पुलिसवाले की नेकदिली, गलती हुई तो काट दिया खुद का चालान

इस पुलिस वाले ने दिया ईमानदारी का बेहतरीन परिचय...

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जम्मू और कश्मीर पुलिस में काम करने वाले सब इंस्पेक्टर मसरूर अली ने अपनी गाड़ी को पार्किंग में लगाते वक्त एक दूसरे गाड़ी वाले को अनजाने में टक्कर मार दी थी। लेकिन उन्होंने मामले को दबाने की बजाय खुद ही अपनी गाड़ी का चालान कर दिया।

सब इंस्पेक्टर मसरूर अली
सब इंस्पेक्टर मसरूर अली
मसरूर ने चालान की पर्ची के साथ छोड़े नोट में अपना नंबर भी लिखा था। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की मदद के लिए वे उनसे संपर्क कर सकते हैं।

मसरूर ने बाद में इस बारे में बताया कि वे तो बस एक सभ्य नागरिक के तौर पर अपना कर्तव्य निभा रहे थे। उन्होंने कहा, 'किसी से भी गलती हो सकती है।'

पुलिस और प्रशासन के बेरुखी भरे रवैये से हम सभी भारतीय कभी न कभी दो चार हुए ही रहते हैं, इसीलिए जितना हो सकता है लोग उनसे दूरी बनाकर रखते हैं। लेकिन कश्मीर के एक पुलिसकर्मी ने ऐसा काम कर दिया है जिसके बारे में सुनकर आप पुलिस के बारे में अपने दिमाग में बनाई हुई छवि को बदलने के बारे में सोचने लगेंगे। दरअसल जम्मू और कश्मीर पुलिस में काम करने वाले सब इंस्पेक्टर मसरूर अली ने अपनी गाड़ी को पार्किंग में लगाते वक्त एक दूसरे गाड़ी वाले को अनजाने में टक्कर मार दी थी। लेकिन उन्होंने मामले को दबाने की बजाय खुद ही अपनी गाड़ी का चालान कर दिया।

जिस गाड़ी में मसरूर की गाड़ी से टक्कर लगी थी वह कश्मीर के डॉक्टर आबिद की गाड़ी थी। इस वाकये को सेना के एक पूर्व अधिकारी ने ट्विटर पर साझा किया और देखते ही देखते यह वायरल हो गया। पूरा वाकया कुछ ऐसा था कि अनंतनाग जिले के जंगलात मंडी अस्पताल में पार्किंग में खड़ी एक गाड़ी में एसआई मसरूर अली ने कार से टक्कर मार दी थी। उन्होंने ऐसा जानबूझ कर नहीं किया था, बल्कि जरा सी सावधानी हटने पर ऐसा हो गया। लेकिन अपनी नेकदिली से लोगों को प्रभावित कर देने वाले मसरूर ने तुरंत चालान बुक मंगाई और अपनी ही गाड़ी का चालान काट दिया।

यह घटना अनंतनाग के जंगलाट मंडी में बने अस्पताल की है। मसरूर ने चालान की पर्ची को डॉ. आबिद की गाड़ी पर रख दिया। डॉ. आबिद ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर इसे शेयर करते हुए कहा कि ऐसी घटना केवल कश्मीर में ही देखने को मिल सकती है। इस नेक कदमी से वह अपनी जमीन पर सुरक्षित और सहज महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि गलती इंसानी फितरत है, लेकिन जो इंसान अपनी गलती मान लेता है, वह भविष्य में एक नेक आदमी बनकर उभरता है। मसरूर ने चालान की पर्ची के साथ छोड़े नोट में अपना नंबर भी लिखा था। उन्होंने कहा कि वे उनसे संपर्क कर सकते हैं।

मसरूर ने बाद में इस बारे में बताया कि वे तो बस एक सभ्य नागरिक के तौर पर अपना कर्तव्य निभा रहे थे। उन्होंने कहा, 'किसी से भी गलती हो सकती है। पुलिस के लोग कोई सुपरमैन तो होते नहीं, लेकिन अपनी गलती का अहसास होना बेहद जरूरी है। इससे देश के नागरिक अच्छे इंसान बन पाएंगे।' मसरूर ने कहा कि इससे उनके सहकर्मी और बाकी लोग भी सीख लेंगे और गलती का अहसास होने पर माफी मांगेगे। वे अभी अनंतनाग में तैनात है।

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