ईमानदारी के चलते इस आईएएस अॉफिसर का 12 साल की सर्विस में हो चुका है 9 बार ट्रांसफर

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IAS ऑफिसर तुकाराम मुंढे ऐसे अधिकारी हैं जिनका 12 साल की सर्विस में 9 बार ट्रांसफर हो चुका है और हैरानी की बात ये है, कि अपने इन 9 तबादलों के दौरान वे जहां कहीं जिस शहर में गए, वहां लोगों ने महसूस किया कि उन्हें तुकाराम जैसी अधिकारी की ही ज़रूरत थी।

आइएएस तुकाराम मुंढे (फाइल फोटो) 
आइएएस तुकाराम मुंढे (फाइल फोटो) 
आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे का भले ही बार-बार तबादला कर दिया जाता हो, लेकिन अपनी ईमानदारी और सख्त तेवर के चलते ऐसे अधिकारी अपनी जनता के जेहन में हमेशा-हमेशा के लिए मौजूद रहते हैं।

मुंढे ऐसे अधिकारी हैं कि वह जिस विभाग में भी जाते हैं, वहां की कार्यशैली एकदम बदल सी जाती है। उनका स्टाइल ही उनकी ताकत है।

क्या होता है जब एक ऑफिसर जनता के हित में कड़े फैसले लेता है? वह अपने उसूलों से समझौता नहीं करता है? अपनी सख्त छवि के लिए जाने जानेवाले IAS ऑफिसर तुकाराम मुंढे ऐसे ही अधिकारी हैं जिनका 12 साल की सर्विस में 9 बार ट्रांसफर हो चुका है। अपने इन 9 तबादलों के दौरान वे जहां कहीं गए, लोगों को लगा कि उन्हें ऐसे ही अधिकारी की जरूरत थी। वह जहां भी जाते हैं, वहां की कार्यशैली एकदम बदल सी जाती है।

25 जुलाई 2011 की बात है महाराष्ट्र के अंबड कस्बे के पास बीड-अंबड-जालना रोड पर लगभग 5,000 से अधिक लोगों की भीड़ ने हाइवे जाम कर दिया था। सभी प्रदर्शनकारी काफी गुस्से में थे और वे सड़क पर गाड़ियों की तेज स्पीड की वजह से होने वाली मौतों के लिए विरोध जता रहे थे। हाइवे जाम होने की सूचना पाकर सभी सरकारी अधिकारी मौके पर पहुंचे। वहां तुकाराम उस वक्त सोलापुर के डीएम थे। उन्होंने भीड़ को समझाने की कोशिश की और कहा कि आपकी मांग वाजिब है और हम इस पर सख्त कार्रवाई कर उचित कदम उठाएंगे।

लेकिन भीड़ किसी भी अधिकारी की बात सुनने को राजी ही नहीं थी। उन्होंने तुकाराम समेत एसडीएम और एसपी को भी बंधक बना लिया। वे अधिकारियों पर पथराव भी कर रहे थे। उस वक्त अधिकारियों के पास कोई सुरक्षाबल नहीं था और वहां पर फोर्स के पहुंचने में लगभग दो घंटे लग जाते। एसपी के साथ गए कुछ सुरक्षाबलों ने हवाई फायरिंग और लाठीचार्ज की कोशिश की, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इस स्थिति में डीएम तुकाराम को लगा कि अब अगर कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया तो वे भीड़ के हाथों मारे जाएंगे।

उनके बाकी साथी अधिकारियों को भी समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। तुकाराम ने तुरंत 'फायर' करने का आदेश दे दिया। हालांकि फायरिंग करने का आदेश एसपी को देना होता है, लेकिन उन्होंने कहा कि वह इस जिले के डीएम हैं और इसकी जिम्मेदारी वह खुद लेते हैं। पुलिस के जवानों ने फायरिंग शुरू कर दी और कुछ ही देर में सारी भीड़ गायब हो गई। घटना के कुछ देर बाद ही आईजी और कुछ मंत्री घटनास्थल पर पहुंचे। डीएम तुकाराम ने सरकार को घटना की रिपोर्ट सौंपी जिसे विधानसभा के मॉनसून सत्र में भी पेश किया गया।

तुकाराम जब तक सोलापुर जिले में रहे, अपनी ईमानदारी और सख्त प्रशासनिक रवैये से लोगों का दिल जीतते रहे। उनके काम की चर्चा पूरे महाराष्ट्र में होती थी। मुंढे ने सोलापुर जिले को अनुशासन का पाठ पढ़ाया था और प्रशासनिक कार्यों में तेजी के साथ-साथ पारदर्शिता भी लायी थी। इस वजह से लोग उनके काम की सराहना कर रहे थे।

आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के वक्त में लोगों को सही तरीके से सुविधाएं मिल रहीं थी और भ्रष्टाचार के मामले भी कम हो गए थे। लेकिन उनकी ईमानदारी की वजह से कुछ 'ताकतवर' लोगों का जीना मुश्किल हो रहा था। इसीलिए उनका ट्रांसफर कर दिया गया। 

तुकाराम एक बार नवी मुंबई महानगरपालिका निगम के कमिश्नर के पद पर भी नियुक्त किए गए थे, लेकिन यहां से भी उनका तबादला कर दिया गया। 

इसके बाद नवी मुंबई के आस-पास के इलाकों में रहने वाले लोगों ने तुकाराम मुंडे के तबादले के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान शुरू किया था। भले ही मुंढे का बार-बार तबादला कर दिया जाता हो, लेकिन अपनी ईमानदारी और सख्त तेवर के चलते ऐसे अधिकारी हमेशा याद रह जाते हैं।

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