ट्रेन में खाना चेक करने के लिए रेलवे नियुक्त करेगा 'खुफिया जासूस', रसोई की निगरानी सीसीटीवी कैमरे से

ट्रेन में मिलने वाले खाने में सुधार की नई कोशिश...

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अब रेलवे कुछ ऐसे अंडरकवर एजेंट्स को हायर करेगा जो गुपचुप तरीके से रेल में परोसे जाने वाले खाने में गड़बड़ी को जांचेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये एजेंट्स सादे कपड़ों में रहेंगे ताकि उनकी पहचान उजागर न होने पाए।

अब रेलवे की रसोइयों में कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा और उसकी लाइव स्ट्रीमिंग आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर होगी।

भारत में परिवहन का सबसे सस्ता और सुलभ साधन रेलमार्ग है। देश की बहुतायत जनता की जिंदगी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़ी है और एक बड़ी आबादी रोजाना ट्रेन से सफर करती है। लेकिन ट्रेनों की लेटलतीफी और उसमें मिलने वाले खाने को लेकर रोज शिकायतें मिलती रहती हैं। इस समस्या को सुधारने के लिए रेलवे ने अब खाने की गुणवत्ता की जांच की योजना बनाई है। अब रेलवे कुछ ऐसे अंडरकवर एजेंट्स को हायर करेगा जो गुपचुप तरीके से रेल में परोसे जाने वाले खाने में गड़बड़ी को जांचेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये एजेंट्स सादे कपड़ों में रहेंगे ताकि उनकी पहचान उजागर न होने पाए।

एक अधिकारी ने बताया कि ये एजेंट साधारण यात्रियों की तरह खाना खरीदेंगे और खाने की गुणवत्ता पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही वे रेल स्टाफ के बर्ताव की भी निगरानी करेंगे। अधिकारी ने यह भी बताया कि ये एजेंट एक पैमाने के आधार पर जांच करेंगे और यात्रियों, स्टाफ मेंबर्स और संबंधित अधिकारियों से बात भी करेंगे। अभी हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें ट्रेन में चाय बेचने वाले वेंडर चाय के लिए टॉयलट का पानी इस्तेमाल कर रहा था। 2017 की कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक रेल में परोसा जाने वाला खाना खाने योग्य नहीं होता है।

ऑडिट टीम द्वारा की गई संयुक्त जांच में यह सामने आया कि साफ-सफाई को लेकर अनियमितता बरती जाती है। इतना ही नहीं ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों ने भी पाया कि खाने की क्वॉलिटी या तो औसत थी या उससे भी कम। इतना ही नहीं रेलवे स्टेशनों पर बिकने वाले जूस, बिस्किट और फ्लेवर्ड मिल्क में भी कमी पाई गई। कैग ने यह भी कहा कि रेलवे स्टेशन और ट्रेन में अनाधिकारिक ब्रांडे वाली पानी की बोतलें बिकती हैं। रेल यात्रियों को मजबूरी में इन्हें खरीदना पड़ता है। 11 रेलवे जोन्स के 21 बड़े स्टेशनों पर वॉटर प्यूरिफायर की भी सुविधा नहीं थी। यहां तक कि खाना बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले पानी को भी प्यूरिफाई नहीं किया जाता।

इन सारी समस्याओं को दूर करने की दिशा में रेलवे ने एक और पहल की योजना बनाई है। इस योजना के मुताबिक अब रेलवे की रसोइयों में कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा और उसकी लाइव स्ट्रीमिंग आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर होगी। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि हम एक ऐसा ऐप बनाने पर काम कर रहे हैं जहां से यात्री ट्रेन के किचन में क्या बन रहा है और कैसे बन रहा है इस पर नजर रख सकेंगे।' रेल मंत्रालय द्वारा रेल यात्रा को अधिक सुरक्षित और साथ ही यात्रियों के लिए सफर को आरामदेह बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की जा रही हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि इन पहलों से रेलवे में कुछ सुधार होगा और यात्रियों की मुसीबतों में कमी आएगी।

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