एक इंजिनियर ने चाय बेचने के लिए छोड़ दी 30 लाख की नौकरी

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खुली हवा, अच्छा सा मौसम और 22 तरह के स्वाद की अलग-अलग खासियत वाली चाय वो भी कुल्हड़ में, यह पहचान है भोपाल के शिवाजी नगर में चलने वाले चाय कैफे 'चाय-34' की, जिसे चलाते हैं मधुर मल्होत्रा। मधुर वैसे तो अॉस्ट्रेलिया में तगड़े पैकेज की नौकरी कर रहे थे, लेकिन उस काम में कुछ मन नहीं लगा, तो लौट आये भारत और बेचनी शुरू कर दी कुल्हड़ में चाय...

हाथ में कुल्हड़ लिये हुए मधुर मल्होत्रा। फोटो साभार: सोशल मीडिया
हाथ में कुल्हड़ लिये हुए मधुर मल्होत्रा। फोटो साभार: सोशल मीडिया
एक इंजिनियर ने मां के लिए छोड़ दी 30 लाख की नौकरी और खोल ली चाय की दुकान।

33 साल के मधुर मल्होत्रा चाय बेचने से पहले ऑस्ट्रेलिया में इंजिनियर थे। वे 2009 में भारत लौट आए। इसके पहले उन्होंने आईटी और कम्यूनिकेशन में ऑस्ट्रेलिया से ही मास्टर्स किया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें वहीं एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई। मधुर को वहां काफी मोटी तनख्वाह मिलती थी, लेकिन उनके माता-पिता यहां भोपाल में अकेले रहते थे।

चाय सदाबहार पेय है। हालांकि सर्दी और बारिश में चाय की चुस्कियों का मजा ही कुछ ही और होता है। पर गर्मी के मौसम में भी चाय पीने वाले पीते रहते हैं। वैसे चाय के महत्व बारे में मधुर मल्होत्रा से बेहतर कौन जान सकता है, जिन्होंने चाय बेचने के लिए ऑस्ट्रेलिया में अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी। खुली हवा, अच्छा सा मौसम और 22 तरह के स्वाद की अलग-अलग खासियत वाली चाय वो भी कुल्हड़ में, यह पहचान है भोपाल के शिवाजी नगर में चलने वाले चाय के कैफे 'चाय-34' की। इस कैफे को मधुर चलाते हैं।

33 साल के मधुर मल्होत्रा चाय बेचने से पहले ऑस्ट्रेलिया में इंजिनियर थे। वे 2009 में भारत लौट आए। इसके पहले उन्होंने आईटी और कम्यूनिकेशन में ऑस्ट्रेलिया से ही मास्टर्स किया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें वहीं एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई। मधुर को वहां काफी मोटी तनख्वाह मिलती थी, लेकिन उनके माता-पिता यहां भोपाल में अकेले रहते थे। एक बार उनकी मां गंभीर रूप से बीमार हो गईं और उन्हें मां की देखभाल करने के लिए तुरंत ऑस्ट्रेलिया से इंडिया आना पड़ा। वह बताते हैं, 'मेरी मां की ओपन हार्ट सर्जरी होनी थी। वह 72 साल की हैं और मेरे पिता 78 साल के। बहनों की शादी होने के बाद उन्हें अकेले ही रहना पड़ रहा था। इसलिए मुझे ऑस्ट्रेलिया से वापस अपने देश लौटना पड़ा।'

पत्नी और बेटी के साथ मधुर। फोटो साभार: सोशल मीडिया
पत्नी और बेटी के साथ मधुर। फोटो साभार: सोशल मीडिया

मधुर जब ऑस्ट्रेलिया से नौकरी छोड़कर वापस भारत आए थे, तो उनके पास कई बड़ी कंपनियों के ऑफर थे, लेकिन उन्होंने सोच लिया था कि वो खुद का बिजनेस शुरु करेंगे।

