‘IdeaMil’ एक ऐसी जगह जहां सुकून से दें अपने काम को अंजाम


कृतिका नाडिग हैं ‘IdeaMil’ की संस्थापक

पुणे में काम कर रहा है ‘IdeaMil’

कृतिका नाडिग हैं राष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी

सुबह 9 बजे से शाम 7बजे खुला रहता है ‘IdeaMil’

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क्या शतरंज और उद्यमियता का आपस में कोई संबंध हो सकता है ? लेकिन इस बात को साबित कर दिखाया है पुणे की रहने वाली और कई राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिताएं जीत चुकी कृतिका नाडिग ने। जो ‘IdeaMil’ की संस्थापक और निदेशक हैं। ये संगठन फ्रीलांसरों के साथ काम करने के अलावा नये स्टार्ट अप को बढ़ने में मदद करता है। कृतिका को ना तो घर की चारदीवारी में रहना मंजूर था और ना ही किसी ऑफिस में जाकर नौकरी करना। वो दूसरे ही ख्यालों की थीं तभी तो उन्होने अपने काम में दोनों का मिश्रण किया है जहां पर लोग आराम महसूस करते हैं। उनकी इस जगह में मॉर्डन डेस्क बने हैं तो वाई-फाई की सुविधा भी है जो लोग पढ़ने के इच्छुक हैं उनके लिए लाइब्रेरी है साथ में है आरामदायक बॉलकनी। जहां पर किसी का भी मूड ताजा हो सकता है।

स्टार्ट अप संस्कृति के लिए साथ काम करने वालों को मौके देना बहुत ही प्रासंगिक है। कृतिका का मानना है कि आज के दिन ज्यादा से ज्यादा लोगों में कौशल पैदा करने की जरूरत है। साथ ही जरूरत है वैश्विक स्तर पर अपने नजरिये को और बढ़ा करने की। घुमक्कड लेखक, किताबी कीड़ा और राष्ट्रीय शतरंज चैम्पियन कृतिका, हमेशा आजाद ख्यालों वाली लड़की थी। उन्होने सात साल की उम्र में पहली बार अकेले हवाई यात्रा की। इससे उनमें आत्मविश्वास आया और ये उनकी बढ़ती उम्र के साथ और ज्यादा बढ़ता गया। यही कारण है कि वो अपनी बुद्धि और इसी आत्मविश्वास की वजह से कई राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोकिताएं जीत सकीं।

फ्रीलांसरों के क्षेत्र में काम करने का फैसला कृतिका को काफी फायदेमंद लगा क्योंकि उन्होने एशियन स्कूल ऑफ जर्नलिज्म से पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी की थी। जहां पर उन्होने सीखा था कि कहानियों को कैसे लिखा जाता है। इस दौरान वो कई लोगों से मिली और उनसे उनके विचार और शौक के बारे में जानकारी लेनी शुरू की। इसके बाद उन्होने कुछ वक्त के लिए ‘The Economic Times’ के लिए काम किया। यात्राओं की शौकिन कृतिका अब तक 25 देशों की यात्राएं कर चुकी हैं। इनमें से कई देश तो ऐसे हैं जहां पर उन्होने देश का प्रतिनिधित्व किया तो कुछ जगह की यात्राएं ‘Lonely Planet’ पत्रिका के लिए करनी पड़ी। जिसमें वो यात्रा वृतांत लिखती थीं। कुछ वक्त पहले उन्होने को-वर्किंग स्पेस पर ऑनलाइन लेख पढ़ा। इससे पहले उन्होने इस बारे में कहीं भी, कुछ भी नहीं सुना या पढ़ा था। इस लेख को पढ़ने के बाद उन्होने फ्रीलांसर होने के नाते सोचा कि घर से काम करना कितनी बड़ी चुनौती है। वो अपने इस आइडिये के साथ खेलना चाहती थीं और इसके लिए वो एक फायदेमंद उद्यम शुरू करना चाहती थी जिससे ना सिर्फ उनकी आमदनी हो बल्कि उनका गृहनगर पुणे में भी गुणात्मक अंतर आये।

काम शुरू करने से पहले मालिनी ने इसको लेकर काफी रिसर्च की और घंटों लोगों से बातचीत की जब तक की वो इसे लेकर आश्वस्त नहीं हो गई। आज कृतिका के अपने इस स्टार्ट अप में 16 सदस्यों के लिए को-वर्किंग स्पेस है। कृतिका का ‘IdeaMil’ पुणे के एक घर से चलता है जो उनके परिवार का ही है वहां पर उन्होने कुछ रद्दोबदल कर उसे अपने ऑफिस के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं। जो सभी सदस्यों के लिए सातों दिन सुबह 9 बजे से शाम 7बजे खुला रहता है। जल्द ही वो एक योजना पर काम करना चाहती हैं जहां पर समय बांट कर दो दोस्त एक डेस्क पर काम कर सकें। यहां पर सदस्य बाहर घुमने जा सकते हैं, बातचीत कर सकते हैं, वर्कशॉप और फिल्म देख सकते हैं और ये सब वो तब कर सकते हैं जब वो कोई काम नहीं कर रहे होते। क्योंकि ‘IdeaMil’ उद्यमियों, पेशेवरों काम करने की एक शानदार जगह है। खासतौर से विद्यार्थियों के लिए जिनको परीक्षा के दिनों में एकांत जगह चाहिए होती है।

पिछले दिनों कृतिका के एक दोस्त जो एक नॉवेल के लिए लेख लिखना चाहते थे उनको काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। क्योंकि उनका लेपटॉप खराब हो गया था तब उनको ‘IdeaMil’ का ध्यान आया जो काम करने के लिए संतुलित, किफायती और तनाव मुक्त जगह थी। इसको शुरू करने के लिए कृतिका ने अपनी बचत के सारे पैसे इसमें लगा दिये साथ ही सोशल मीडिया में उन्होने दो महिने तक विज्ञापन भी दिये। इसके अलावा लोग एक दूसरे से सुन कर उनके पास आने लगे। कृतिका का कहना है कि उनके अभिभावक कभी भी उनके सपनों को पूरा करने की रूकावट नहीं बने। कृतिका के माता-पिता की मैनेजमेंट से जुड़ी पृष्ठभूमि रही है यही कारण है कि उनके माता पिता पुणे में शिक्षकगण एजुकेशन इनिश्यटिव चलाते हैं। जबकि उनकी बहन बेंगलुरु में डिजाइन स्टूडियो चलाती है।

कृतिका का कहना है कि उन्होने अपना उद्यम शुरू करने से पहले कापी में इस योजना का खाका खींचा। बैक अप प्लान तैयार किया। वो अपने काम को लेकर काफी उत्साहित हैं और अपना सारा वक्त और ऊर्जा ‘IdeaMil’ को खड़ा करने में लगा रही हैं। कृतिका शुरूआत से ही कुछ अलग करने की चाह रखती थी इसलिए वो जानती थी कि शतंरज के लिए अपने काम के साथ कैसे समय निकाला जा सकता है। वो शतरंज के खिलाड़ी के तौर पर काफी महत्वाकांक्षी रही हैं। तभी तो वो कहती हैं कि शतंरज मानसिक संतुलन का एक खेल है जिसमें रिटायरमेंट की कोई उम्र नहीं होती और जिस दिन वो चाहेंगी वो उसे फिर खेल सकती हैं।

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