कि ज्यादातर ग्राहकों को वाउचर या कूपन कोड्स याद नहीं रहते, इसलिए बिग बास्केट, उपलब्ध वाउचर्स की लिस्ट ऑर्डर के साथ यूजर्स के सामने रखता है। उनका मानना है कि मेट्रो से इतर शहरों में रहने वाले यूजर्स के लिए तैयार किया गया प्रोडक्ट, मोबाइल फ्रेंडली होना चाहिए। स्क्रीन साइज, कमजोर नेटवर्क में भी काम करने की क्षमता, बैटरी का कम इस्तेमाल, पुश नोटिफिकेशन और ऐप के साइज पर खास काम होना चाहिए...

कार्यक्रम में प्रमोद
कार्यक्रम में प्रमोद
यदि आप भी अपना कोई खुद का काम करते हैं, आप आंत्रेप्रेन्योर हैं या फिर आपकी भी दुनिया स्टार्टअप है, तो अपने स्टार्टअप को आगे ले जाने के लिए कई तकनीकी बातों पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। इन्हीं सब ज़रूरी बातों पर मोबाइलस्पार्क में बिग बास्केट के सीटीओ प्रमोद जाजू ने वो बारीक टिप्स दिये, जिस ओर ध्यान देकर आप अपने काम को और बेहतर तरीके से कर सकते हैं...

बेंगलुरु के आईटीसी गार्डेनिया में मोबाइल स्पार्क्स के 6वें एडिशन में बिग बास्केट के सीटीओ प्रमोद जाजू ने शिरकत की। इस मौके पर स्टीफन आर कोवे की लोकप्रिय किताब 'द सेवन हैबिट्स ऑफ हाइली इफेक्टिव पीपल' से प्रेरित होकर, प्रमोद ने 7 सिद्धान्तों पर चर्चा की। प्रमोद ने कहा कि हमको तय करना है कि हम कैसे इनकी मदद से यूजर्स के लिए बेहतर से बेहतर उत्पाद बना सकते हैं। आइए जानते हैं इन सिद्धान्तों के बारे में:

1. उपभोक्ता आधारित डिजाइन का डिवेलपमेंट

प्रमोद ने विस्तार से बताया कि उपभोक्ता आधारित डिजाइन (यूजर सेंट्रिक डिजाइन, UCD), एक प्रक्रिया है, जो हमारी आवश्यकताओं पर केंद्रित होती है। उन्होंने कहा, “अगले 1 बिलियन उपभोक्ताओं के लिए प्रोडक्ट्स तैयार करने के दौरान, यह जरूरी है कि हम इस बात पर गौर करें कि हमारा उपभोक्ता सीधे तौर पर क्या चाहता है। हम ऐसे उत्पाद बनाएं, जो उनके लिए मददगार हों।' प्रमोद ने कहा कि हमें समझना होगाः

1. यूजर कॉन्टेक्स्ट
2. ग्राहकों की जरूरतों को विकसित करना
3. डिजाइन तैयार करना
4. प्रोडक्ट का सही आकलन

इस संदर्भ में प्रमोद ने बिग बास्केट से जुड़े एक उदाहरण का जिक्र कियाः

उन्होंने बताया कि ज्यादातर लोग, हर महीने घर में इस्तेमाल होने वाले सामानों की शॉपिंग जल्द से जल्द निपटाना चाहते हैं। आमतौर पर लोग हर बार एक ही तरह के प्रोडक्ट्स खरीदते हैं। इसको ध्यान में रखते हुए ही कंपनी ने 'स्मार्ट बास्केट' की सुविधा दी है, जो ग्राहक के खरीदने के ढंग और पसंद को समझता है। इसके अलावा, बिग बास्केट, यूजर्स को वाउचर्स की सुविधा भी देता है। प्रमोद ने स्पष्ट करते हुए बताया कि ज्यादातर ग्राहकों को वाउचर या कूपन कोड्स याद नहीं रहते, इसलिए बिग बास्केट, उपलब्ध वाउचर्स की लिस्ट ऑर्डर के साथ यूजर्स के सामने रखता है।

2. सहजता ही कारगर

किसी भी तकनीक की खूबसूरती जटिल होने में नहीं बल्कि उसके सरल और यूजर फ्रेंडली होने में है। प्रमोद ने कहा, “हर यूजर (ग्राहक) इंजीनियर नहीं होता और न ही उसके पास एमबीए की डिग्री होती है। इसलिए बतौर इंजीनियर्स हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम ऐसे उत्पाद बनाएं, जो सिर्फ इंजीनियर्स ही नहीं बल्कि सबके लिए हों।” प्रमोद ने कहा कि ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए वेबसाइट की डिजाइनिंग पर काम होना चाहिए।

