भारतीयों ने फ्री 'लव कॉन्डम' का उठाया फायदा, तीन महीने में स्टॉक हुआ खत्म

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ग्लोबल चैरिटी एड्स हेल्थकेयर फाउंडेशन (AHF) ने एचआईवी एड्स पर रोकथाम के लिए भारत में अपनी तरह का पहला फ्री कॉन्डम स्टोर लॉन्च किया था। 

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
 इस योजना को काफी सकारात्मक रिस्पॉन्स मिला है। इसी साल 28 अप्रैल को लॉन्च हुए फ्री कॉन्डम स्टोर ने 69 दिनों में 9.56 लाख कॉन्डोम्स डिलिवर किए।

एक सर्वे के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर 54 प्रतिशत महिलाएं और 77 प्रतिशत पुरुष कॉन्डम का प्रयोग करते हैं। भारत में कॉन्डम्स की सालाना सेल 200 से 220 करोड़ के बीच है।

भारत जैसे देश में अभी भी लोग सार्वजनिक तौर पर सेक्स के बारे में बातचीत करना मुश्किल काम समझते हैं। ऐसे में यौनजनित बीमारियों से सुरक्षा और परिवार नियोजन की समस्याएं होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। आज भी लोग मेडिकल स्टोर से कॉन्डम खरीदने में झिझकते हैं। इस झिझक का समाधान निकालने के लिए एड्स की रोकथाम के लिए काम करने वाली संस्था ने काफी बड़ा कदम उठाते हुए फ्री में कॉन्डम की डिलिवरी करने की योजना शुरू की थी। इस योजना को काफी सकारात्मक रिस्पॉन्स मिला है। इसी साल 28 अप्रैल को लॉन्च हुए फ्री कॉन्डम स्टोर ने 69 दिनों में 9.56 लाख कॉन्डम्स डिलिवर किए।

ग्लोबल चैरिटी एड्स हेल्थकेयर फाउंडेशन (AHF) ने एचआईवी एड्स पर रोकथाम के लिए भारत में अपनी तरह का पहला फ्री कॉन्डम स्टोर लॉन्च किया था। इस योजना के तहत सिर्फ एक फोन कॉल या ई-मेल के जरिए कॉन्डम के पैकेट की डिलिवरी की जा रही थी। ऑनलाइन स्टोर के डेटा के मुताबिक, 5.14 लाख कॉन्डम्स समुदायों और एनजीओ के मांगने पर उन्हें डिलिवर किए गए वहीं 4.41 लाख कॉन्डम्स व्यक्तिगत रूप से ऑर्डर किए गए थे। फाउंडेशन के प्रोग्राम डायरेक्टर वी सैम प्रसाद ने बताया कि वह इस कार्यक्रम को मिली प्रतिक्रिया से आश्चर्यचकित हैं।

यूनाइटेड नेशन के अनुसार भारत में लगभग 21 लाख लोग HIV/AIDS से संक्रमित हैं। मतलब इस संक्रमण के मामले में दुनिया में भारत का तीसरा स्थान आता है। ऐसे देश में जहां कॉन्डम अभी भी टैबू बना हुआ है और मेडिकल स्टोर में कॉन्डम खरीदने से पहले लोग अपने आसपास निगाह डालते हैं वहां 69 दिनों में 10 लाख कॉन्डम्स ऑनलाइन ऑर्डर हो जाना बड़ी बात है। संस्था ने बताया कि डेटा के मुताबिक सबसे अधिक कॉन्डम दिल्ली और कर्नाटक के लोगों ने ऑर्डर किए थे। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक परिवार नियोजन के लिए 5.6 प्रतिशत लोग ही कॉन्डम का इस्तेमाल करते हैं। कोलकाता में 19 प्रतिशत, दिल्ली में 10 प्रतिशत और बेंगलुरु में 3.6 प्रतिशत लोग कॉन्डम यूज करते हैं।

'लव कॉन्डम्स' नाम के ये कॉन्डम हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड कंपनी द्वारा बनाए गए हैं। NGO, निजी संस्थान, सामुदायिक स्वास्थ्य संगठन भी अगर चाहें तो इस प्रोग्राम का लाभ उठा सकते हैं। संस्था के एक अधिकारी ने बताया, 'हमें लगा कि 10 लाख कॉन्डम्स का स्टॉक दिसंबर तक के लिए काफी होगा लेकिन हम जुलाई के पहले हफ्ते में ही आउट ऑफ स्टॉक हो गए। हमने 20 लाख और कॉन्डम्स का ऑर्डर दिया है जो नवंबर के आखिरी हफ्ते तक मिल जाएंगे और जनवरी के लिए 50 लाख कॉन्डम्स का ऑर्डर दिया जा चुका है।'

AHF इंडिया के प्रॉजेक्ट डायरेक्टर डॉ. वी सैम प्रसाद ने कहा कि सभी जेंडर के लोगों तक कॉन्डम की पहुंच होनी चाहिए। इस अभियान का उद्देश्य भारत में कंडोम की आपूर्ति की कमी को पूरा करना है। माना जा रहा है कि लोग मेडिकल स्टोर से कॉन्डम खरीदने में झिझकते हैं इसीलिए कॉन्डम की ऑनलाइन डिलिवरी में इतनी तेजी देखी गई। ऑनलाइन कॉन्डम की डिलिवरी में कई फायदे रहते हैं। एक तो व्यक्ति को बाहर नहीं जाना पड़ता दूसरा कोई भी अन्य व्यक्ति नहीं जान सकता कि किस चीज की डिलिवरी हुई है।

एक सर्वे के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर 54 प्रतिशत महिलाएं और 77 प्रतिशत पुरुष कॉन्डम का प्रयोग करते हैं। भारत में कॉन्डम्स की सालाना सेल 200 से 220 करोड़ के बीच है। भारतीय सरकार अपने स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के माध्यम से अपने एड्स निवारण कार्यक्रम के तहत पहले ही फ्री कॉन्डम बांट रही है। हालांकि NACO कार्यक्रम से पता चला कि 2015-16 में लक्ष्य का केवल 17 प्रतिशत ही कॉन्डम का वितरण हुआ था।

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