नीति आयोग की ‘लकी ग्राहक योजना’, मेगा पुरस्कार 1 करोड़ रुपये

‘लकी ग्राहक योजना’ के अंतर्गत 340 करोड़ रुपये के पुरस्कारों की घोषणा की गई है।

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नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने क्रिसमस के दिन से पुरस्कार देने की घोषणा की है। यह पुरस्कार उपभोक्ताओं के साथ साथ दुकानदारों को भी दिये जायेंगे। पुरस्कार दैनिक, सप्ताहिक आधार पर दिये जायेंगे साथ ही बड़ा नकद पुरस्कार भी दिया जायेगा। कुल 340 करोड़ रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे।

अमिताभ कांत, सीईओ, नीति आयोग
अमिताभ कांत, सीईओ, नीति आयोग
नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान में आया उछाल, प्वाइंट ऑफ सेल के जरिये लेनदेन भी 95 प्रतिशत बढ़ा : अमिताभ कांत

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कान्त ने ‘लकी ग्राहक योजना’ और ‘डिजी धन व्यापार योजना’ की घोषणा करते हुए कहा है, कि इनके दायरे में 50 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक के छोटे लेनदेन आएंगे। इसका मकसद समाज के प्रत्येक वर्ग को डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहित करना है। कान्त ने इसे देशवासियों के लिए क्रिसमस का तोहफा करार दिया। उन्होंने कहा कि इसका पहला ड्रॉ 25 दिसंबर को होगा और ‘मेगा ड्रॉ14 अप्रैल को बी आर अम्बेडकर जयंती पर होगा।

नेशनल पेमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) 25 दिसंबर से अगले 100 दिन तक 15,000 विजेताओं की घोषणा करेगा। प्रत्येक विजेता को 1,000 रुपये दिए जाएंगे। ग्राहकों तथा दुकानदारों के लिए 7,000 साप्ताहिक पुरस्कार होंगे। नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि इन योजनाओं के जरिये हमारा लक्ष्य गरीब, मध्यम वर्ग तथा छोटे कारोबारी हैं। हम उन्हें डिजिटल भुगतान क्रान्ति में लाना चाहते हैं। डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने की इस योजना पर अनुमानित खर्च 340 करोड़ रपये आएगा।

उपभोक्ताओं के लिए मेगा पुरस्कार एक करोड़ रुपये, 50 लाख और 25 लाख रुपये का होगा। मर्चेंट या दुकानदारों के लिए यह 50 लाख, 25 लाख और 5 लाख रुपये होगा।

उन्होंने कहा कि 500, 1,000 रुपये के नोट बंद होने के बाद पीओएस लेनदेन में आठ नवंबर से सात दिसंबर के बीच 95 प्रतिशत का उछाल आया है। रुपै कार्ड से लेनदेन 316 प्रतिशत और ई-वॉलेट से 271 प्रतिशत बढ़ा है। दूसरी तरफ यूपीआई और यूएसएसडी के जरिये लेनदेन 1200 प्रतिशत बढ़ा है। कान्त ने कहा कि यूपीआई, यूएसएसडी, आधार के जरिये भुगतान प्रणाली और रपे कार्ड से किया गया सभी तरह का भुगतान लकी ड्रा में शामिल किये जायेंगे।

निजी क्रेडिट कार्डों और निजी कंपनियों के ई-वॉलेट के जरिये किये गये लेनदेन पर यह योजना लागू नहीं होगी।

उधर दूसरी तरफ अमिताभ कान्त ने कहा है, कि आंध्र प्रदेश की तर्ज पर ही झारखंड में भी बिजली के पोल के माध्यम से गांवों और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट की सुविधा का विस्तार किये जाने की आवश्यकता है, जिससे समूची आबादी को ज्ञान के नये भंडार से और कैशलेस बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा। मुख्यमंत्री रघुवर दास से मुलाकात के बाद राज्य के अधिकारियों को संबोधित करते हुए अमिताभ कान्त ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि झारखंड इंटरनेट की सेवाओं के प्रसार के मामले में आंध्र प्रदेश का अनुसरण कर कैशलेस प्रणाली को लागू करने में देश में अग्रणी बन सकता है।

झारखंड में 95 प्रतिशत आबादी को आधार की व्यवस्था से जोड़ा जा चुका है। लिहाजा बैंकिंग व्यवस्था को आधार नंबर से जोड़ देने से सभी को कैशलेस व्यवस्था से जोड़ने में बड़ी मदद मिलेगी।

कान्त ने आह्वान किया कि झारखंड के अधिकारी कैशलेस व्यवस्था के वाहक बनें और राज्य को उन्नति के पथ पर आगे ले जाये। यहां उन्होंने कहा कि आठ से 30 दिसंबर के बीच डिजिटल भुगतान करने वाले व्यापारियों और आम लोगों को लॉटरी से चयन कर पुरस्कृत किया जायेगा। अमिताभ ने कहा, ‘यह देश की जनता के समक्ष एक अवसर है कि वह ‘कैशलेस’ होने की बजाय ‘लेसकैश’ की ओर अग्रसर हो जिससे अर्थव्यवस्था से कालाधन समाप्त करने में बड़ी मदद मिलेगी। अभी देश में 86 प्रतिशत कारोबार नकदी आधारित है, जिसे बदलकर नकदी रहित व्यवस्था कायम करने की आवश्यकता है। इसका एक लाभ यह भी होगा कि अभी देश में कर अदा कर रहे लोगों की संख्या में बड़ी बढ़ोत्तरी होगी।'