वॉट्सऐप का उदाहरण देते हुए प्रमोद ने कहा कि यह ऐप ग्राहकों को अपने साथ जोड़कर रखती है। ऐप को इस्तेमाल करने के लिए ग्राहकों को पासवर्ड वगैरह की जटिलताओं से होकर नहीं गुजरना पड़ता।

3. डेटा ऐनालिसिस से हो आगे की तैयारी

प्रमोद का मानना है कि बेहतर प्रोडक्ट्स बनाने के लिए डेटा ओरिएन्टेशन बहुत जरूरी है। किसी भी प्रोडक्ट से संबंधित रणनीति तैयार करने के लिए आइडिया को डेटा ओरिएन्टेड होना चाहिए। प्रमोद ने कहा कि ऐप्स को नोटिफिकेशन और पर्सनलाइजेशन की मदद से और भी स्मार्ट बनाया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि एनपीएस (नेट प्रमोटर स्कोर्स) का आकलन बेहद जरूरी है। साथ ही, उन्होंने बेसलाइन और कंट्रोल्ड ग्रुप्स के साथ प्रयोग पर भी जोर दिया।

4. परफॉर्मेंस पर देना होगा खास ध्यान

किसी भी ऐप को लेकर यूजर का चुनाव और अनुभव, उसकी परफॉर्मेंस से बहुत प्रभावित होता है। इस संबंध में प्रमोद ने गूगल का उदाहरण दियाः गूगल ने अपनी रिसर्च में पाया कि अगर पेज खुलने में 0.5 सेकंड का समय अधिक लगता है तो ट्रैफिक में 20 प्रतिशत तक गिरावट होती है। ऐप या वेबसाइट जितनी तेजी से काम करे, बेहतर है। वेबसाइट या ऐप डिजाइनिंग के दौरान इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रमोद ने कहा, 'अगर फंक्शनिंग में किसी तरह की समस्या आती है तो उसे ठीक ढंग से संभालना चाहिए। बहुत जरूरी है कि ऐप या वेबसाइट चलाने के दौरान यूजर के सामने ब्लैंक स्क्रीन, ब्लैंक विश लिस्ट या शॉपिंग कार्ट्स न हों।'

5. मेट्रो सिटी और इंग्लिश बोलने वालों से परे भी सोचें

प्रमोद का मानना है कि मेट्रो से इतर शहरों में रहने वाले यूजर्स के लिए तैयार किया गया प्रोडक्ट, मोबाइल फ्रेंडली होना चाहिए। स्क्रीन साइज, कमजोर नेटवर्क में भी काम करने की क्षमता, बैटरी का कम इस्तेमाल, पुश नोटिफिकेशन और ऐप के साइज पर खास काम होना चाहिए।

6. हिसाब लगाकर खरीदनें वालों का भी रखें ध्यान

प्रमोद कहते हैं कि भारत में ज्यादतर लोगों का चयन, कीमत को ध्यान में रखकर होता है। जरूरी है कि कीमतों पर लगातार रिसर्च हो और ग्राहक को सबसे किफायती दामों में प्रोडक्ट्स उपलब्ध हो सकें। साथ ही, जरूरी है कि बिलिंग के दौरान हर चार्ज को ग्राहक के सामने स्पष्ट रूप से रखा जाए।

7. ग्राहकों की खरीदने की आदत और मनोविज्ञान को भी करें शामिल

बहुत सी ऐसी तकनीक हैं, जिनके जरिए ग्राहकों के साथ एक इमोशनल कनेक्ट स्थापित किया जा सकता है। डिजाइनिंग के दौरान इनका सहारा लिया जाना चाहिए। किसी भी उत्पाद की सफलता, बहुत हद तक इस पर निर्भर करती है।

अर्थ के क्षेत्र के नोबल विजेता, रिचर्ड थैलर का जिक्र करते हुए प्रमोद ने कहा कि प्रोडक्ट की समीक्षा से ग्राहक के बर्ताव और फीडबैक को नियंत्रित किया जा सकता है। अगर समीक्षा का सही इस्तेमाल हो तो आप अपनी इच्छा के मुताबिक, ग्राहकों कि दिमाग में अपनी इमेज बिल्डिंग का काम कर सकते हैं।

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