'जुरासिक पार्क' ने मेरी ज़िंदगी बदल दी, अब नए उद्यमियों की ज़िंदगी बदलने को तैयार हूं"

डॉ रूपानाथ ने अमेरिका से जीनोमिक्स और आण्विक जीवविज्ञान में पीएचडी की और अंततः 2006 में एक्टिस बायोलॉजिक्स इंक की सह-स्थापना की ...

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डॉ रूपानाथ। एक ऐसी महिला जो, अपने सपनों को पूरा करने, राह में आने वाले हर परिवर्तन का स्वागत करने, दरवाजे पर दस्तक दे रहे अवसरों का अधिकतम लाभ लेने, और इन सब से ऊपर खुद से भी बड़े एक उद्देश्य के लिए योगदान करने के लिए ध्यान केंद्रित करने का एक सही मिश्रण है.

डॉ रूपानाथ
डॉ रूपानाथ

अपनी पीएचडी पूरी करने के बाद, डॉ रूपा ने बायोटेक का एक बड़ा केंद्र, सैन फ्रांसिस्को खाड़ी क्षेत्र में कुछ वर्षों तक काम किया और अंततः 2006 में एक्टिस बायोलॉजिक्स इंक की सह-स्थापना की। एक्टिस बायोलॉजिक्स इंक कैंसर के लिए नए उपचारों को विकसित कर रहा है। डॉ रूपा ने भारतीय कारोबार की स्थापना, कंपनियों और अमेरिकी विश्वविद्यालयों से बौद्धिक संपदा लाइसेंस प्राप्त करने में मदद और भारत में एक्टिस बायोलॉजिक्स की दवा के विकास की प्रक्रिया शुरू की। वह कंपनी की स्टार्टअप लागत निधि के लिए अनुदान आवेदनों को लिखने में शामिल रही और जैव-प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार से 10 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त करने में सफल रही। उन्होंने शोध और विकास के साथ ही मुंबई में एक्टिस, भारत के लिए क्लिनिकल विकास के प्रयास शुरू करने में मदद की। उनके अनुभव बताते हैं कि एक बेवकूफ होने के साथ ही वह अपने प्रयासों में निरंतरता बनाये रखती है और उद्यमशीलता की भावना का प्रतीक स्थापित करती हैं।

वर्तमान में, डॉ रूपा प्रमुख निवेश कंपनी मुंबई एंजेल्स में एक सक्रिय निवेशक है। मुंबई एंजेल्स प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और खुदरा क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों के स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता देता है। उन्होंने हाल ही में सिंगापुर में भारत-अमेरिका-सिंगापुर के व्यापारिक गलियारे में स्वास्थ्य, चिकित्सा उपकरण और दवा कंपनियों में निवेश करने, उन्हें सलाह और संरक्षण देने के लिए एक कंपनी ‘Videnda Pte Ltd’ की स्थापना की है। वह भारतीय कंपनियों को परामर्श देने के साथ ही अपना व्यवसाय सिंगापुर स्थानांतरित करने के बारे में विचार कर रही हैं।

डॉ रूपा स्वास्थ्य सेवा निवेश के मामले में मुंबई एंजेल्स की सलाहकार भी हैं, और वह वहाँ की सभी तकनीकी जांच-परख के प्रयासों की प्रमुख हैं। उन्होंने मुंबई एंजेल्स के साथ जीवन विज्ञान के एशियाई और कार्मिक क्लीनिकल अनुसन्धान संगठनों में निवेश किया है। जो बहुत अच्छी तरह से भारत के दवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र के नेटवर्क से जुडी हुई है। वह 'Karmic Life Sciences ' में भी एक सलाहकार और बोर्ड पर्यवेक्षक हैं। अगर आप स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में काम कर रहे एक उद्यमी हैं तो डॉ रूपा के साथ जुड़ने के लिए जरूर सोचें.

इस बातचीत में, वह भारत में स्वास्थ्य नवाचार के लिए उनके जुनून, और व्यापार में एक औरत होने के अपने अनुभव के बारे में खुल कर बात करती है:

योर स्टोरी: जीनोमिक्स और फिर एक पीएचडी करने के लिए आप कैसे उत्साहित हुईं?