इंडिया वापस लौटने के बाद मधुर ने फैमिली का कंस्ट्रक्शन बिजनेस शुरू किया लेकिन पुराना काम होने की वजह से उन्हें मजा नहीं आ रहा था और वह इससे असंतुष्ट हो रहे थे। ऐसे ही एक दिन मधुर अपनी दोस्त शेली जॉर्ज के साथ एक चाय की दुकान पर गए। उन्होंने देखा कि चाय बनाने वाले के हाथ साफ नहीं है और वह उन्हीं खुले हाथों से दूध निकालकर चाय बना रहा था। इसके अलावा वहां चाय की दुकान पर अधिकतर लोग सिगरेट फूंकने वाले थे इससे भी मधुर को काफी दिक्कत हुई। उन्होंने इसके साथ ही एक और चीज पर गौर किया कि वहां लड़कियां नदारद थीं। इसके बाद मधुर ने सोचा कि क्यों न इससे बेहतर कोई चाय की दुकान खोली जाए।

दोनों ने एक छोटा-सा चाय का कैफे खोलने का प्लान बनाया जहां अच्छे माहौल में लोग अपनी फैमिली या दोस्त के साथ सिर्फ चाय पीने आएं। कैफे खोलने के बाद पहले तो उन्होंने ईरानी चाय बनाना शुरू किया, लेकिन उनका यह आइडिया काम नहीं आया क्योंकि अधिकतर लोग इस तरह की चाय के स्वाद से अनजान थे। फिर उन्होंने थोड़ी-सी रिसर्च की और पाया कि अगर कुल्हड़ में सामान्य चाय को बेहतर बनाकर बेचा जाए तो लोग आकर्षित हो सकते हैं। उन्हें लगा कि कुल्हड़ पर्यावरण के लिहाज से भी अच्छा विकल्प है। धीरे-धीरे मधुर ने चाय की 22 कैटिगरी बना दीं।

मधुर का कैफे चाय- 34. फोटो साभार: सोशल मीडिया
मधुर का कैफे चाय- 34. फोटो साभार: सोशल मीडिया

चाय-34 में फास्ट फूड भी मिलते हैं, लेकिन लोग यहां चाय की वजह से ज्यादा आते हैं। आम भारतीय चाय से अलग यहां दूध की कम मात्रा मिलाई जाती है। इसके साथ ही कैफे में स्मोकिंग प्रतिबंधित है।

मधुर और उनकी दोस्त शेली जॉर्ज ने अपनी सारी सेविंग्स इस कैफे को बनाने में खर्च कर दी। उनका कैफे तो छोटा ही था, लेकिन उनकी मेहनत और लगन इतनी ज्यादा थी कि कैफे के पॉप्युलर होने में देर नहीं लगी। पैसों की कमी होने की वजह से उनके पास कोई स्टाफ नहीं था और वे खुद ही चाय तैयार करते थे और खुद ही चाय के कुल्हड़ उठाकर ग्राहकों को देते थे। चाय-34 में फास्ट फूड भी मिलते हैं, लेकिन लोग यहां चाय की वजह से ज्यादा आते हैं। मधुर बताते हैं कि आम भारतीय चाय से अलग उनके यहां दूध की कम मात्रा मिलाई जाती है। इसके साथ ही कैफे में स्मोकिंग प्रतिबंधित है।

इस कैफे में हर रोज तकरीबन 50 से 100 ग्राहक आते हैं। वहीं सर्दियों में यह संख्या बढ़कर 200 से 400 तक हो जाती है। चाय-34 में कुछ रेग्युलर कस्टमर्स भी हैं। अब मधुर के पास 6 लोगों का स्टाफ भी हो गया है। वह बताते हैं, 'भोपाल लौटने के बाद मैं हर रोज दोस्तों से मिलता था और अलग-अलग तरह के आइडिया के बारे में बात होती थी।' 

मधुर का कहना है कि आप चाय से किसी के दिल में सीधे उतर सकते हैं। मधुर के कैफे में तुलसी, इलाइची, तुलसी-अदरक, मसाला चाय जैसी कई देसी वैराइटीज के अलावा लेमन-हनी, लेमन-तुलसी और रॉ टी फ्लेवर्स भी शामिल हैं।

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