हज़ारों की नौकरी छोड़ गोभी की खेती से बन गये लखपति

दुकान और नौकरी से जो कभी कमाते थे हज़ारों वो अब गोभी की खेती से बना रहे हैं लाखों...

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पप्पू मौर्य और अजय मेहरा की मेहनत उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरमा है, जो मामूली नौकरी और दुकानदारी से घर चलाने भर की भी कमाई नहीं कर पा रहे हैं। पप्पू ने अपनी मुंबई की दुकान छोड़ और अजय ने नौकरी छोड़कर गोभी की खेती करनी शुरू की और आज वह लाखों की कमाई कर रहे हैं। आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन एक ओर जहां पप्पू गोभी की पहली खेती से 4-5 लाख की कमाई कर चुके हैं, वहीं अजय मेहरा गोभी की पहली खेती से 16 लाख का मुनाफा कमा चुके हैं...

अजय मेहरा और पप्पू मौर्य अपने अपने गोभी के खेतों में, फोटो साभार: सोशल मीडिया
अजय मेहरा और पप्पू मौर्य अपने अपने गोभी के खेतों में, फोटो साभार: सोशल मीडिया
किस्मत और मेहनत अगर साथ दे तो इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं पप्पू और अजय। ये दोनों युवा कभी करते थे नौकरी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मन्जूर था। शुरू कर दी गोभी की खेती, जिससे आमदनी होने लगी लाखों में और साथ ही बन गये 10-15 लोगों को रोज़गार देने के काबिल भी।

सुजानगंज, जौनपुर (उ.प्र.) के अरविंद मोहन लाल उर्फ पप्पू मौर्य इलेक्ट्रानिक से डिप्लोमा करने के बाद रोजी-रोटी के लिए मुंबई चले गए। वहां इलेक्ट्रानिक सामानों की बिक्री और सर्विसिंग की दुकान चलाने लगे। उससे उन्हें हर महीने 30-35 हजार रुपए की कमाई होती। उतने से मुंबई जैसे महानगर में घर-गृहस्थी संभालना उनके लिए दिनोदिन मुश्किल होता गया और हार-थक कर वर्ष 2012 में वह पुनः अपने गांव सुजानगंज लौट आए। 

पप्पू मौर्य को घर-परिवार तो चलाना ही था। सोचा, अब क्या किया जाए। गांव में खेती बाड़ी के अलावा आय का और कोई जरिया नहीं रहता है। उन्होंने अपने रिश्तेदारों से मदद मांगी। कुछ राशि जुटाई और पहली बार गोभी की फसल में हाथ डाल दिया। दो बीघे में फूल गोभी की खेती प्रारंभ कर दी। जब फसल तैयार हुई, बेचकर उससे उन्हें शुद्ध 65 हजार रुपए का मुनाफा हो गया। इससे उनका साहस बढ़ा और इच्छाशक्ति ने भी जोर मारा।

पप्पू मौर्य अपने गोभी के खेत में, फोटो साभारा: सोशल मीडिया
पप्पू मौर्य अपने गोभी के खेत में, फोटो साभारा: सोशल मीडिया

गोभी की खेती से मिली सफलता के बाद पप्पू पूरे तन-मन-धन से खेती बाड़ी में ही जुट गए। गोभी की खेती का रकबा दिनोदिन बढ़ता गया और उसी के साथ उनकी आमदनी में भी अकूत इजाफा होने लगा। इस बार उन्होंने लगभग छह एकड़ जमीन मालगुजारी पर लेने के साथ ही कुल नौ एकड़ से अधिक के खेत में गोभी की फसल रोपी दी। अकेले इसी बार वह अब तक चार से पांच लाख रुपए के बीच कमाई कर चुके हैं जबकि लगभग डेढ़ एकड़ में पसरी गोभी की फसल अभी बेचने से रह गई है। 

