नहीं बंद किया प्लास्टिक का इस्तेमाल तो एक दिन खत्म हो जाएगा सब कुछ

खत्म हो रही धरती और पर्यावरण को बचाने की एक ज़रूर कोशिश है पृथ्वी दिवस...

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पृथ्वी को बचाने के ही मकसद से हर साल 22 अप्रैल को दुनियाभर में विश्व पृथ्वी दिवस आयोजित किया जाता है। इसके पीछे वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने, जनसंख्या वृद्धि रोकने, अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने और जीव-जंतुओं, वनों व जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में लोगों को जागरूक की सोच होती है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
2015 में हुई एक स्टडी के मुताबिक हर साल 4.8 से 12.7 लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक हर साल समुद्र में फेंका जाता है। अगर ये सिलसिला चलता रहा तो 2015 तक समुद्र में मछली से ज्यादा प्लास्टिक होगी।

मारी धरती पर संकट बढ़ता ही जा रहा है। जीवों और पौधों की कई प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं और कुछ तो विलुप्त भी हो चुकी हैं। वैज्ञानिक लगातार हमें चेतावनी दे रहे हैं कि अगर हम वक्त रहते नहीं जागे तो हमारे अस्तित्व को खत्म होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। पृथ्वी को बचाने के ही मकसद से हर साल 22 अप्रैल को दुनियाभर में विश्व पृथ्वी दिवस आयोजित किया जाता है। इसके पीछे वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने, जनसंख्या वृद्धि रोकने, अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने और जीव-जंतुओं, वनों व जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में लोगों को जागरूक की सोच होती है।

पृथ्वी पर मौजूद पेड़-पौधों और जीव-जन्तुओं को बचाने और दुनियाभर के लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के मकसद से पहली बार अमेरिका में 1970 में 'पृथ्वी दिवस' मनाया गया था। धरती को बचाने के लिए चिंतित होने वाले लोगों का सोचना था कि इससे राजनीतिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण संबंधी नीतियों को अमल में लाने के लिए दबाव बनाया जा सकेगा। हर साल की तरह इस साल भी पृथ्वी दिवस आयोजित किया जा रहा है। इस बार की थीम है, 'प्लास्टिक प्रदूषण खत्म करो'। पृथ्वी दिवस का यह 48वां संस्करण है।

हम अपने दैनिक जीवन में प्लास्टिक का बेतहाशा उपयोग करते हैं। यह भी नहीं सोचते कि यह पर्यावरण के लिए कितना खतरनाक है। हम अनुमान भी नहीं लगा सकते कि इस धरती पर कितना कचरा प्लास्टिक के रूप में मोजूद है, जो हर तरह से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। और यह सिर्फ कुछ देशों की बात नहीं है। पूरी दुनिया में प्लास्टिक का अंधाधुंध प्रयोग होता है। समय-समय पर इसके बुरे परिणाम हमें देखने को मिलते हैं। हाल ही में दक्षिणी स्पेन में एक छोटी व्हेल मछली को समुद्र तट पर मृत पाया गया था। उसके पेट में 64 पाउंड प्लास्टिक पाई गई। कई रास्तों से होकर समुद्र में प्लास्टिक गिरती है और फिर वह समुद्री जीवों के लिए खतरनाक बन जाती है।

2015 में हुई एक स्टडी के मुताबिक हर साल 4.8 से 12.7 लाख मीट्रिक टन प्लास्टिक हर साल समुद्र में फेंका जाता है। अगर ये सिलसिला चलता रहा तो 2015 तक समुद्र में मछली से ज्यादा प्लास्टिक होगी। प्लास्टिक एक सिंथेटिक पदार्थ है जिसे कंपोज होने में हजारों साल लग सकते हैं। समुद्र के अलावा जमीन पर भी लाखों टन प्लास्टिक हर साल फेंकी जाती है। जिससे पशु-पक्षियों को काफी नुकसान पहुंचता है। इतना ही नहीं आपके पीने वाले पानी में भी प्लास्टिक के कण पाए गए हैं। अगर प्लास्टिक आपके पेट में जाएगा तो ये आपके लिए कितना नुकसानदायक होता होगा, अंदाजा लगाइए।

जब पृथ्वी दिवस मनाने की शुरुआत की गई थी तो उसके पीछे अमेरिका में स्टूडेंट्स का एक बड़ा आंदोलन था। वियतनामी यु़द्ध विरोध में उठ खड़े हुए अमेरिकी विद्यार्थियों का आंदोलन। 1969 में कैलिफोर्निया में बड़े पैमाने पर बिखरे तेल से आक्रोशित विद्यार्थियों को देखकर विसकोंसिन से अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेलसन को यह विचार सूझा कि इस आक्रोश को पर्यावरणीय सरोकारों की तरफ मोड़ देना चाहिए। उन्होंने इसे देश को पर्यावरण हेतु शिक्षित करने के मौके के रूप में लिया। उन्होंने इस विचार को मीडिया के सामने रखा। अमेरिकी कांग्रेस के पीटर मेकेडलस्की ने उनके साथ कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता की। डेनिस हैयस को राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त किया गया।

यह गेलॉर्ड नेलसन के प्रयासों का ही परिणाम था कि 22 अप्रैल को अमेरिका की सड़कों, पार्कों, चौराहों, कॉलेजों, दफ्तरों पर स्वस्थ-सतत पर्यावरण को लेकर रैली, प्रदर्शन, प्रदर्शनी, यात्रा आदि आयोजित किए। विश्वविद्यालयों में पर्यावरण में गिरावट को लेकर बहस चली। ताप विद्युत संयंत्र, प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयाँ, विषाक्त कचरा, कीटनाशकों के अति प्रयोग के विरोध में तथा वन्यजीव व जैवविविधता सुनिश्चित करने वाली अनेकानेक प्रजातियों के अस्तित्व को संकट से बचाने के लिए एकमत हुए दो करोड़ अमेरिकियों की आवाज ने इस तारीख को पृथ्वी के अस्तित्व के लिए अहम बना दिया। तब से लेकर आज तक यह दिन विश्व में पृथ्वी दिवस के रूप में आयोजित किया जाता है।

अभी भी वक्त है अगर हम मिलकर सरकार पर प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के लिए कानून बनाने का दबाव डालें और अपनी जिंदगी में भी प्लास्टिक का उपयोग बंद कर दें तो वाकई हम पर्यावरण को काफी हद तक संरक्षित कर सकते हैं। हम इंसान आज इतने स्वार्थी हो गए हैं कि अपने फायदे के लिए पूरी धरती को खतरे में डाल रहे हैं। न जाने कितनी प्रजातियां इससे प्रभावित हो रही हैं। जरूरत है हम सबके साथ आने की और कुछ बड़ा बदलाव लाने की।

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