'टीबी से हुई दादी की मौत, तभी ठान लिया था डॉक्टर बनूंगी'

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यह लेख छत्तीसगढ़ स्टोरी सीरीज़ का हिस्सा है...

छत्तीसगढ़ में कवर्धा जिला मुख्यालय से 48 किमी दूर है ग्राम कुंडा। वहां के गरीब परिवार में जन्मी होनहार बेटी यशोदा नेताम ने 89 प्रतिशत के साथ दसवीं बोर्ड पास किया। इतने ही नंबर 12वीं में भी लेकर आई। गांव से प्रोत्साहन मिला तो बचपन का संकल्प याद आया।

यशोदा नेताम
यशोदा नेताम
तभी एक दिन कचहरीपारा हाईस्कूल के प्रिंसिपल सर ने उसे फोन लगाकर जानकारी दी। बताया कि स्कूल में फ्री कोचिंग स्टार्ट होने वाली है। तुम एग्जाम देकर इसमें दाखिला ले सकती हो। इतना सुनते ही यशोदा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

जब टीबी की बीमारी से दादी की मौत हुई थी तभी से उसने ठान रखा था कि डॉक्टर बनेगी। एक बार नीट का एग्जाम दिया पर सफल नहीं हुई। अब आवासीय कोचिंग में रहकर दोबारा तैयारी कर रही है। यशोदा10 साल की रही होगी जब दादी को टीबी की बीमारी हुई। गांव में तब भी कोई सुविधा नहीं थी और आज भी हालात लगभग वैसे ही हैं। गांव की परिस्थितियां देख यशोदा ने सोचा कि काश यहां एक डॉक्टर होता तो दादी नहीं मरती। ऊपर से घर की माली हालत खराब। इलाज के लिए बाहर भी नहीं ले जा सकते। इसके बाद तो जैसे मन में गांठ बांध ली कि डॉक्टर ही बनना है। इसी संकल्प के साथ पढ़ाई करने लगी। दसवीं-बारहवीं में अच्छे अंक आए तो विश्वास जागा। इसी आत्मविश्वास के साथ 12वीं पास होने के बाद उसने नीट का एग्जाम दिया, लेकिन अच्छा रैंक नहीं आया। वह टूट गई। घर वालों से कहा- मैं नहीं कर सकती। बहुत कठिन है। मैं कर ही नहीं सकती। वह सोचने लगी अब क्या करुंगी? नहीं कर पाऊंगी। अब सपने का क्या होगा?

तभी एक दिन कचहरीपारा हाईस्कूल के प्रिंसिपल सर ने उसे फोन लगाकर जानकारी दी। बताया कि स्कूल में फ्री कोचिंग स्टार्ट होने वाली है। तुम एग्जाम देकर इसमें दाखिला ले सकती हो। इतना सुनते ही यशोदा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। डॉक्टर बनने की उम्मीद फिर से जागी। उसने फटाफट फार्म भरे। एग्जाम दिया और सिलेक्ट हो गई। अब बाकि बच्चों के साथ वह भी आवासी कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रही है। उसे विश्वास है कि इस बार सफलता जरूर मिलेगी।

कोचिंग के केमिस्ट्री टीचर और सामर्थ्य कोचिंग के डायरेक्टर हिमांशु का कहना है कि बच्चे अपना सौ फीसदी दे रहे हैं और हम भी। जब उन्हें विश्वास है तो मैं कैसे कम कह सकता हूं। हिमांशु का कहना है कि शुरुआत में उन्हें और उनके साथियों को एडजस्ट करने में समय लगा, लेकिन बच्चों का उत्साह देखकर अब वे लोग भी रम गए हैं। शुरू के एक-डेढ़ महीने बेसिक्स पर ध्यान दिया। अभी अंग्रेजी भाषा पर भी ध्यान दे रहे हैं। इससे आगे किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। छात्र-छात्राओं से आने वाले सवालों के जवाब देना और उन्हें अलग-अलग तरीके से पढ़ाना। प्रतियोगी परीक्षा के लायक बनाना हमारी प्राथमिकता है। हिमांशु को यकीन है कि जेईई और नीट में ज्यादा से ज्यादा बच्चे सिलेक्ट होंगे।

आवासीय कोचिंग के वार्डन लखनलाल वारते ने बताया कि यहां रहने वाले सभी बच्चों के खानपान का वे पूरा ध्यान रखते हैं ताकि उन्हें पढ़ाई में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। शासन-प्रशासन ने गरीब परिवार के मेरिटोरियस स्टूडेंट्स को जेईई व नीट की तैयारी के लिए इस कोचिंग की व्यवस्था की है। यहां कवर्धा के शासकीय नवीन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कचहरी पारा में इसका संचालन किया जा रहा है, जिसमें जेईई के लिए 40 और एनईईटी के लिए 60 स्टूडेंट्स का चयन किया गया है। इन्हें पूरे सत्र कोचिंग दी जाएगी।

जेईई कोचिंग के लिए अनुसूचित जाति के पांच, अनुसूचित जनजाति के आठ, अन्य पिछड़ा वर्ग के छह और अनारक्षित की 21 सीटें हैं। इसी तरह एनईईटी के लिए अनुसूचित जाति के आठ, अनुसूचित जनजाति के 13, अन्य पिछड़ा वर्ग के आठ और अनारक्षित के लिए 31 सीटें निर्धारित की गई हैं। कोचिंग में पढ़ने वाले छात्र काफी खुश हैं। उन्होंने इस अनुपम पहल के लिए सरकार के साथ प्रशासन का भी आभार जताया है। लोगों का कहना है कि इस तरह की योजनाओं से प्रदेश में शिक्षा का स्तर भी बढ़ेगा।

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