साधना क्यों नहीं खिंचवाती थीं फोटो

0

अपने फिल्मी करियर को विश्राम देने के बाद जिस तरह से उन्होंने अपनी तस्वीरें खिंचवाने से मना कर दिया था वो उनके सिनेमा के प्रति गहरे प्यार को दर्शाता है। 

अभिनेत्री साधना (फाइल फोटो)
अभिनेत्री साधना (फाइल फोटो)
साधना के पिता उनके जन्म से ही उन्हें एक बेहतरीन एक्ट्रेस बनाने का ख्वाब देखा करते थे। इसलिए अपने पिता के इस सपने को पूरा करने के लिए साधना ने स्कूल के दिनों से ही डांस स्कूल जाना शुरू कर दिया था।

हमेशा लाइमलाइट में बने रहने की फिल्मी दुनिया की रवायत से जुदा होकर पुरानी फिल्मों की दिल अजीज़ नायिका साधना ने मिसाल कायम की है, जिसके पीछे सबसे बड़ी वजह है कि वो अपना सिनेमाई रूप अपने फैन्स के जेहन में हमेशा-हमेशा के लिए जीवंत रखना चाहती थीं और इसीलिए कैमरे के सामने आने से भी बचती रहीं या फिर कहें तो फोटो नहीं खिंचवाती थीं।

साधना, क्लास, स्टाइल, अदाकारी; मानो ये सब एक ही बातें हों। साधना की संवाद अदायगी हो या उनके जीने का अंदाज, वो किसी स्वर्गलोक की परी जैसी लगती हैं। उनकी तो बात ही अलग थी। हमेशा लाइमलाइट में बने रहने की आजकल की रवायत से जुदा होकर साधना जी ने मिसाल कायम की है। अपने फिल्मी करियर को विश्राम देने के बाद जिस तरह से उन्होंने अपनी तस्वीरें खिंचवाने से मना कर दिया था वो उनके सिनेमा के प्रति गहरे प्यार को दर्शाता है। साधना जी आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी फिल्में, उनका ग्रेस, उनकी सलोनी सी सूरत जीवंत हैं, उनके व्यक्तित्व की तरह ही।

साधना का जन्म पाकिस्तान के कराची शहर में 2 सितंबर 1941 को हुआ था। देश के विभाजन के दौरान 6 साल की उम्र में साधना अपने माता-पिता लालीदेवी और शेवाराम शिवदसानी के साथ भारत आ गई थीं। साधना अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं। इनके पिता ने 1930 की अपनी पसंदीदा अभिनेत्री साधना बोस के नाम पर उनका नाम ‘साधना’ रखा था। साधना के चाचाजी हरि शिवदसानी बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता थे, उनकी बेटी बबीता भी बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री रह चुकी हैं। आठ साल की उम्र तक उनकी मां ने उन्हें घर में ही शिक्षा-दीक्षा दी। साधना के पिता उनके जन्म से ही उन्हें एक बेहतरीन एक्ट्रेस बनाने का ख्वाब देखा करते थे। इसलिए अपने पिता के इस सपने को पूरा करने के लिए साधना ने स्कूल के दिनों से ही डांस स्कूल जाना शुरू कर दिया था।

शायद बहुत कम लोगों के ये बात मालूम हो कि साधना फिल्म श्री 420 के दो गानों में कोरस के तौर पर भी डांस कर चुकी हैं। ये उनका शुरुआती दौर था, जब वो सिर्फ 15 साल की थीं।

1955 में जब वह 15 वर्ष की थी उस समय फिल्म श्री 420 के नृत्य निर्देशक उनके स्कूल में बेहतरीन डांस ग्रुप के लिए कोरस लड़कियों को चयनित करने आए थे। इसमें साधना का भी चयन किया गया और उन्होंने इसी फिल्म के गाने रमैया वस्ता वइया और मुड़ मुड़ के ना देख में ग्रुप कोरस में लड़कियों के साथ प्रस्तुति दी। इसमें बॉलीवुड एक्टर राज कपूर ने अहम भूमिका निभाई। 