रूपा नाथ: मैं मुंबई में 11 वीं और 12 वीं कक्षाओं में रूपारेल कॉलेज में पढ़ती थी। मेरी कक्षा के ज्यादातर लोगों ने या तो चिकित्सा या इंजीनियरिंग की पढाई को अपनाया। और मुझे इन दोनों में से कोई भी विषय पसंद नहीं था। मैं जब 14 साल की थी तब मैंने 'जुरासिक पार्क' नामक एक किताब पढ़ी। यह फिल्म आने के पहले की बात हैं। आपके युवा पाठकों के लाभ के लिए मैं बता दूँ कि, मैं पूर्व ऐतिहासिक काल के बारे में बात कर रही हूँ। मैं डीएनए और क्लोनिंग की अवधारणाओं के चक्कर में फंस गयी। वास्तव में ये अवधारणाएँ उन दिनों नई नई आयी थीं। यह सुनने में घिसा-पिटा लग सकता है, लेकिन यह 'जुरासिक पार्क' ही था जिसने जीवन विज्ञान में मेरी दिलचस्पी जाग्रत कर दी। मुझे मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज में अध्ययन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। जीवन विज्ञान, आनुवंशिकी और जैव रसायन विभागों में मेरे शिक्षकगण अद्भुत थे और पाठ्यक्रम बहुत ही खुले अंत वाला (ओपन एंडेड) और स्वरूप में प्रयोगात्मक था, पीएचडी की दिशा में तैयारी की एकदम उचित मानसिकता के साथ वास्तव में उस दौरान मैंने बहुत मज़े किये। मैं अपनी पीएचडी करने के लिए अमेरिका गयी, जो कि मेरा सपना था.

योर स्टोरी: तो पीएचडी का अनुभव कैसा था?

रूपा नाथ: पीएचडी करना एक बहुत ही मुश्किल काम है. मैं ने लगभग छह साल तक रोज़ 16 -16 घंटे काम किया. इसमें कहीं पहुँच पाने के लिए काम के लंबे समर्पित घंटे की आवश्यकता होती है. मैं कई बार इसे बीच में ही छोड़ देना चाहती थी क्योंकि यह वास्तव में बहुत कठिन था. लेकिन जल्द ही मैं दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने के लिए इस क्षणिक भावना से बाहर आ जाती थी. मुझे यहाँ उस समय मेरे पति द्वारा दिए गए सहयोग और प्रभाव का उल्लेख करना चाहिए, ऐसे कठिन समय में जब मैं निराश होकर इसे बीच में छोड़ देना चाहती थी, वह लगातार दृढ़ थे कि मुझे अपनी डिग्री पूरी करनी ही चाहिए, और यह वास्तव में यह मेरे लिए बहुत मददगार था.

योर स्टोरी: क्या आपको हमेशा से अध्ययन को लेकर एक जूनून रहा है?

रूपा नाथ: हमारा परिवार महाराष्ट्र से है. मैं नागपुर नामक शहर में पैदा हुयी. लेकिन मैं मुंबई में पली-बढ़ी. मुझे मेरे बढ़ते बचपन और हर सुबह समुद्र तट पर सीगल को उतरते देखने की कुछ धुँधली यादें जुहू के समुद्र तट की है. लेकिन इसके अलावा भी, अपने बचपन की मेरी सबसे जल्द की स्मृति नागपुर में मेरे दादा का मुख्य रूप से ब्रिटेन की 10,000 से अधिक पुस्तकों का पुस्तकालय है. मेरी ज्यादातर गर्मियां इसी पुस्तकालय में व्यतीत होती थी; मुझे लगता है कि मैंने उन सभी पुस्तकों को पढ़ डाला था. मेरे बचपन से ही मेरा झुकाव पुस्तकों की तरफ था. बचपन से ही मुझ में यह आदत पैदा करने के लिए अपने माता पिता और दादा दादी को धन्यवाद देती हूँ. मुझे लगता है उसी समय मुझे जिज्ञासा के कीड़े ने काटा.

योर स्टोरी: आप ने अपनी पीएचडी के बाद क्या किया?

रूपानाथ: अपनी पीएचडी दौरान ही मैंने महसूस किया कि शिक्षाविद बनना मेरे बस का नहीं है. मैं उद्योग के क्षेत्र में काम करना चाहती थी, और मैं एक जीनोमिक्स स्टार्टअप में शामिल हो गयी. और इस समय के आसपास एक अद्भुत बात हुयी, मेरा बेटा मेरे गर्भ में था, और मैंने कुछ सालों के लिए अवकाश ले लिया. यह एक पागलपन की बात थी, लेकिन मैंने सोचा कि क्यों न इस समय का सदुपयोग मुझे आगे क्या करना है; इस पर चिंतन करने के लिए किया जाय. वास्तव में, अब मैं जब वापस उस अवकाश के बारे में सोचती हूँ तो लगता है कि यह सच में मेरे लिए बहुत अच्छा समय था. दो साल के अंतराल के बाद, मैं काम करने के लिए वापस जाना चाहती थी. यही वो समय था जब मेरी मुलाकात एक्टिस बायोलॉजिक्स के सीईओ से हुयी. यह 2005 के शुरू की बात है. मैंने उनसे कहा कि मुझे भारत में उस कंपनी को शुरू करने में मदद करना अच्छा लगेगा. इस प्रकार उद्यमिता के साथ मेरा सफर शुरू हुआ.

