ऑनलाइन शॉपिंग में ग्राहकों से धोखा करने वाले सेलर को मिलेगी जुर्माने या जेल की सजा

धोखा देने वाले सेलर को अब मिलेगी की सज़ा...

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कई बार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वालों की तरफ से भ्रामक जानकारी या अधूरी जानकारी देने की वजह से ग्राहकों को मुश्किल का सामना करना पड़ता है। सामान लेने के बाद उन्हें लगता है कि उनके साथ को धोखा हो गया है। 

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
खरीदारी के समय खरीदार के साथ होने वाले धोखे को रोकने के लिए सरकार एक नया कानून बना रही है, जिसके तहत प्रॉडक्ट के बारे में एमआरपी, एक्सपायरी डेट, मैन्युफैक्चरर की डिटेल्स सहित कई डीटेल्स की जानकारी देना अनिवार्य किया गया है।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर सामान बेचने वालों को दूसरी डीटेल्स के अलावा प्रॉडक्ट की ओरिजनिल एमआरपी की जानकारी भी देनी होगी, भले ही वे उसे डिस्काउंटेड प्राइस पर बेच रहे हों।

जब से ऑनलाइन शॉपिंग कराने वाले प्लेटफॉर्म आ गए हैं, शहरी जनता ने तो मार्केट जाने का रास्ता ही छोड़ दिया है। आज बाजार से काफी कम दाम पर सामान मिलने की वजह से ऑनलाइन शॉपिंग का चलन अपनी चरम सीमा पर है। लेकिन इसमें मुश्किलें और दुविधाएं भी कम नहीं हैं। कई बार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वालों की तरफ से भ्रामक जानकारी या अधूरी जानकारी देने की वजह से ग्राहकों को मुश्किल का सामना करना पड़ता है। सामान लेने के बाद उन्हें लगता है कि उनके साथ को धोखा हो गया है। कई बार प्रॉडक्ट पर एमआरपी तक नहीं लिखा होता। इसे रोकने के लिए सरकार एक नया कानून बना रही है।

लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) (अमेंडमेंट) रूल्स 2017 का मकसद प्री-पैकेज्ड कमोडिटीज को रेगुलेट करना है। इसके तहत प्रॉडक्ट के बारे में एमआरपी, एक्सपायरी डेट, मैन्युफैक्चरर की डिटेल्स सहित कई डीटेल्स की जानकारी देना अनिवार्य किया गया है। ई-कॉमर्स इकाइयों के खिलाफ उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए उन्हें भी इन नए नियमों के दायरे में लाया गया है। ई-कॉमर्स कंपनियां अगर अधिकतम विक्रय मूल्य (MRP) का जिक्र प्रॉडक्ट्स की पैकिंग पर साफ तौर पर करने से जुड़े नए नियमों का पालन नहीं करेंगी तो उन्हें जुर्माना देना होगा और यहां तक कि जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है।

ये नए नियम अगले साल पहली जनवरी से लागू होंगे। कंज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, 'अगर ई-कॉमर्स कंपनियां नए नियमों का पालन नहीं करेंगी तो उन्हें लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के सेक्शन 36 के तहत दंड दिया जाएगा।' इस एक्ट के अनुसार, प्री-पैकेज्ड कमोडिटीज से जुड़ी अनिवार्य जानकारी न देने वाली ई-कॉमर्स इकाइयों पर पहली गलती के लिए 25000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसी दूसरी गलती के लिए उन पर 50000 रुपये का जुर्माना लगेगा और तीसरी के लिए एक लाख रुपये का। अधिकारी ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए ऐसे जुर्माने के अलावा एक साल तक की जेल की सजा भी हो सकती है।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर सामान बेचने वालों को दूसरी डीटेल्स के अलावा प्रॉडक्ट की ओरिजनिल एमआरपी की जानकारी भी देनी होगी, भले ही वे उसे डिस्काउंटेड प्राइस पर बेच रहे हों। इसके अलावा एक्सपायरी डेट की जानकारी भी देनी होगी। यह भी बताना होगा कि प्रॉडक्ट को किस देश में बनाया गया। कंज्यूमर एंगेजमेंट प्लेटफॉर्म लोकल सर्कल्स की ओर से कराए गए एक सर्वे में पाया गया कि 42 पर्सेंट कंज्यूमर्स ने यह देखा है कि सेलर्स अपने प्रॉडक्ट्स की लिस्टिंग उनके एमआरपी से ज्यादा पर कराते हैं और फिर उसके बाद वे उस पर डिस्काउंट ऑफर करते हैं।

हाल ही में कंज्यूमर अफेयर्स, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन मिनिस्टर रामविलास पासवान ने कहा था कि ई-कॉमर्स कंपनियों को नए नियमों का पालन करना होगा। उन्हें डिस्काउंट देने की तो छूट होगी लेकिन कंज्यूमर्स के सामने स्पष्ट रूप से तमाम जानकारियां देनी होंगी ताकि वे प्रॉडक्ट के बारे में सही निर्णय कर सकें।

इस विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, 'पिछले दो वर्षों में ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ कई शिकायतें आई हैं। प्री-पैकेज्ड कमोडिटीज से जुड़ा नया नियम इन इकाइयों के कामकाज को कहीं ज्यादा सख्ती के साथ रेगुलेट करेगा। मकसद यह है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन कामकाज करने वाले सेलर्स के बीच समानता लाई जाए।' संशोधित लीगल मेट्रोलॉजी रूल्स के तहत एक अहम बदलाव एक ही प्री-पैकेज्ड प्रॉडक्ट के लिए दो एमआरपी रखने पर बैन लगाने के रूप में भी किया गया है।

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