इसके बाद साधना ने 1958 में पहली सिंधी फिल्म अबाणा में सपोर्टिंग किरदार निभाया। इसमें उन्होंने शीला रमानी की छोटी बहन की भूमिका निभाई, जिसके लिए साधना को 1 रुपये टोकन फीस दी गई थी। इन्हीं दिनों फिल्म निर्माता सशधर मुखर्जी अपने बेटे जॉय मुखर्जी को फिल्म इंडस्ट्री में लाने की तैयारी में जुटे हुए थे। इसके लिए नए चेहरे की तलाश कर रहे थे। तभी उन्होंने फिल्म अबाणा में साधना के अभिनय को देखा और अपनी फिल्म लव इन शिमला के लिए उन्हें साइन किया।

फैशन ट्रेंड को भारत में पॉपुलर बनाने वाली साधना

साल 1960 में रिलीज हुई इस फिल्म के लिए साधना का नया लुक दिया गया जो 'साधना कट' के नाम से मशहूर हो गया। फिल्‍म का निर्देशन आर.के. नैय्यर ने किया था। दरअसल साधना का माथा बहुत चौड़ा था उसे छुपाने के लिए उनके बालों को ऐसा कट दिया गया था। उनके हेयर स्‍टाइल का जलवा इस कदर फैल था कि 'साधना कट' पूरे भारत की गली-गली में मशहूर हो गया था। इसके अलावा 1965 में फिल्म वक्त के जरिए चूड़ीदार सलवार कमीज को लेकर आने का श्रेय भी साधना को ही जाता हैं। तीन फिल्मों वो कौन थी, तेरा साया और अनीता में लगातार मिस्ट्री गर्ल की भूमिका निभाने के बाद साधना को बॉलीवुड की मिस्ट्री गर्ल के नाम से भी पहचान मिली।

पढ़ें: अपनी शर्तों पर जीने वाली वहीदा रहमान, जिनके अभिनय का सारा जहां है दीवाना

1966 में बनी मशहूर फिल्म मेरा साया के एक गीन ने बरेली को हमेशा के लिए अमर कर दिया है। जा भी बरेली शहर का नाम आता है तो फिल्म अभिनेत्री साधना के ऊपर फिल्माया गीत ‘झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में' आज भी ताजा लगता है। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर खुद के प्रोडक्शन हाउस की शुरुआत की। एक निर्माता के तौर पर उन्होंने 1989 में फिल्म पति परमेश्वर को तैयार किया, जिसमें डिंपल कपाडिया ने अहम भूमिका निभाई। साधना 1994 में बनी फिल्म उल्फत की नई मंजिलें में आखिरी बार नजर आई थीं। साधना को फिल्मों में खास योगदान के लिए 2002 में आईआईएफए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है।

रैंप पर वॉक करतीं पिंक साड़ी में साधना
रैंप पर वॉक करतीं पिंक साड़ी में साधना

वो आखिरी रैंप वॉक

फिल्मी दुनिया को अलविदा कहने के बाद उन्हें फिल्मों से जुड़े कार्यक्रमों में शारीक होना बंद कर दिया था। उनका मानना था कि दुनिया उनके सिनेमाई रूप को ही हमेशा याद रखे। लेकिन 2014 में पब्लिक अपीयरेंस से बचने वाली साधना, अचानक एक रैंप पर एक्टर रणबीर कपूर के साथ वॉक करती दिखाई दीं। यह उनकी लाइफ का पहला और आखिरी रैंप वॉक था। कैंसर और एड्स पर आधारित इस फैशन शो में वो पिंक साड़ी में रैंप पर वॉक करती हुई दिखीं। इसके बाद 25 दिसंबर 2015 को कैंसर की वजह से 74 वर्ष की उम्र में साधना के देहांत की खब़र आई। 

इस तरह इस खूबसूरत अदाकारा ने दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। लेकिन जैसा कि साधना जी हमेशा चाहती थीं कि उनके सिल्वर स्क्रीन वाला रूप लोगों के दिलो-दिमाग पर छाया रहे, हम सब आज भी सलोनी सी साधना को वैसे ही याद करते हैं और करते रहेंगे।

पढ़ें: वो बॉलीवुड हिरोईन जिसने अपने बल पर तमाम खानदानों को पीछे छोड़ स्टारडम की नई परिभाषा गढ़ी

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

IIMC दिल्ली से पत्रकारिता की एबीसीडी सीखी। नेटवर्क-18 और इंडिया टुडे के लिए दो साल तक काम किया। घूमने का जुनून है। इस जुनून को chalatmusaafir.in पर देखा जा सकता है। देश के कोने-कोने में जाकर वहां की विरासत और खासियत को सामने लाने का सपना है।

Related Stories

Stories by प्रज्ञा श्रीवास्तव