योर स्टोरी: एक शिक्षाविद् के लिए उद्यमशीलता अनुभव कैसा रहा?

रूपा नाथ: मेरे लिए यह बहुत अच्छा था. यह मेरे जीवन का सबसे समृद्ध अनुभव था. शून्य से एक कंपनी की स्थापना करने के बारे में बहुत कुछ सीखा है. मैं एक एक व्यक्ति वाली सेना थी. बाजार से लेकर एकाउंटेंट, वैज्ञानिक, भर्ती करने वाली; मैं सब कुछ करती थी. दुर्भाग्य से, मेरे पति अमेरिका में रहते थे, इसलिए मैं ने एक्टिस, भारत के सक्रिय प्रबंधन को छोड़ दिया, और वापस सैन फ्रांसिस्को चली गयी और समय पर समय भारत का दौरा करती रही, मैं अभी भी एक संस्थापक के रूप में इसके कार्यकलापों में शामिल हूँ यदपि कि मेरी यह भागीदारी अंशकालिक ही है.

योर स्टोरी: मुंबई एंगेल्स में अपने निवेशक के अवतार के विषय में हमें बताएं?

रूपा नाथ: मैं अपने पति संजय नाथ (ब्लुम वेंचर्स), जिन्होंने अभी-अभी भारत में अपने वेंचर फंड की स्थापना की है, के साथ वर्ष 2010 में पूर्णकालिक रूप से भारत आ गयी. मैं ने 2006 में जिस कंपनी की स्थापना की थी, उसे भारतीय डीसीजीआई के विनियामक मुद्दों के कारण बंद करना पड़ा. और मैं फिर वही कि वही थी. मैं हतप्रभ थी कि अब आगे क्या किया जाय. मेरे पति मुंबई एंजेल्स नामक एक समूह में शामिल थे और उन्होंने मुझे इसकी बैठकों में शामिल होने के लिए कहा. मैंने मन में सोचा, 'एक जैव और स्वास्थ्य के क्षेत्र का व्यक्ति एक तकनीक निवेश समूह की बैठकों में क्या करेगा?' लेकिन मैं ने अनिश्चितता को गले लगाने के लिए चुना, और बस मैं संभावनाओं का पता लगाने के उद्देश्य से आगे बढ़ी. कुछ समय के बाद, मैं ने मुंबई एंजेल्स के लिए स्वास्थ्य सौदों का विश्लेषण शुरू कर दिया. इस तथ्य के साथ कि मैं मुंबई एंजेल्स के लिए सौदों का विश्लेषण का योगदान करने में सक्षम हूँ, और भारत में प्रारंभिक चरण में स्वास्थ्य नवाचार को समझना वास्तव में मेरे लिए प्रेरणादायक है. मैं ‘YogaSmoga’ के नाम से उनके लिए एक निवेश किया था, जिसने वास्तव में अच्छा प्रदर्शन किया है. मैं निवेश कर के आनंदित होउंगी ऐसा कभी भी नहीं सोचा था, लेकिन अब मैं वास्तव में इसका आनंद ले रही हूँ. मैं उस उद्यमशीलता और उद्यम को सहयोग करने के लिए तत्पर हूँ, जहां मैं मूल्य वर्धन कर सकूँ; स्वास्थ्य देखभाल, कल्याण और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र मुझे वास्तव में उत्साहित करते हैं.

योर स्टोरी: अपने पति संजय नाथ के साथ अपने रिश्ते के बारे में हमें बताएं?

