कंपनियों में महिला निदेशक नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव

अधिकतर महिला निदेशकों की नियुक्ति प्रवर्तकों के परिवारों या रिश्तदारों में से ही 

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कंपनियों के निदेशक मंडल में वर्ष 2014 से महिलाओं की संख्या में इजाफा हुआ है लेकिन उनमें से अधिकतर महिला निदेशकों की नियुक्ति प्रवर्तकों के परिवारों या रिश्तदारों में से ही किसी की हुई जो नियुक्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव की ओर इशारा करता है।

यह जानकारी बिज डिवास फाउंडेशन की एक रपट में दी गई है। गौरतलब है कि बाजार नियामक ने फरवरी 2014 में कंपनियों के निदेशक मंडल में कम से कम एक महिला निदेशक नियुक्त करने के दिशानिर्देश जारी किए थे।

फाउंडेशन की ‘वीमेन ऑन बोर्ड्स रिफ्रेशर रपट-2016’ में कहा गया है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की केवल 67 सूचीबद्ध कंपनियों में ही महिला निदेशक नहीं है जिससे आशय है कि इस नियम को 100 प्रतिशत लागू करने में सफलता मिली है।

फाउंडेशन की बोर्ड प्रैक्टिस की प्रमुख रंजना देओपा ने कहा कि इस मामले में हमारी वैश्विक रैंकिंग 2014 के 32 वें स्थान की तुलना में अब 26वीं है। लेकिन अभी भी महत्वपूर्ण प्रगति देखा जाना बाकी है।देओपा ने कहा कि उपलब्ध आंकड़े दर्शाते हैं कि नियुक्त की गई महिला निदेशकों में से करीब 50 प्रतिशत कंपनी के प्रवर्तकों की रिश्तेदार या परिवार की सदस्य हैं जो नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव की ओर इशारा करता है।

रपट के मुताबिक करीब 90 प्रतिशत महिलाओं की कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल होने की इच्छा है और इसमें से भी अधिकतर की मर्जी स्टार्टअप या गैर-लाभकारी कंपनियों के निदेशक मंडल में शामिल होने की है। बिज डिवास फाउंडेशन एक गैर लाभकारी संगठन है जो समावेशी नेतृत्व के लिए मंच प्रदान करता है।- पीटीआई

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