पप्पू अपने खेतों में सिर्फ जैविक खाद का ही प्रयोग करते हैं और अपनी जान-पहचान के किसानों को भी रासायनिक खादों से परहेज करने की सलाह देते रहते हैं। इस समय रोजाना ही जिले के बदलापुर, मछलीशहर और मुंगराबादशाहपुर की सब्जी मंडियों में उनकी एक-एक ट्रक गोभी जा रही है। इतना ही नहीं, वह अपने इस खेती के कारोबार में दस-पंद्रह लोगों को और रोजी-रोटी दिए हुए हैं। अब हालत ये हो चली है कि उनकी देखा-देखी उनके गांव-इलाके के कई और लोग गोभी की ही खेती बाड़ी में जुट गए हैं। उन्हें भी लगने लगा है कि गोभी की खेती कर आराम से घर-परिवार की गाड़ी खींची जा सकती है

अजय मेहरा अपने गोभी के खेत में, फोटो साभारा: सोशल मीडिया
अजय मेहरा अपने गोभी के खेत में, फोटो साभारा: सोशल मीडिया

पप्पू मौर्या की तरह अजय मेहरा ने भी 20 हजार की नौकरी छोड़ गोभी की खेती से पहली बार में ही कमा लिए 16 लाख रुपए।

कमोबेश कामयाबी की ऐसी जीवन गाथा बस्तर (छत्तीसगढ़) के बकावंड ब्लॉक के युवा अजय मेहरा की भी है। एग्रीकल्चर में बीएससी करने के बाद इनको एक प्राइवेट कंपनी में हर महीने 20 हजार रुपए के वेतन वाली नौकरी मिली। इनके पिता शोभा सिंह मेहरा नहीं चाहते थे कि इतनी कम आदमी पर इतना पढ़ा-लिखा अजय अपना भविष्य खराब करे। वह जिद करने लगे कि नौकरी छोड़कर गांव लौट आओ, इससे ज्यादा तो यहां घर बैठे ही कमाई कर लोगे। 

एक दिन अजय नौकरी छोड़कर अपने गांव बकावंड लौट आए और सबसे पहले इन्होंने लगभग तीस एकड़ में गोभी की खेती शुरू कर दी। जबकि बस्तर क्षेत्र मिर्च की खेती के लिए प्रसिद्ध है लेकिन गोभी की पहली ही फसल से अजय को तीन महीने के भीतर करीब 16 लाख रुपए की कमाई हो गई। इससे पहले उनके पिता पांच एकड़ में धान और अन्य दूसरी फसलों की खेती करते थे। अब वह अपने 35 एकड़ खेत में सिर्फ फूल गोभी और पत्ता गोभी की खेती कर रहे हैं। 

गोभी के खेत में काम करते हुए मजदूरों की सांकेतिक तस्वीर, फोटो साभार: Pixabay
गोभी के खेत में काम करते हुए मजदूरों की सांकेतिक तस्वीर, फोटो साभार: Pixabay

अजय चूंकि खेती की ही पढ़ाई किए हैं, सो इन्हें इसे शुरू करने में न तो किसी से अनुभव लेने की जरूरत रही, न किसी से कोई आर्थिक मदद मांगी। यहां तक की गोभी कमाई से इन्होंने अपने पिता द्वारा बैंक से लिए गए लोन का नब्बे फीसद हिस्सा भी चुकता कर दिया। 

अजय बताते हैं कि इन्होंने इस साल मलचिंग मेथड से गोभी की खेती की है। इससे पहले वह ड्रिप मेथड से करते थे। नए मेथड से उन्हें ज्यादा लाभ मिला है। इससे खेती में लगभग 70 फीसदी खर्च बच जाता है। जौनपुर के पप्पू मौर्य की तरह अजय मेहरा भी अपने खेती के कारोबार में लगभग सौ बेरोजगार किसानों और युवाओं को रोजी-रोटी दिए हुए हैं। पप्पू की ही तरह उनके गांव के भी कृष्णा पटेल, मुरलीधर कश्यप, कन्हैया पांडे आदि भी गोभी की खेती करने लगे हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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