रूपा नाथ: उन्हें पाकर मैं स्वयं को बहुत भाग्यशाली मानती हूँ. मुझ पर अपने पति का शुरु से ही जो प्रभाव रहा है मैं उसका उल्लेख अवश्य करना चाहूंगी. वह हमेशा से ही बहुत उद्यमशील रहे हैं. उन्होंने ठीक 21 साल में बिट्स, पिलानी से निकलते ही अपनी पहली कंपनी शुरू की. मेरी पीएचडी के समाप्त होने से पहले हम छह साल तक डेटिंग करते रहे है, और फिर हम ने शादी कर ली. विवाह साहचर्य और सच्ची भागीदारी है. मेरी पीएचडी के दौरान, जब कभी मैं कमजोर पड़ जाती थी या जब मैं छोड़ देने का विचार करने लगती थी, मेरे पति ने मुझे कभी भी ऐसा नहीं करने दिया और वो हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे. मैं बहुत से सहेलियों को जानती हूँ जिनके पति उन्हें पीएचडी नहीं करने देना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यदि महिलाएँ पुरुषों की तुलना में अधिक शिक्षित हो जाएँगी तो यह उनके लिए खतरा होगा. यह एक बहुत पुरानी सोच है. हालांकि, प्रगतिशील पुरुष भी हैं और मैं उनका बहुत सम्मान करती हूँ. सौभाग्य से मेरे लिए, मेरे पति एक बहुत ही प्रगतिशील व्यक्ति है. मेरा दृढ़ विश्वास है कि हर सफल महिला के पीछे एक पुरुष का सहयोग होता है. मैं हर स्टोरी के सभी पाठकों से यह सोचने के लिए आग्रह करती हूँ कि वे अपने साथी में क्या गुण देखना चाहते हैं. बहुत ही सहयोगी ससुराल पाकर भी मैं भाग्यशाली रही हूँ.

योर स्टोरी: आपके अपने अनुभव से सीख लेते हुए, कारोबार की दुनिया में महिलाओं के बारे में कुछ टिप्पणियों को हमारे साथ साझा करें?

रूपा नाथ: महिलाएँ पुरुषों की तुलना में बहु-कर्म में ज्यादा बेहतर हैं. महिलाएँ निष्पादन में बहुत अच्छी होती हैं. वास्तव में, केवल सभी महिलाओं के नेतृत्व वाली कंपनियों पर नज़र डालें और आप खुद जान जायेंगें. महिलाएँ काम और जीवन में संतुलन बनाए रखना भी बखूबी जानती हैं और महिलाओं को रोजगार देने वाली कंपनियों को इस तथ्य के प्रति संवेदनशील होना चाहिए. कुछ महिलाओं का असुरक्षित महसूस करना समझ में आता है क्योंकि हम एक बहुत ही पितृसत्तात्मक माहौल में बड़े होते हैं. जो महिलाएँ स्वतंत्र हैं, या जिन्होंने कैरियर पर मजबूत ध्यान केंद्रित किया हुआ है, उन महिलाओं को यहां भारत में कई पुरुषों द्वारा अनुकूल रूप से नहीं देखा जाता है. इसे दूर होने में अभी एक-दो पीढ़ियां लगेगी, लेकिन इसे निश्चित रूप से दूर होना ही होगा. महिलाओं को एक दूसरे पर और अधिक भरोसा करने की जरूरत है, लेकिन ऐसा हो पाना थोड़ा मुश्किल लगता है. पुरुष एक दूसरे पर आसानी से विश्वास कर लेते हैं. यदि महिलाएँ बच्चा होने के बाद एक ब्रेक लेना चाहती हैं और घर में रहती हैं, तब उन्हें यह करना चाहिए. इसी तरह, पुरुषों को भी एक पितृत्व अंतराल लेने के लिए स्वतंत्र महसूस करना चाहिए. वास्तव में, इस प्रकार के अंतराल स्वयं को खोजने का सबसे अच्छा तरीका है.

योर स्टोरी: आज की आपकी भूमिका में आपको सबसे अधिक क्या रोमांचित करता है?

रूपानाथ: मैं भारत में स्वास्थ्य नवाचार को प्रोत्साहित करना चाहती हूँ. भारत स्वास्थ्य देखभाल के एक टाइम बम पर बैठा हुआ है. हम एक जीवन शैली के बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं. पहले से कहीं ज्यादा छोटी उम्र में ही लोगों को बहुत से रोग पकड़ रहे हैं. भारत में हमारे पास इस परिवर्तन का सामना करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है. एक बहु डॉलर तकनीक कंपनी के निर्माण का क्या मतलब जब हमें जरूरत का साफ पानी भी पीने के लिए उपलब्ध नहीं है. मैं उपभोक्ता तकनीक के खिलाफ नहीं हूँ लेकिन बहुत से अन्य क्षेत्र भी हैं जिन पर भी उद्यमियों को ध्यान देना चाहिए. मेरा व्यक्तिगत पैसा केवल स्वास्थ्य, कल्याण और ऊर्जा के मामले की कंपनियों में जाता है. मुझे उम्मीद है कि हमारे बच्चों को हम से ज्यादा बेहतर और सुरक्षित भविष्य का आनंद उठाने को मिले. मैं वास्तव में खुश हूं कि मैं स्वास्थ्य नवाचार में योगदान कर पा रही हूँ और इस क्षेत्र के कुछ महान उद्यमियों का समर्थन करके एक प्रभाव पैदा कर पा रही हूँ.