हिमालय की अमूल्य संपदा बचाने के लिए शुरुआत होगी षट् वर्षीय योजना की

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हिमालय पर्वत हमारे देश की बेशकीमती संपदा है। हिमालय की पारिस्थितकी, वहां का वन्य जीवन, प्राकृतिक संपदाएं अमूल्य हैं। हिमालय न होता तो शायद अपने देश का पर्यावरण इतना संतुलित न होता। लेकिन दुखद ये है कि अपने तुच्छ लाभ के लिए हिमालय और उसकी संपत्ति को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर
केंद्र सरकार ने भारत के चार राज्यों में फैले उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक छह साल का प्रोजेक्ट 'सीक्योर हिमालय' लॉन्च किया है। स्थानीय और विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण जैव विविधता, भूमि और वन संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए इस योजना के अंतर्गत काम किया जाएगा।

इसी के साथ भारत वन्यजीव मोबाइल ऐप की भी शुरुआत की गई और 2017-2031 की अवधि के लिए देश की राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना जारी की गई। यह योजना 103 वन्यजीव संरक्षण कार्यों और 250 परियोजनाओं के माध्यम से आनुवंशिक विविधता और टिकाऊ विकास के संरक्षण पर केंद्रित है। 

हिमालय पर्वत हमारे देश की बेशकीमती संपदा है। हिमालय की पारिस्थितकी, वहां का वन्य जीवन, प्राकृतिक संपदाएं अमूल्य हैं। हिमालय न होता तो शायद अपने देश का पर्यावरण इतना संतुलित न होता। लेकिन दुखद ये है कि अपने तुच्छ लाभ के लिए हिमालय और उसकी संपत्ति को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है। हिमालय को जितना चोट पहुंचेगी, हमारा भविष्य उतना खतरे की दलदल में फंसता जाएगा। हिमालय को संभालकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। वहां की नैसर्गिक खूबसूरती और वहां का प्राकृतिक धन जितना हिमालय की सेहत के लिए अच्छा है, उससे कहीं ज्यादा हम इंसानों के लिए फायदेमंद और जरूरी है।

केंद्र सरकार ने भारत के चार राज्यों में फैले उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक छह साल का प्रोजेक्ट 'सीक्योर हिमालय' लॉन्च किया है। स्थानीय और विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण जैव विविधता, भूमि और वन संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए इस योजना के अंतर्गत काम किया जाएगा। हिम तेंदुए और अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण इस योजना के उद्देश्य हैं। उनके निवास का बंदोबस्त इस परियोजना का प्रमुख घटक है। ये प्लान इस क्षेत्र में लोगों की आजीविका सुनिश्चित करने और वन्यजीव अपराध को कम करने के लिए प्रवर्तन बढ़ाने पर भी ध्यान देगा। यूएनडीपी के साथ मिलकर ग्लोबल वाइल्ड लाइफ प्रोग्राम (जीडब्ल्यूपी) सम्मेलन के उद्घाटन दिवस पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने इस परियोजना सीक्योर हिमालय का शुभारंभ किया था।

क्या है इस योजना का ब्यौरा-

इस योजना के अंतर्गत सुरक्षित आजीविका, संरक्षण, टिकाऊ उपयोग और उच्च श्रेणी के हिमालयी पारिस्थितिक तंत्र की बहाली का विशिष्ट परिदृश्य है। इसमें चैंगथांग (जम्मू और कश्मीर), लाहौल, पंगी और किन्नौर (हिमाचल प्रदेश), गंगोत्री-गोविंद और दरमा-पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) में बांस घाटी और कंचनजंघा ऊपरी तीस्ता घाटी (सिक्किम) शामिल हैं। इस परियोजना के तहत प्रवर्तन के प्रयासों और निगरानी में कुछ औषधीय और सुगंधित पौधों में अवैध व्यापार पर रोक लग जाएगी जो इन परिदृश्यों में सबसे ज्यादा खतरे वाली प्रजातियों में से हैं।

इसी के साथ भारत वन्यजीव मोबाइल ऐप की भी शुरुआत की गई और 2017-2031 की अवधि के लिए देश की राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना जारी की गई। यह योजना 103 वन्यजीव संरक्षण कार्यों और 250 परियोजनाओं के माध्यम से आनुवंशिक विविधता और टिकाऊ विकास के संरक्षण पर केंद्रित है। योजना का जिक्र करते हुए केंद्रीय पर्यावरण सचिव अजय नारायण झा ने कहा कि वन्यजीव योजना में जलवायु परिवर्तन को एकीकृत करने जैसे मुद्दों; वन्यजीव स्वास्थ्य प्रबंधन और तटीय और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र का संरक्षण कुछ नए मुद्दे हैं जिन्हें इस तीसरी राष्ट्रीय वन्य जीवन क्रिया योजना में शामिल किया गया है।

हिमालय को बचाने को सब साथ-

भारत के अलावा, 2 अक्टूबर को 18 देशों के प्रतिनिधियों और वन्यजीव विशेषज्ञ वैश्विक वन्यजीव कार्यक्रम सम्मेलन में भाग लिया। झा ने टाइम्स नेटवर्क को बताया कि सम्मेलन सभी 19 राष्ट्रों के बीच रणनीतिक साझेदारी बनाने के लिए एक मंच प्रदान करेगा और वन्यजीव तस्करी को नियंत्रित करने के लिए भारत को अपने प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करने के लिए सक्षम करेगा। सम्मेलन के दौरान चर्चा की जायेगी कुछ मुद्दों में सार्वजनिक-निजी साझेदारियों और वन्यजीव-आधारित पर्यटन में अवसरों के साझा लाभों को बढ़ावा देने के लिए साझेदारी का लाभ उठाना शामिल है। कार्यक्रम एक विश्व बैंक की साझेदारी है जो वन्य जीवन में अवैध तस्करी से जूझकर संरक्षण और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देता है।

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